दिल्ली के एक दफ्तर में मेरी नौकरी थी, जहाँ तीन लड़कियाँ काम करती थीं। उनमें से एक का नाम पूजा था, जो एक शादीशुदा महिला थी। पूजा गोरी-चिट्टी थी, उसका बदन भरा-पूरा था और उसकी मुस्कान में एक अजीब सी मादकता थी। शुरुआत में मेरे मन में उसके लिए कोई गलत भावना नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे मैंने महसूस किया कि वह मुझे चोरी-छिपे घूरती रहती है। जब भी हमारी नज़रें मिलतीं, वह तुरंत अपनी नज़रें हटा लेती, मानो कोई रहस्य छुपा रही हो। मैं भी उसके इस व्यवहार को नज़रअंदाज़ कर देता, लेकिन उसकी आँखों में छुपी चमक मेरे दिल को बेचैन कर देती।
एक महीने बाद की बात है, एक दिन मैं ऑफिस जल्दी पहुँच गया। उस दिन मुझे तेज सिरदर्द हो रहा था, इसलिए मैंने अपना सिर मेज़ पर टिकाकर आराम करने की कोशिश की। कुछ ही देर बाद एक मीठी सी आवाज़ ने मेरा ध्यान खींचा। मैंने सिर उठाया तो सामने पूजा खड़ी थी। वह पीले रंग के सूट में थी, जो उसके रंग को और भी निखार रहा था। उसकी आँखों में चमक थी और होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान। मैंने हाय कहा तो वह तुरंत बोली, “क्या हुआ? ऐसे क्यों बैठे हो?” मैंने जवाब दिया, “कुछ नहीं, बस सिर में दर्द हो रहा है।” पूजा ने मीठी आवाज़ में कहा, “लाओ, सिर दबा दूँ?” मैंने मना किया, लेकिन उसने बिना किसी हिचकिचाहट के मेरा माथा दबाना शुरू कर दिया।
उसके हाथों के स्पर्श से मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। मैं चौंककर बोला, “अरे, आप रहने दीजिए, कोई देख लेगा तो गलत समझेगा!” पूजा ने शरारती भाव से मुस्कुराते हुए कहा, “क्या गलत समझेगा?” मैं शर्म से चुप हो गया। उसने फिर से आँख मारते हुए कहा, “कहीं लोग हमें कपल तो नहीं समझ लेंगे?” यह सुनते ही मेरी आँखें चौड़ी हो गईं। मैं मुस्कुरा दिया, और वह भी मुस्कुरा दी। उसने मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरा और एक हल्की सी चिकोटी काटकर अपनी सीट पर चली गई। उसी पल से मेरे मन के विचार बदल गए। अब मैं उसे एक अलग नज़र से देखने लगा था।
उस दिन के बाद, हम दोनों एक-दूसरे को चोरी-छिपे देखने लगे। ऑफिस में सबकी नज़रें बचाकर हम आँखों से बातें करते और मुस्कुरा देते। धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी। हमने एक-दूसरे के नंबर एक्सचेंज किए और चैटिंग शुरू हो गई। शुरुआत में सामान्य बातें होतीं, लेकिन जल्द ही बातें सेक्स तक पहुँच गईं। हम न्यूड वीडियो कॉल्स करने लगे, जिससे हमारी वासना और बढ़ती गई। आग दोनों तरफ लग चुकी थी, बस मिलन का इंतज़ार था। एक दिन सुबह उसका कॉल आया, और उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्सुकता थी।
पूजा ने फोन पर कहा, “सुनो, आज मेरी पूरी फैमिली किसी की रिटायरमेंट पार्टी में जा रही है। वे सब कल दोपहर तक लौटेंगे। तुम शाम को घर आ जाना!” मैंने तुरंत हाँ कह दिया, और मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं। जो बात हम काफी समय से चाह रहे थे, वह अब सच होने वाली थी। मुझे अब सिर्फ शाम का इंतज़ार था। शाम को तीन बजे मैंने खुद को तैयार करना शुरू किया। शेविंग की, नहाया, अच्छा इत्र लगाया और छह बजे तक पूरी तरह तैयार होकर पूजा के घर के लिए निकल पड़ा। घर से निकलते ही उसका कॉल आ गया, और उसकी आवाज़ में एक मीठी सी इच्छा थी।
रास्ते में मैंने एक पैकेट कंडोम खरीदा और पूजा के घर पहुँच गया। कंपाउंड गेट खुला था, और मैंने मेन गेट पर लगी कॉलबेल बजाई। जैसे ही मैंने बेल बजाई, दरवाज़ा धीरे से खुला और सामने पूजा खड़ी थी। वह पिंक नाइटी में थी, जो उसके बदन के कर्व्स को और भी आकर्षक बना रही थी। हमारी नज़रें मिलीं, और मेरी आँखें खुद-ब-खुद उसके भरे हुए स्तनों पर अटक गईं। वह शर्माती हुई मुस्कुराई और मुझे अंदर खींचकर दरवाज़ा लॉक कर दिया। उसने मीठी आवाज़ में कहा, “उधर से ही खा लोगे क्या?” मैंने उसे पीछे से पकड़कर दरवाज़े से सटा दिया और उसकी चिकनी कमर पर हाथ फेरते हुए कसकर चिपक गया।
