मेरठ की रातें और साटिन की चादरें: एक अधूरी कहानी

मेरे जीवन की वह कहानी मेरठ की गलियों से शुरू होती है, जहाँ मेरी बुआ ग़ाज़ियाबाद के एक संयुक्त परिवार में रहती थीं। उनके देवर सुन्दर का नाम उनके व्यक्तित्व के अनुरूप ही था। जब उसकी नौकरी स्टेट बैंक में मेरठ लग गई, तो मेरे पिता ने हमारे घर से कुछ दूरी पर आवास विकास का एक छोटा सा घर उसके लिए सुनिश्चित करवा दिया। वह घर लगभग तीस गज़ का रहा होगा, जहाँ वह अकेला रहता था। पच्चीस वर्ष की आयु का वह अविवाहित युवक अपने नाम के अनुरूप ही चिकनी-गोरी त्वचा और आकर्षक व्यक्तित्व लिए हुए था। वह मेरे सपनों का राजकुमार बन गया था, हालाँकि मैं स्वयं एक बीस वर्षीय युवक था जिसकी रुचि भी पुरुषों में ही थी। यह रहस्य मेरे और मेरे दिल के अंदरूनी कोने तक ही सीमित था।

सुन्दर बैंक से लौटते समय हमारे घर के सामने से गुज़रता था। कभी-कभी मेरी माँ उसे चाय पीने के लिए रोक लेतीं और वह अन्दर आ जाता। पिता ज्यादातर समय दुकान पर रहते और माँ रसोई में व्यस्त रहतीं, इसलिए चाय परोसने का काम मेरे ही हिस्से आता। मैं उसे फूफाजी नहीं कहता था, क्योंकि वह नाराज़ हो जाता था। वह कहता कि हमारी उम्र में ज़्यादा फ़र्क नहीं है, इसलिए हम दोस्त हैं। मैं उसे नाम से ही बुलाता था। जब वह मुझे वासनापूर्ण नज़रों से देखता, तो मेरे शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगती। उसकी नज़रें मेरे अंदर बिजली सी भर देती थीं, और धीरे-धीरे वह मेरे दिल और दिमाग पर पूरी तरह छा गया।

कुछ दिनों बाद हम दोनों के बीच प्यार के बीज अंकुरित होने लगे, हालाँकि हमने इसे खुले तौर पर स्वीकार नहीं किया था। बस नज़रों के इशारों और चुप्पियों के बीच हम एक-दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं को महसूस करते रहे। सुन्दर को चुस्त कपड़े पहनने का शौक था, विशेष रूप से साटिन की शर्टें, जिनके दो बटन वह खुले रखता था। इससे उसका मर्दाना शरीर और भी आकर्षक लगता था। शर्ट के नीचे बनियान न पहनने के कारण उसके स्तन स्पष्ट दिखाई देते थे, और मेरी नज़रें अनायास ही उसके शरीर के निचले हिस्सों की ओर खिंच जाती थीं। शायद वह अंदरूनी वस्त्र भी नहीं पहनता था, क्योंकि जब उसका लिंग उत्तेजित होता, तो पैंट में स्पष्ट उभर आता था।

एक दिन वह बेबी पिंक रंग की साटिन शर्ट पहनकर आया, तो वह कामदेव सा लग रहा था। जब वह चाय पी रहा था, तो मैंने उसके पीछे जाकर उसके गले में हाथ डाल दिया और धीरे से उसके कान में कहा कि वह बहुत सेक्सी लग रहा है। इतना कहते हुए मैंने उसकी शर्ट के ऊपर से ही उसके एक स्तन को सहलाया। उसने मेरे गाल चूम लिए और ‘मेरी जान’ कहा। यह शब्द सुनकर मेरे पूरे शरीर में एक मधुर सिहरन दौड़ गई। यह पहली बार था जब किसी पुरुष ने मुझे इतने प्यार से चूमा था।

फ़रवरी के एक शनिवार की शाम को मेरी माँ ने छोले-भटूरे बनाने की योजना बनाई और सुन्दर को रात के खाने पर बुलाया। उसने कहा कि उसे कुछ काम है, इसलिए मुझे खाना उसके घर पहुँचा दिया जाए और मैं वहीं रुक जाऊँ। रविवार की छुट्टी थी, और उसने मुझे घुमाने की भी योजना बनाई। माँ ने सहमति दे दी, और मैं इस अवसर पर बहुत खुश हुआ। रात को नौ बजे मैं उसके घर पहुँचा। उसने दरवाज़ा खोला, तो बस तौलिए में लिपटा हुआ था। उसने कहा कि वह नहाने जा रहा था, और मैं चुपचाप अन्दर आ गया।

वह बाथरूम में गया और कुछ देर बाद एक फ्रेंची चड्डी पहने हुए बाहर आया, जिस पर उसने तौलिया लपेट रखा था। वह पलंग पर बैठकर खाने लगा और ज़बरदस्ती मुझे भी कुछ ग्रास खिलाया। थोड़ी देर बाद, जब उसने अपना घुटना मोड़ा, तो मैंने देखा कि उसने नीचे साटिन की कच्छी पहन रखी थी। शायद उसे इसका अहसास नहीं था, या फिर वह जानबूझकर मुझे दिखा रहा था। काफी देर बैठे रहने से उसका तौलिया ढीला हो गया, और जब वह प्लेट रखने उठा, तो वह नीचे गिर गया। अब वह सिर्फ़ एक छोटी सी टाइट पिंक कलर की साटिन कच्छी में था, जिसमें से उसका लिंग स्पष्ट उभर रहा था।

