एक माँ का गुप्त जुनून और बेटे की नज़रों में उसका उद्घाटन

मेरा नाम अमित है और मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। हमारे घर में सिर्फ तीन लोग रहते हैं – मैं, मेरे पिताजी और मेरी माँ कुसुम देवी। बाहर से देखने पर मेरी माँ एकदम सीधी-सादी, शालीन और घरेलू महिला लगती हैं, लेकिन उनके भीतर एक ऐसा रहस्य छिपा था जिसका पता मुझे कुछ अनपेक्षित घटनाओं के बाद चला। उनका फिगर 36-32-40 का है और उनकी भारी-भरकम गांड चलते समय एक अलग ही लय में मटकती है, जो अक्सर मेरा ध्यान खींच लेती थी।

एक रात की बात है जब मैंने गलती से अपने माता-पिता के कमरे में झाँका। वह दृश्य मेरे दिमाग में हमेशा के लिए अंकित हो गया। मेरी माँ मेरे पिता का लिंग चूस रही थीं, लेकिन पिताजी में कोई उत्साह नज़र नहीं आ रहा था। वे बिस्तर पर चित पड़े हुए थे, जैसे उन्हें इस पूरी प्रक्रिया में कोई दिलचस्पी ही न हो। माँ खुद ही सारी पहल कर रही थीं, अपने हाथों से पिताजी के नरम लिंग को उत्तेजित करने की कोशिश में।

जब आखिरकार पिताजी का लिंग कड़क हुआ, तो माँ ने खुद ही उस पर अपनी योनि फँसाई और ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनके कराहने की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी – ‘ओह्ह… आईई… उई माँ… अमित के पापा… चोदो न मुझे…’ लेकिन पिताजी का उत्साह जल्दी ही ठंडा पड़ गया। कुछ ही मिनटों में वे स्खलित हो गए, जिस पर माँ ने नाराज़गी जताई – ‘अरे यार, आपका हर बार जल्दी हो जाता है!’ पिताजी ने कड़क स्वर में जवाब दिया – ‘तुम रंडी हो क्या? सो जाओ चुपचाप!’

उस रात मैंने देखा कि माँ नाराज़ होकर करवट बदल लीं और अपनी उंगलियाँ योनि में डालकर खुद ही संतुष्टि पाने लगीं। यह देखकर मेरे मन में एक अजीब सा भाव उठा – मेरी सीधी-सादी माँ के भीतर इतनी तीव्र कामेच्छा छिपी थी जिसकी पूर्ति मेरे पिता नहीं कर पा रहे थे। अगले दिन, मैंने जानबूझकर अपना फोन कमरे में छोड़ दिया और बाहर जाने का नाटक किया।

जब मैं पीछे के दरवाज़े से वापस आया और चुपचाप झाँका, तो माँ को मेरे फोन पर पोर्नोग्राफ़ी देखते हुए पाया। वे इतनी मग्न थीं कि उन्हें मेरे आने का आभास तक नहीं हुआ। उनकी आँखें स्क्रीन पर सटी हुई थीं और उनके हाथ अपनी योनि पर चल रहे थे। जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ी, उन्होंने अपना गाउन उतार फेंका और पूरी तरह नग्न हो गईं।

उनके कराहने की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी – ‘ओह्ह्ह… आआआह्ह… ऊऊऊ…’ कुछ ही देर में वे स्खलित हो गईं और फिर सामान्य होकर फोन वहीं छोड़कर चली गईं। यह देखकर मेरे मन में एक विचित्र उत्तेजना जाग उठी। मैंने उनके फोन की ब्राउज़िंग हिस्ट्री चेक की और पाया कि वे नियमित रूप से अश्लील सामग्री देख रही थीं।

इसके बाद का समय मेरे लिए एक अजीब मानसिक संघर्ष लेकर आया। एक तरफ मेरी माँ थीं जिन्हें मैं बचपन से पूजता आया था, दूसरी तरफ वही माँ अब मेरे सामने एक कामुक महिला के रूप में उभर रही थीं। मैं रोज़ रात को उनके कमरे की ओर देखता, उनकी गतिविधियों पर नज़र रखता। यह सिलसिला हफ्तों तक चला।