मैंने कहा, “जिधर से कहोगी जान, उधर से खा लूँगा!” वह हँस दी और बोली, “सारा बदन जल रहा है, कहीं से भी शुरू हो जाओ मेरी जान!” अब मैं उसके गाल चूमते हुए गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा। पूजा के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं, और उसकी आवाज़ में एक मादकता थी। मेरे हाथ उसके स्तनों को सहलाने लगे, और जब मैंने निप्पल को जोर से मसला, तो वह और ज़ोर से सिसक उठी। उसने कहा, “इन्हें सिर्फ मसलोगे ही या चूसोगे भी?” मैंने झट से उसके एक निप्पल को अपने होंठों में दबाकर खींचा, और वह मीठी सिसकारी भरते हुए मेरे मुँह में अपना स्तन और गहरा धकेलने लगी।
काफी देर तक उसके दोनों स्तन चूसने और रगड़ने के बाद, वह बोली, “अब आगे बढ़ने का भी इरादा है या दूध पीकर ही खेल खत्म कर लोगे?” मेरा लिंग पैंट में पूरी तरह तन चुका था। मैंने उसे पूजा की गांड पर लगाकर रगड़ना शुरू किया। फिर मैंने उसका चेहरा पकड़ा और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा। वह भी पूरे जोश के साथ मेरा साथ दे रही थी। अचानक उसने मुझे दूर किया, मेरा हाथ पकड़ा और बेडरूम में ले गई। वह बोली, “जान, तुम बैठो, मैं कोल्ड ड्रिंक लाती हूँ।” यह कहकर वह अंदर चली गई।
थोड़ी देर में वह एक गिलास में कोल्ड ड्रिंक लेकर आई। मैंने पहले उसे पिलाई, फिर खुद पी। मेरा यह अंदाज़ उसे इतना पसंद आया कि वह प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगी। अब हम दोनों कोल्ड ड्रिंक को मुँह में भरते और पहले एक-दूसरे को पिलाते, फिर बाकी की खुद पीते। इससे हमारी वासना और बढ़ने लगी। कोल्ड ड्रिंक खत्म हो जाने के बाद, मैंने दोनों बाँहें फैलाकर उसे अपने सीने से लगा लिया। फिर मैंने हाथ उसकी पीठ पर फिराते हुए उसके गोल-मटोल नितंबों तक ले जाकर उन्हें मसलना शुरू किया। पूजा मदहोशी में उछलने लगी, और उसके मुँह से मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं।
होंठों पर लंबा चुंबन लेते हुए मैंने उसकी नाइटी उतार फेंकी। अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसने भी मेरी शर्ट और बनियान उतार दी। मैंने उसके स्तनों को ऊपर से दबाना शुरू किया, तो उसके मुँह से फिर वही मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसे दीवार से सटाकर उसकी लाल ब्रा खोल दी। उसके गोरे-गोरे स्तन आज़ाद होकर उछल पड़े। मैंने एक को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा। पूजा की उत्तेजना आसमान छूने लगी, और वह मस्त होने लगी। मैंने मुँह से ही उसकी पैंटी पकड़ी और खींचकर उतार दी। उसकी योनि एकदम साफ-सुथरी और गीली थी।
नीचे बैठकर मैंने उसकी एक टाँग कंधे पर रखी, तो योनि की फाँकें पूरी खुल गईं। गीली और नमकीन योनि पर चुंबन किया, तो पूजा का शरीर सहम गया, मानो उसे करंट लग गया हो। मैंने उँगलियों से योनि का मुँह खोला और जीभ से चाटना शुरू किया। पहले से ही उत्तेजित पूजा की योनि ने फटाक से पानी छोड़ना शुरू कर दिया। वह तड़पकर सिसकने लगी और जल्द ही झड़ गई। झड़ते ही वह थोड़ी ठंडी पड़कर लस्त हो गई। अब मैं उठा और उसे नीचे बिठाया। मैंने पैंट खोलने को कहा, तो उसने पैंट के साथ अंदर का कपड़ा भी उतार दिया। मेरा फनफनाता लिंग उसके सामने आ गया।
मैंने उसका सिर पकड़कर लिंग की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन वह मुँह में लेना नहीं चाहती थी। उसने कहा, “मुझसे नहीं होगा।” मैंने समझाया, लेकिन वह सिर्फ चुंबन लेने को राजी हुई। मैंने ज़बरदस्ती नहीं की। उसने अपने हाथों में लिंग लेकर चूमना शुरू किया। उसने टोपा छोड़कर पूरे लिंग को प्यार से चूमा। उसके होंठों के स्पर्श से मेरे मुँह से आह निकल गई। फिर मैंने उसे उठाकर बेड पर लिटाया, दोनों टाँगें चौड़ी खोलीं और उसके ऊपर लेट गया। होंठ चूसते हुए मैंने अपना कड़क लिंग उसके हाथ में थमा दिया। वह मेरे लिंग को अपनी योनि की फाँकों पर रगड़ने लगी और फिर से सिसकारियाँ लेने लगी।
मैं उसके स्तन चूसने लगा और एक हल्का झटका मारा, तो लिंग का टोपा योनि में घुस गया। घर्षण से प