मेरी कहानी की शुरुआत उस दिन से होती है जब मैंने हरियाणा की एक लड़की को ऑनलाइन संपर्क किया। वह मुस्कान नाम की एक सुंदर युवती थी, जिससे मेरी मुलाकात इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई। शुरुआती दिनों में वह बहुत संकोची और दूरी बनाए रखने वाली थी, मेरे संदेशों का जवाब देने में घंटों लगा देती थी। उसकी इस उदासीनता ने मेरे अंदर एक जिद पैदा कर दी – मैंने ठान लिया था कि इस लड़की को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर रहूंगा। मेरा नाम अंकित है और मैं बिहार का रहने वाला हूँ, हालांकि उस समय बनारस में ग्रेजुएशन कर रहा था। तेईस साल की उम्र तक मैंने कई रिश्तों का अनुभव कर चुका था, लेकिन मुस्कान में कुछ अलग था जो मुझे लगातार उसकी ओर खींच रहा था।
लगभग एक साल तक हमारी बातचीत चलती रही, जिसमें मैंने बार-बार मिलने का आग्रह किया। वह हर बार मना कर देती थी, जैसे किसी अदृश्य डर से घिरी हुई हो। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा कंपन था जब भी मैं मिलने की बात करता था। आखिरकार, मेरी लगातार कोशिशों के बाद वह मिलने के लिए तैयार हुई, लेकिन उसने शर्त रखी कि हम किसी सार्वजनिक पार्क में मिलेंगे। उस समय मैं अपने गाँव बिहार में था, लेकिन उसकी हाँ सुनते ही मैंने तुरंत दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ ली। रास्ते भर मैं उसके बारे में सोचता रहा – उसके चेहरे की कल्पना करता रहा, उसकी आवाज़ के स्वरों को याद करता रहा।
जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मेरी सांसें थम सी गईं। काले सूट और लैगिंग्स में वह इतनी मनमोहक लग रही थी कि मेरी आँखें उससे हट ही नहीं पा रही थीं। उसके शरीर के मापन ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया था। मैंने उसे चॉकलेट और एक चाँदी की अंगूठी भेंट की, जिसे उसने शर्माते हुए स्वीकार किया। हम लगभग बीस मिनट तक बातें करते रहे, जिस दौरान मैंने उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक देखी। वह बातचीत के दौरान बार-बार अपने बाल सहलाती रही, जैसे किसी आंतरिक घबराहट को छिपाने की कोशिश कर रही हो।
उस मुलाकात के बाद हमारे संबंधों में एक नया मोड़ आया। वह धीरे-धीरे खुलने लगी थी और फोन पर हमारी बातचीत अधिक व्यक्तिगत होती चली गई। वीडियो कॉल्स पर वह अपने आप को मुझसे साझा करने लगी, जिससे हमारे बीच एक अदृश्य बंधन मजबूत होता चला गया। दो साल तक हम इसी तरह दूरी के संबंध में रहे, जहाँ डिजिटल संपर्क हमारी भावनाओं का माध्यम बना रहा। हर वीडियो कॉल के बाद मैं उसके बारे में और अधिक सोचने लगता था, उसकी यादें मेरे मन में बसती चली गईं।
फिर वह दिन आया जब मैंने फिर से मिलने का प्रस्ताव रखा। इस बार वह तुरंत मान गई, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि शारीरिक संबंधों की सीमा नहीं लाँघी जाएगी। मैंने बाहरी तौर पर उसकी शर्त मान ली, लेकिन मन ही मन एक योजना बनाने लगा। मैंने उसके घर के पास ही एक कमरा किराए पर ले लिया और उसके आने का इंतज़ार करने लगा। कमरे को मैंने सजाया-संवारा, मोमबत्तियाँ लगाईं और एक आरामदायक माहौल बनाने की कोशिश की।
जिस दिन वह आई, उसने काले रंग की टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी। उसकी मुस्कान में एक नई चमक थी, जैसे वह भी इस मुलाकात का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। जैसे ही मैंने उसे गले लगाया, हम दोनों के बीच एक विद्युत प्रवाह सा दौड़ गया। उसके शरीर की गर्माहट ने मेरे अंदर एक तूफान खड़ा कर दिया। हमारी सांसें तेज हो गईं और कमरे का वातावरण अचानक गर्म हो उठा।