उसने अपने लिंग को सहलाते हुए मुस्कुराकर पूछा कि वह कैसा लग रहा है। मैंने कहा कि बहुत सेक्सी। उसने खुश होकर मेरे होंठ चूम लिए, और मेरे शरीर में फिर से वही गुदगुदी महसूस हुई। थोड़ी देर बाद वह नहाने जाने लगा, तो उसने अपनी कच्छी की डोरी मुझसे खोलने को कहा। मैं थोड़ा झिझका, लेकिन मैंने खोल दी। उसका साफ़-सुथरा और तना हुआ लिंग हवा में लहराने लगा। वह कच्छी मेरे हाथ में छोड़कर नंगा ही नहाने चला गया। मैंने उसकी कच्छी को सूँघा, और उसमें से आ रही उसके शरीर की ख़ुशबू से मैं मदहोश होने लगा। फिर मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसकी साटिन की कच्छी पहन ली।

वह नहाकर नंगा ही बाहर आया और मेरे सामने ही अपने शरीर को तौलिए से पौंछने लगा। उसका नंगा शरीर बहुत ख़ूबसूरत लग रहा था—चिकनी त्वचा, मोटे स्तन, और एक आकर्षक लिंग। उसने मुझे साटिन की कच्छी में देखकर कहा कि मैं भी बहुत सेक्सी लग रहा हूँ। उसने बताया कि उसे नंगा सोना पसंद है, और आज भी वह ऐसा ही करना चाहता है। मैंने सहमति दी, क्योंकि मुझे भी उसे नंगा देखने में मज़ा आ रहा था। उसने अल्मारी से साटिन की महरून रंग की चादर निकाली और पलंग पर बिछा दी। फिर तकिए पर साटिन के कवर चढ़ाए और सफ़ेद रंग की साटिन चादर ओढ़ने के लिए रख दी।

वह बिस्तर पर लेट गया और अपने लिंग को चादर से ढक लिया। उसने मुझसे भी कपड़े उतारकर बिस्तर में आने को कहा। मैं चड्डी पहने ही बिस्तर पर जाने लगा, लेकिन उसने ज़ोर देकर कहा कि मैं उसे उतार दूँ। मैं साटिन की कच्छी उतारना नहीं चाहता था, लेकिन उसकी ज़िद के आगे मैं भी नंगा होकर बिस्तर में आ गया। साटिन के बिस्तर में लेटना एक अद्भुत अनुभव था, हालाँकि पलंग कम चौड़ा था और तकिया सिर्फ़ एक ही था। हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब लेटे हुए थे, और जब हम आमने-सामने होकर बात कर रहे थे, तो मैं उसकी साँसों को अपने चेहरे पर महसूस कर रहा था।

मैं उससे बिल्कुल खुल गया और बेशर्मी से सवाल पूछने लगा। मैंने पूछा कि उसके स्तन इतने बड़े कैसे हैं। उसने बताया कि उसे अपने स्तनों को मसलने में मज़ा आता है, और पिछले दस सालों में उसने उन्हें मसल-मसलकर इतना बड़ा कर लिया है। फिर मैंने पूछा कि मेरे लिंग के आसपास बहुत बाल हैं, लेकिन उसका लिंग एकदम साफ़ क्यों है। उसने कहा कि वह हर हफ़्ते अपने जननांगों के बाल साफ़ करता है। उसने आगे कहा कि वह मेरे बाल भी साफ़ कर सकता है, और मैं यही चाहता था। उसने मुझसे पलंग से उतरने को कहा और अपने शेविंग बॉक्स से एक छोटी कैंची निकाली। वह पलंग के किनारे पर बैठ गया और मेरे जननांगों के बाल काटने लगा। उसके हाथ के स्पर्श से मेरा लिंग उत्तेजित होने लगा।

उसने कहा कि यह अच्छा है, क्योंकि इससे लिंग की शाफ़्ट के बाल भी आसानी से साफ़ हो जाएँगे। वह एक मग में पानी लाया और शेविंग क्रीम लगाकर झाग बनाने लगा। फिर उसने रेज़र से मेरे जननांगों के बाल साफ़ करने शुरू किए। जब वह मेरे लिंग को पकड़कर सफाई कर रहा था, तो लिंग के मुँह से शीरा टपकने लगा। जब सारे बाल साफ़ हो गए, तो उसने एक तौलिया गीला करके साबुन साफ़ किया और फिर कोल्ड क्रीम लगाकर मेरे लिंग की मालिश की। उसके बाद उसने मुझसे घूमने को कहा, ताकि वह मेरे पीछे के बाल भी साफ़ कर सके। मैं कुर्सी पर हाथ टेककर झुक गया, और उसने मेरे नितंबों के आसपास के बाल साफ़ करके कोल्ड क्रीम लगाई। शीशे में देखने पर मेरा लिंग बहुत ख़ूबसूरत लग रहा था।

रात के ग्यारह बज चुके थे। उसने कहा कि अब सो जाना चाहिए। उसने कमरे की लाइट बंद कर दी, और हम दोनों बिस्तर में लेट गए। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने करवट बदली, तो मेरी जाँघ उसकी जाँघ पर आ गई और मेरा हाथ उसके स्तन पर चला गया। मैंने उसके स्तन से हाथ नहीं हटाया। फिर मैं धीरे से उसके स्तन को सहलाने लगा, तो वह कड़क हो गया। मुझे यकीन था कि वह भी जाग रहा है, लेकिन कमरे में अंधेरा था, इसलिए ज्यादा कुछ समझ नहीं आ रहा था। तभी उसने मेरा हाथ अपने स्तन से हटाकर अपने लिंग पर रखव

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