मेरी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जब मुझे अपने ही परिवार के एक सदस्य के प्रति भावनाएँ उमड़ने लगीं। वह लड़का मेरी ही उम्र का था और हमारा रिश्ता फूफा का बनता था, पर उम्र की समानता ने हमें दोस्त बना दिया था। धीरे-धीरे मैंने महसूस किया कि मेरी नज़रें उसकी ओर बार-बार जाती हैं, उसकी मुस्कान मेरे दिल को छू जाती है। एक दिन जब हम अकेले में बातें कर रहे थे, तो मैंने धीरे से उसकी ओर देखा और पाया कि उसकी आँखों में भी वही चमक है जो मेरे अंदर जल रही थी। हम दोनों ने एक-दूसरे की ओर बढ़ते हुए हाथ बढ़ाए, और उस पल ने हमारे रिश्ते को एक नई दिशा दे दी।
उस शाम कमरे की हवा में एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें हमारी साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। सुन्दर ने पहले कदम बढ़ाया और अपनी उंगलियों से मेरे गाल को छुआ। उसकी स्पर्श में एक कोमलता थी जो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ा रही थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके होंठों को अपने होंठों से ढूंढ़ने लगा। जब हमारे होंठ मिले, तो लगा जैसे समय थम सा गया हो। उसकी जीभ ने मेरे मुँह का रास्ता खोजा और हम एक गहरे चुंबन में खो गए। उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे, और मेरे हाथ उसके बालों में उलझ गए।
धीरे-धीरे हमारे चुंबन ने एक जुनून का रूप ले लिया। सुन्दर ने मेरी शर्ट के बटन खोले और उसके हाथ मेरी छाती पर फिरने लगे। मैंने भी उसकी कमीज़ उतार दी और उसके चिकने शरीर को महसूस किया। उसकी त्वचा पर हल्की खुशबू थी जो मेरे मन को मदहोश कर रही थी। फिर वह नीचे झुका और मेरे निप्पलों को अपने होंठों से छूने लगा। हर स्पर्श से मेरे शरीर में एक कंपन सी दौड़ जाती थी। मैं कराह उठा और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा लीं।
अगले पल सुन्दर ने मेरी पैंट खोली और मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी आँखों में एक चमक थी जो मेरे अंदर की इच्छाओं को पढ़ रही थी। वह धीरे से मेरे नीचे झुका और मेरे अंदरूनी हिस्सों को अपनी जीभ से छूने लगा। पहली बार महसूस हो रही उस गर्म स्पर्श ने मेरे शरीर को झकझोर दिया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस आनंद में खो गया जो वह दे रहा था। हर चाटने के साथ मेरी साँसें तेज़ होती जा रही थीं, और मैं उस पल को महसूस कर रहा था जैसे कोई सपना सच हो रहा हो।
जब मैंने अपनी इच्छा जताई कि मैं भी उसे वैसा ही आनंद देना चाहता हूँ, तो सुन्दर ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। वह बिस्तर पर लेट गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया। पहले मैंने उसके होंठों को चूसा, फिर धीरे-धीरे उसकी छाती की ओर बढ़ा। उसके निप्पलों को अपने मुँह में लेते हुए मैंने उसे चूसना शुरू किया। सुन्दर की आहें कमरे में गूंजने लगीं, और उसकी आवाज़ ने मेरे अंदर एक नया जोश भर दिया। मैं नीचे की ओर बढ़ा और उसके शरीर के गुप्त हिस्सों को अपने होंठों से छूने लगा।
दस मिनट तक मैं उसके शरीर को अपने मुँह से सहलाता रहा, और हर पल सुन्दर की प्रतिक्रिया मुझे और उत्तेजित करती जा रही थी। फिर उसने इशारा किया कि वह आगे बढ़ना चाहता है। मैं फिर से बिस्तर पर लेट गया, और सुन्दर ने अलमारी से एक ट्यूब निकाली। उसने बताया कि यह क्रीम हमें आराम देगी, और मैंने उसके हाथ से वह ट्यूब ले ली। मैंने क्रीम निकाली और उसके शरीर पर लगाना शुरू किया, जबकि सुन्दर ने भी वैसा ही किया। उसकी उंगलियों का स्पर्श मेरे शरीर पर बिजली सी दौड़ा रहा था।
