संजीव, जो इंदौर का मूल निवासी था, अपनी इंटरमीडिएट की शिक्षा वहीं से पूरी करके उच्च अध्ययन के लिए दिल्ली चला गया। दिल्ली में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसने एक कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया और साथ ही अपना एक कोचिंग संस्थान भी चलाया। इससे उसकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो गई और उसने दिल्ली में एक फ्लैट भी खरीद लिया। अब उसकी शादी की उम्र हो चली थी, लेकिन उसे कोई मनपसंद लड़की नहीं मिल रही थी। कॉलेज के दिनों में एक लड़की उसे पसंद थी, पर उसके माता-पिता शादी के लिए तैयार नहीं हुए थे।
संजीव ने लड़की खोजने की जिम्मेदारी अपने माता-पिता को सौंप दी। उन्होंने कुछ लड़कियाँ देखीं, पर संजीव को कोई पसंद नहीं आई। फिर एक दिन, माता-पिता ने एक लड़की की तस्वीर भेजी। वह लड़की बेहद सुंदर थी, जिसे देखते ही संजीव शादी के लिए तैयार हो गया। दोनों परिवारों के बीच बात आगे बढ़ी और जल्द ही शादी तय हो गई। शुभ दिन पर, संजीव अपनी बारात लेकर लड़की के घर पहुँचा। सब कुछ बड़े हर्षोल्लास के साथ चल रहा था।
जयमाला के समय, संजीव और उसकी होने वाली पत्नी स्टेज पर पहुँचे। तभी, स्टेज के नीचे अचानक हंगामा शुरू हो गया, जिससे सभी बाराती और संजीव दोनों हैरान रह गए। पता चला कि एक लड़का चिल्ला रहा था, जो खुद को दुल्हन का प्रेमी बता रहा था। वह यह दावा कर रहा था कि वह लड़की से बेपनाह मोहब्बत करता है और वह उसे छोड़कर किसी और से शादी कैसे कर सकती है? संजीव ने अपनी दुल्हन की ओर देखा, जिसने साफ़ इनकार करते हुए कहा, “मैं इस लड़के को नहीं जानती, यह कौन है?”
कुछ लोगों ने दबी ज़ुबान में कहा कि लड़का इसी मोहल्ले का है और हो सकता है दोनों में प्रेम संबंध हो। अब संजीव के लिए यह स्थिति बहुत असहज हो गई थी – वह इस रिश्ते को न तो छोड़ पा रहा था और न ही आगे बढ़ा पा रहा था। लड़की उसे पसंद थी, पर यह अप्रत्याशित घटना उसे विचलित कर रही थी। बारात आ चुकी थी और अब पीछे हटना मुश्किल था। संजीव ने अपने पिता की ओर देखा। पिता ने गंभीरता से कहा कि अब बारात वापस ले जाना उचित नहीं होगा, शादी कर लेनी चाहिए।
अपने पिता की बात मानकर संजीव ने शादी कर ली। शादी को कई साल हो गए हैं और अब सब कुछ सामान्य है। लेकिन आज भी, जब संजीव को अपनी शादी का वह दिन याद आता है, तो उस लड़के का चेहरा उसकी आँखों के सामने आ जाता है। हालांकि, उसकी पत्नी ने कभी उस लड़के या उस घटना के बारे में कोई बात नहीं की। यह बात संजीव के दिल को तसल्ली देती है कि शायद वह प्यार एकतरफा था, या उस लड़के ने ही सिर्फ़ रिश्ता रखने की कोशिश की होगी, उसकी पत्नी की तरफ से ऐसा कुछ नहीं था।