एक दिन जब पिताजी काम से बाहर गए, मैंने योजना बनाई। रात को मैं जानबूझकर माँ के कमरे में सो गया और फोन उनके पास छोड़ दिया। जैसे ही उन्हें लगा कि मैं सो गया हूँ, वे फिर से पोर्न देखने लगीं। तभी मैं अचानक उठ बैठा और उन्हें पकड़ लिया। माँ एकदम घबरा गईं, उनके हाथ काँपने लगे और चेहरे का रंग उड़ गया।

मैंने नकली गुस्से से पूछा – ‘माँ, ये आप क्या कर रही हैं? आपको शर्म नहीं आती?’ माँ हाथ जोड़कर माफ़ी माँगने लगीं – ‘बेटा प्लीज़, मुझे माफ कर दे… मैं खुद को रोक नहीं पाई!’ उनकी आँखों में डर साफ़ झलक रहा था। मैंने और दबाव डाला – ‘क्या पापा आपको संतुष्ट नहीं कर पाते?’

माँ ने अपना दुखड़ा रोना शुरू किया – ‘तेरे पापा को तो काम से फुर्सत ही कहाँ मिलती है…’ उनकी आवाज़ में एक गहरी निराशा थी। मैंने अपनी शर्त रखी – ‘मैं किसी को नहीं बताऊँगा, लेकिन आपको मेरे साथ संभोग करना पड़ेगा।’ माँ ने पहले तो इनकार किया, लेकिन जब मैंने पिताजी को बताने की धमकी दी, तो वे टूट गईं।

उस पल माँ के चेहरे पर संघर्ष साफ़ दिख रहा था – एक तरफ मातृत्व का कर्तव्य, दूसरी तरफ शारीरिक भूख। आखिरकार उन्होंने हामी भर दी। मैंने उन्हें ज़ोर से चूमना शुरू किया। पहले तो वे विरोध करती रहीं, लेकिन फिर उनके भीतर की कामुकता जाग उठी। वे कराहने लगीं – ‘आह्ह… बेटा और ज़ोर से…’

मैंने उनके स्तनों को ज़ोर से मसलना शुरू किया। वे मेरे लिंग पर हाथ फेरने लगीं। फिर मैंने अपना लिंग उनके मुँह में दिया और माँ ने उसे चूसना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा – ‘तेरा लौड़ा बहुत गर्म और मोटा है… तेरे बाप का तो इससे आधा भी नहीं…’ यह सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा गर्व जाग उठा।

फिर मैंने माँ को लिटाया, उनके स्तनों को चूसा और अपना लिंग उनकी योनि में प्रवेश कराया। वे ज़ोर से चीखीं – ‘ओह माई गॉड… दर्द हो रहा है बेटा…’ लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी और तेज़ झटके मारने लगा। हर धक्के के साथ उनके बड़े-बड़े स्तन उछल रहे थे।

माँ कराहती रहीं – ‘आह्ह… बेटा… चोद अपनी माँ को… ज़ोर से पेल…’ उनकी आवाज़ में दर्द और आनंद का मिश्रण था। कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठाया। वे खुद ऊपर-नीचे होने लगीं और अपने स्तनों को मसलती रहीं। फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया और ज़ोरदार धक्के मारे।

माँ ने एक रहस्य उजागर किया – ‘मुझे मालूम था कि मेरा बेटा ही मुझे संतुष्ट कर सकता है… इसीलिए तेरे मोबाइल से पोर्न देखती थी और तुझे दिखाने के लिए खिड़की खोलकर रखती थी…’ यह सुनकर मैं हैरान रह गया – मैं समझ रहा था कि मैंने उन्हें फँसाया है, लेकिन असल में मैं ही उनके जाल में फँस गया था।

अंत में जब मैं स्खलित होने वाला था, तो माँ ने कहा – ‘अन्दर ही झड़ जाओ… मैं तुम्हारा वीर्य अन्दर लेना चाहती हूँ…’ और मैंने ऐसा ही किया। उस रात मैंने माँ को तीन बार संभोग किया। अब जब भी मन करता है, हम दोनों इस गुप्त रिश्ते का आनंद ले लेते हैं। यह कहानी मेरे और मेरी माँ के बीच के उस गहरे, अवर्णनीय बंधन की कहानी है जो समाज की सीमाओं से परे है।

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