रात भर का उन्माद: एक भतीजी और उसकी सहेली के साथ अंतहीन यौन मजा

अवनी की कुंवारी चूत और गांड को अपने बड़े लंड से खोलने के बाद, मैं थोड़ा थक गया था। उसका शरीर अब भी काँप रहा था, और उसकी आँखों में एक तरह की सुन्नता थी जो पहली बार के आघात के बाद आती है। कमरे में हवा भारी थी, सेक्स और पसीने की गंध से लबालब। अभी पूरी रात बाकी थी, और मेरे अंदर का जानवर अभी शांत नहीं हुआ था। मेरी नजर अपनी भतीजी श्रेया पर पड़ी, जो अवनी के पास बैठी उसे सहलाते हुए मुझे एक चुनौती भरी मुस्कान से देख रही थी। उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो कह रही थी कि वह अगली है। मैंने एक गहरी साँस ली और तय किया कि आज की रात लंबी और अविस्मरणीय होने वाली है।

श्रेया अवनी के पास बैठी उसकी पीठ सहला रही थी, जबकि अवनी उसकी गोद में सिर रखे आँखें मूंदे पड़ी थी। मेरे कपड़े पहनकर आते देख श्रेया की आँखें चमक उठीं। उसने एक शरारती स्वर में कहा, “चाचू, क्या बात है? लगता है अवनी ने आपके अंडकोषों का सारा रस निचोड़ लिया, इसलिए आपने कपड़े पहन लिए!” उसकी आवाज़ में मजाक और ईर्ष्या का मिश्रण था। मैंने बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए उसे एक नर्म तौलिया दिया। “ले, इसे अच्छी तरह साफ कर दे,” मैंने कहा। श्रेया ने तौलिया लेकर अवनी के जननांगों और नितंबों को कोमलता से पोंछना शुरू किया। अवनी की त्वचा लाल हो चुकी थी, और उसके होठों पर एक हल्की सी पीड़ा की रेखा थी।

मैंने श्रेया से कहा, “इसे अब आराम करने दे, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी।” श्रेया ने अवनी पर एक हल्की चादर ओढ़ा दी और उसके माथे पर एक प्यार भरा चुंबन दिया। मैं चुपचाप हॉल में आ गया और सोफे पर लेटकर टीवी चालू कर दिया। मेरा शरीर भी थकान से भरा हुआ था, पर मन अभी भी उत्तेजना से भरा था। कुछ ही देर बाद श्रेया हॉल में आई। उसने एक ढीला सा शॉर्ट्स और एक छोटा सा टॉप पहन रखा था जो उसके उभारों को बमुश्किल ढक पा रहा था। वह आकर मेरे पास बैठ गई और मेरे चेहरे के ऊपर झुकते हुए बोली, “पापा, लगता है आप बहुत थक गए हो!” उसकी साँसों की गर्माहट मेरे गालों को छू रही थी।

मैंने कहा, “श्रेया, ऐसी बात नहीं है।” श्रेया ने अपना हाथ मेरे सीने पर रखा और पूछा, “फिर क्या बात है? आप यहाँ आकर अकेले क्यों लेट गए?” मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने पास खींचा और कहा, “यार, अवनी बहुत टाइट थी। उसकी सील तोड़ने में बहुत जोर लगाना पड़ा, मेरा लंड भी अब थोड़ा दुखने लगा है।” श्रेया की आँखों में एक चिंगारी सी दौड़ गई। वह बोली, “ओह पापा! मेरे प्यारे डैडी का हथियार दुखने लगा है!” फिर उसने मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लिंग को टटोलना शुरू किया।

श्रेया ने कहा, “पापा, क्या मैं आपके इस शस्त्र की मालिश कर दूँ? अभी तो आपको पूरी रात मेहनत करनी है!” उसने मेरे होंठों पर एक कोमल चुंबन दिया और फुसफुसाया, “आज सारी रात मैं आपको जगाए रखूँगी!” मैंने उसे और पास खींचते हुए पूछा, “श्रेया, तुम मुझे पापा-पापा क्यों बोल रही हो?” श्रेया तपाक से बोली, “हम दोनों इस घर में बाप-बेटी की तरह रहेंगे। अगर हो सके तो आप मुझे बेटी ही बोलो, मुझे इसमें बहुत मजा आएगा!” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी लालसा और शरारत थी।

फिर श्रेया उठी और बोली, “पापा, रुको, मैं आपके लिए दूध बनाती हूँ। गरम दूध पीकर आपके लंड में फिर से जान आ जाएगी!” वह अपने नितंबों को मटकाते हुए किचन की ओर चली गई। कुछ मिनट बाद वह एक गिलास दूध लेकर आई और मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठाया। “लो पापा, दूध पी लो। इसमें केसर और बादाम डाला हुआ है!” मैं उठकर सोफे पर बैठ गया। श्रेया भी मेरी बगल में सटकर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़कर बोली, “पापा, मैंने आपको यहाँ अपने लिए बुलाया था, पर आपने तो उस अवनी की चूत और गांड में अपना सारा रस बहा दिया!”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी, थोड़ी देर सब्र करो। लंड थोड़े आराम के बाद फिर से तैयार हो जाएगा।” श्रेया खुश होकर बोली, “ओह, सच में पापा? फिर तो बहुत मजा आएगा!” मैं गिलास लेकर दूध पीने लगा। दूध गरम और सुगंधित था। श्रेया फिर बोली, “पापा, आपको मालूम है, अवनी बिलकुल कुंवारी थी। आपने तो उसकी हालत खराब कर दी। अब पता नहीं वह कब उठेगी!” मैंने कहा, “कोई बात नहीं, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी। जब उठेगी तो थोड़ी देर गरम पानी में बिठा देना, उसकी चूत और गांड सही हो जाएगी।”