धीरे-धीरे हमारी नजदीकियाँ बढ़ती चली गईं। मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया, जो शहद जैसे मीठे और नर्म थे। उसकी गर्दन पर मैंने कोमल चुंबन लगाए, जिससे वह गुदगुदा कर हँस पड़ी। जब मैंने उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाला तो उसने पल भर के लिए विरोध किया, लेकिन फिर आत्मसमर्पण कर दिया। उसके स्तनों को छूते हुए मैंने महसूस किया कि उसका शरीर काँप रहा है, जैसे पहली बार किसी के स्पर्श का अनुभव कर रही हो।
बिस्तर पर लेटते ही उसकी आँखों में एक अजीब सी लालिमा आ गई। वह मेरे स्पर्श के प्रति उत्तरोत्तर प्रतिक्रिया दे रही थी, हालाँकि बीच-बीच में संकोच भी दिखा रही थी। जब मैंने उसकी जींस उतारने की कोशिश की तो उसने फिर से आपत्ति जताई, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में पहले जैसा दृढ़ संकल्प नहीं था। मैंने धैर्य से काम लिया और उसे आश्वस्त करते रहा कि सब कुछ उसकी सहमति से ही होगा।
अंततः जब उसने अपने कपड़े उतारने की अनुमति दी तो मैंने उसके शरीर को पहली बार पूरी तरह देखा। उसकी त्वचा चाँदी जैसी चमकदार थी और शरीर के वक्र एक कलाकार की कल्पना जैसे लग रहे थे। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो वह मधुर कराहने लगी। उसकी ये आवाज़ें मेरे लिए संगीत से कम नहीं थीं, जो मेरे उत्साह को और बढ़ा रही थीं।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, वह और अधिक आरामदायक महसूस करने लगी। उसने मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फँसाईं और मुझे अपने और करीब खींच लिया। जब मैंने उसकी योनि को छुआ तो वह गीली हो चुकी थी, जो उसके उत्तेजित होने का संकेत था। उसने मेरे हाथ को पकड़ कर हटाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पकड़ में कोई दृढ़ता नहीं थी।
अंतिम क्षणों में जब मैंने उसके शरीर के ऊपर अपना भार डाला तो उसकी आँखों में एक पल के लिए डर दिखाई दिया। मैंने उसे चूम कर शांत करने की कोशिश की और धीरे से उसके शरीर में प्रवेश किया। पहले झटके के साथ ही उसके चेहरे पर दर्द की एक लहर दौड़ गई, लेकिन मैंने उसे गले लगा कर रोके रखा। धीरे-धीरे उसका दर्द कम होता गया और उसके चेहरे पर एक नई भावना उभरने लगी।
बीस मिनट तक चले इस शारीरिक मिलन के दौरान हम दोनों एक दूसरे में लीन हो गए। कमरे में केवल हमारी सांसों की आवाज़ और शरीरों के टकराने की मधुर ध्वनि गूँज रही थी। जब सब कुछ समाप्त हुआ तो वह मेरी बाँहों में सिमट कर लेटी रही, जैसे कोई थकी हुई चिड़िया अपने घोंसले में विश्राम कर रही हो। मैंने उसे पेन किलर दी और कैब बुला कर उसके घर तक छोड़ने गया। रास्ते भर वह चुपचाप मेरे कंधे पर सिर रखे बैठी रही, जैसे कोई गहरी सोच में डूबी हुई हो।
उस रात के बाद से हमारे संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हुआ। वह अब पहले से कहीं अधिक खुली हुई थी और हमारी मुलाकातें नियमित होती चली गईं। इस अनुभव ने न केवल हमारे शारीरिक संबंधों को मजबूत किया बल्कि भावनात्मक रूप से भी हम एक दूसरे के और करीब आ गए। आज जब मैं उस रात को याद करता हूँ तो लगता है कि कभी-कभी जीवन के सबसे सुंदर पल वही होते हैं जो अनपेक्षित रूप से घटित होते हैं।