धीरे-धीरे सुन्दर ने मेरे साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया। जब मैंने पूछा कि क्या उसने पहले कभी ऐसा किया है, तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि यह उसकी भी पहली बार है। क्रीम के कारण दर्द कम था, और आनंद धीरे-धीरे बढ़ रहा था। मैंने मज़ाक में कहा कि कहीं वह मेरा बुरा हाल न कर दे, तो सुन्दर ने कहा कि मज़ा तो मैं ही ले रहा हूँ। उसकी हर हरकत में कोमलता थी, और वह बार-बार रुककर मुझे चूमता रहा।
पंद्रह मिनट बाद सुन्दर की गति तेज़ हो गई, और मैं उस आनंद में खो गया जो मैं महसूस कर रहा था। जब वह रुका, तो हम दोनों थोड़ी देर के लिए चुप हो गए। सुन्दर मेरे ऊपर लेटा रहा, और उसकी साँसें मेरे कानों से टकरा रही थीं। फिर उसने मुझे चूमना शुरू किया, और हर चुंबन में एक नया प्यार था। कभी वह मेरे निप्पलों को चूसता, तो कभी मेरे कानों के पास फुसफुसाता। थोड़ी देर बाद उसने फिर से गति शुरू की, और इस बार का अनुभव और भी गहरा था।
जब हम दोनों थक गए, तो सुन्दर ने अपना स्थान बदला और मैं उसके ऊपर बैठ गया। इस नई स्थिति में मैंने खुद को नियंत्रित करते हुए गति बनाई। दस मिनट बाद सुन्दर फिर से रुका, और मैंने उसे साफ़ करने का प्रयास किया। हम दोनों ने एक-दूसरे के शरीर को चाटकर साफ़ किया, और फिर शांति से लेट गए। मैंने कहा कि मेरी भी बारी है, तो सुन्दर ने मुस्कुराते हुए सहमति दी। वह मेरे ऊपर आया और मेरे शरीर को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ा।
उसके मुँह का स्पर्श मेरे शरीर के लिए एक नया अनुभव था। जब मैंने महसूस किया कि मैं रुक नहीं पाऊँगा, तो मैंने जोरदार झटके दिए। सुन्दर ने मेरे शरीर के तरल पदार्थ को निगल लिया और फिर चाटकर साफ़ किया। रात के एक बज चुके थे, और हम दोनों पूरी तरह से संतुष्ट होकर एक-दूसरे से लिपट गए। हमारी साँसें धीरे-धीरे एक हो रही थीं, और हम गहरी नींद में सो गए। सुबह जब मेरी आँख खुली, तो मैंने देखा कि सुन्दर अभी भी सो रहा है। मैंने धीरे से उठकर उसे जगाया, और हमने फिर से प्यार भरी गतिविधियाँ शुरू कीं।
दिन भर हम साथ रहे, और शाम को सिनेमा हॉल में हमने एक फिल्म देखने का फैसला किया। हॉल में हम अकेले थे, और मैंने सुन्दर के शरीर को छूते हुए समय बिताया। उसकी प्रतिक्रियाएँ मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। इंटरवल के बाद जब हॉल खाली हो गया, तो हमने वहीं एक-दूसरे को संतुष्ट किया। सुन्दर ने मेरे मुँह में अपना तरल पदार्थ छोड़ा, और मैंने उसे पी लिया। फिर मेरी बारी आई, और सुन्दर ने मुझे वैसा ही आनंद दिया।
घर लौटने के बाद हमने फिर से प्यार किया, और इस बार मैंने सक्रिय भूमिका निभाई। सुन्दर की आँखों में खुशी थी जब मैंने उसे संतुष्ट किया। हमने एक-दूसरे के शरीर के तरल पदार्थ को चाटकर साफ़ किया, और फिर गले लगकर सो गए। सुबह मैं घर लौट आया, पर हमारा रिश्ता अब और गहरा हो चुका था। हर शनिवार को हम मिलते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं। यह कहानी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रिश्ते की भी है, जहाँ दो लोगों ने अपनी इच्छाओं को स्वीकार किया और एक-दूसरे को प्यार दिया।