श्रेया ने एक गहरी नजर से मेरी ओर देखा और पूछा, “पापा, एक बात बताओ। सच-सच बताना, आपको उसके साथ मजा आया?” मैंने कहा, “बेटी, मुझे कुंवारी लड़कियों की चूत और गांड की सील तोड़ने में बहुत मजा आता है। तुम्हें पता है, पहली चुदाई कोई लड़की नहीं भूलती। और जो लड़की एक बार मुझसे चुदवा ले, वह बाद में किसी और के नीचे सोएगी तो उसे मेरे लंड की याद जरूर आएगी!” श्रेया ने सोचते हुए कहा, “हम्म, यह बात तो सही है!” फिर उसने अचानक अपना टॉप उतारकर साइड में रख दिया और अपने स्तन मेरी ओर उभारते हुए बोली, “लो पापा, उस दूध के साथ अपनी बेटी का दूध भी पी लो। आपमें जल्दी जोश आ जाएगा!”

मैंने गिलास टेबल पर रखा और उसमें जमी मलाई अपनी उंगली से निकालकर श्रेया के एक निप्पल पर लगाई। फिर मैंने उस निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। श्रेया के कच्चे मांस के स्वाद के साथ मलाई बहुत स्वादिष्ट लग रही थी। मैंने उसके स्तन को चूसते हुए उस पर लगी मलाई चाट ली। श्रेया ने टेबल पर रखा दूध का गिलास उठाकर उसमें अपना दूसरा निप्पल डुबोया और मुझे चूसने के लिए दिया। मैं श्रेया के एक स्तन को मसलते हुए दूसरे को चूस रहा था। श्रेया मेरे बालों में हाथ फिराते हुए कराहने लगी, “उफ्फ पापा, बहुत मजा आ रहा है! चूसो, पीओ अपनी बेटी का दूध! उम्मम्म… आह… अपनी से दुगुनी उम्र के मर्द को अपना दूध पिलाकर कितना मजा आता है!”

श्रेया ने अपनी एक टाँग मेरी टाँगों पर चढ़ा दी और मचलते हुए मेरे लिंग को टटोलकर पकड़ लिया। मैं भी उसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसकी योनि को मसलने लगा। कुछ देर बाद श्रेया बोली, “चलो पापा, अब मैं आपको अपनी चूत का रस पिलाती हूँ!” वह फटाक से उठी और एक झटके में अपना शॉर्ट्स और अंडरवियर उतारकर सोफे पर लेट गई। उसने अपने पैर उठाकर अपनी योनि मेरे मुँह के पास कर दी। श्रेया की चिकनी योनि और गुदा का छेद मेरे सामने था। मैंने अपनी एक उंगली थूक से गीली की और श्रेया की योनि के होठों पर फिराने लगा।

श्रेया ने अपने मांसल नितंब और ऊपर उठाते हुए कहा, “आह… सी… सी… पापा! अब अवनी तो आपसे चुदवा नहीं सकेगी, आपको अपनी बेटी को पूरी रात चोदना है! आह… अच्छे से मेरी चूत का रस पी लो ताकि आपका लंड ढीला होने का नाम न ले!” मैं श्रेया की बेचैनी समझते हुए उसकी योनि में दो उंगलियाँ डालकर उसे चाटने लगा। श्रेया एक हाथ से मेरा सिर अपनी योनि पर दबाते हुए, अपने नितंब उछाल-उछाल कर मुझे चाटने के लिए प्रोत्साहित करने लगी। मैं सोफे के नीचे घुटने टेककर उसकी योनि चाट रहा था। कुछ देर बाद श्रेया सिसकियाँ लेते हुए बोली, “आप पापा… और जोर से! आह… बहुत मस्त चाटते हो आप! उम्मम्म… मम्मी… कितना मजा आ रहा है! आई ईईई… आह!”

मुझे लगा श्रेया स्खलन के करीब है, इसलिए मैंने एक हाथ से उसकी भगशेफ को रगड़ते हुए, दूसरे हाथ से उसकी योनि में बहुत तेजी से उंगलियाँ अंदर-बाहर करनी शुरू कर दीं। थोड़ी ही देर में श्रेया ने अपनी कमर ऊपर उठाकर स्खलन शुरू कर दिया। मैंने उंगलियों की गति और बढ़ा दी। उसकी योनि से चिपचिपे तरल के साथ मूत्र की एक तेज धार निकलकर मेरे मुँह पर लगी। श्रेया थोड़ी देर आह… उम्मम्म… करते हुए शांत हो गई। मेरा चेहरा उसके मूत्र की गर्म धार से भीग चुका था और मेरा लिंग श्रेया के योनि रस को पीकर अपने पूरे आकार में आ चुका था।

दो-तीन मिनट बाद जब श्रेया संभली तो वह सोफे पर बैठकर मेरा चेहरा देखकर जोर-जोर से हँसने लगी। “ओह पापा! लगता है आपने तो मेरे मूत से चेहरा धो लिया!” म

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