मेरा नाम सोना वर्मा है और मैं इक्कीस वर्ष की युवा महिला हूँ। मेरा जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले के जैतपुर डोमा गाँव में हुआ था, लेकिन अब मैं दिल्ली में एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत हूँ। मेरे चेहरे पर गाँव की सादगी और शहर की चमक दोनों का मिश्रण है। मेरे लंबे काले बाल और गहरी आँखें अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेती हैं। मुझे अपने रूप पर गर्व है, खासकर जब मैं अपनी छोटी बहन चांदनी से अपनी तुलना करती हूँ। चांदनी उन्नीस वर्ष की है और उसका एक प्रेमी है जिसका नाम अमीष है। अमीष तेईस वर्ष का युवक है और उसका गोरा रंग हम दोनों बहनों से कहीं अधिक चमकदार है।
एक दिन जब मैं अकेली बैठी हुई थी, तो मेरा ध्यान चांदनी के फोन की ओर गया। उसका फोन मेज पर पड़ा था और मुझे उसकी गोपनीय बातचीत के बारे में जिज्ञासा हुई। मैंने उसका फोन उठाया और व्हाट्सएप खोला। वहाँ मैंने देखा कि एक नंबर ब्लॉक किया हुआ था। मेरे मन में संदेह की एक लहर दौड़ गई। मैंने ब्लॉक हटाकर उस नंबर पर वीडियो कॉल कर दी, लेकिन पहले ही अपना वीडियो म्यूट कर लिया था। कॉल उठाते ही एक मधुर आवाज़ सुनाई दी। लड़के ने कहा, “बोलो दीदी!” मैंने तुरंत कॉल काट दी और मैसेज भेजा। मेरे प्रश्नों से वह घबरा गया, क्योंकि वह सीधा-सादा लड़का था। मैंने उसे डराने की कोशिश की और पुलिस की धमकी दी। उसने माफी माँगी और वादा किया कि भविष्य में चांदनी से संपर्क नहीं करेगा।
कुछ दिनों बाद, मैंने फिर से अमीष को परेशान करने का निर्णय लिया। मुझे सीधे-सादे लड़के पसंद हैं और अमीष में यह गुण स्पष्ट दिखाई दे रहा था। मैंने उसे एक संदेश भेजा जिसमें उसकी तुलना एक बंदर से की। उसने उत्तर में पूछा कि मैं कौन हूँ और ऐसा क्यों कह रही हूँ। मैंने उससे कहा कि वह पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर दे, तब मैं अपना परिचय दूँगी। मैंने उसकी शैक्षणिक योग्यता और पेशे के बारे में पूछा। उसने बताया कि वह दसवीं में नब्बे प्रतिशत और बारहवीं में पचासी प्रतिशत अंक लाया था और अब एक सोसाइटी में प्रशासनिक कार्य करता है। मैंने महसूस किया कि यह लड़का मेरे लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है।
मैंने उससे पूछा कि क्या उसकी कोई प्रेमिका है। उसने नकारात्मक उत्तर दिया। तब मैंने अपना परिचय दिया और कहा कि मैं चांदनी की बड़ी बहन हूँ और उससे अकेले में बात करना चाहती हूँ। मैंने उससे कहा कि वह मुझे अपने घर पर मिले। उसने सहमति दे दी और अगले दिन दोपहर दो बजे का समय तय किया। मेरे मन में उत्सुकता और रोमांच का मिश्रण था। मैं जानती थी कि मैं एक सीमा पार करने जा रही हूँ, लेकिन मेरी इच्छाएँ मेरे नियंत्रण से बाहर हो रही थीं। अगले दिन, मैं सावधानी से तैयार हुई और अमीष के घर की ओर चल पड़ी।
जब मैं उसके घर पहुँची, तो वह अकेला था। उसका घर साफ-सुथरा और सजा हुआ था। मैंने पीछे से उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके कान में फुसफुसाया, “आई लव यू अमीष!” उसने कहा कि वह चांदनी से प्यार करता है। मैंने उसे धमकाया और कहा कि अगर उसे जेल जाना है तो बता दे, क्योंकि चांदनी अभी नाबालिग है। मैंने उसे समझाया कि मैं चांदनी से अधिक सुंदर, समझदार और पढ़ी-लिखी हूँ और उसे खुश रख सकती हूँ। मेरी बातों का उस पर गहरा प्रभाव पड़ा।
मैंने उससे पूछा कि क्या उसने कभी नंगी लड़की देखी है। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू किए। मेरे शरीर का हर अंग कपड़ों से मुक्त होता गया और मैं केवल अंडरवियर में रह गई। अमीष की आँखें चौंधिया गईं। उसने कहा, “वाह! आप गजब की लग रही हो!” मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सब उसके लिए है। यह सुनते ही उसने भी अपने कपड़े उतार दिए और उसका शरीर हट्टा-कट्टा और आकर्षक था। उसने कहा, “सोना, तू मस्त है, तेरी योनि चाट लूँ?” मैंने सहमति में सिर हिलाया।
जैसे ही उसने अपनी जीभ मेरी योनि में डाली, मेरे शरीर में एक विद्युत-सी दौड़ गई। मैं पागलों की तरह चिल्लाई, “जीजाजी! मैं आपकी हूँ!” कुछ देर बाद, मैंने कहा कि मैं उसका लिंग चूसना चाहती हूँ ताकि योनि में प्रवेश आसान हो। मैंने उसके लिंग को अपने मुँह में लिया और उसे अच्छी तरह साफ किया। फिर मैंने कहा, “अब अपना आठ इंच का लिंग मेरी योनि में डालो जल्दी, नहीं तो मैं मर जाऊँगी!” उसने लिंग को योनि के प्रवेश द्वार पर टिकाया, लेकिन वह अंदर नहीं जा रहा था। मैंने उसे और जोर लगाने के लिए कहा।
अमीष ने कहा कि अभी तो आधा ही गया है और खून निकल रहा है। उसने चिंता जताई कि और अंदर जाने पर बहुत दर्द होगा। मैंने कहा कि उसका लिंग बहुत बड़ा है, लेकिन आज मुझे प्यार, दर्द और आनंद तीनों एक साथ चाहिए। फिर उसने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लिंग अंदर घुस गया। मेरी योनि से खून की धारा बह निकली। मैंने पूछा कि क्या उसे आनंद आ रहा है और याद दिलाया कि मैंने उसे खुश रखने का वादा किया था। उसने कहा कि मेरी योनि स्वर्ग है और पूछा कि क्या मैं उसे हमेशा ऐसे ही संभोग करने दूँगी। मैंने कहा कि मैं हमेशा उसकी रहूँगी और उसे और जोर से धकेलने के लिए कहा।
उस दिन के बाद से, हम दोनों एक-दूसरे के हो गए। अमीष अब मुझे ही संभोग करता है और मैं उसके साथ बहुत खुश हूँ। हमारे बीच का यह रिश्ता गहरा और भावनात्मक हो गया है। मैंने महसूस किया कि कभी-कभी जीवन अप्रत्याशित मोड़ लेता है और हमें नए रास्ते दिखाता है। इस अनुभव ने मुझे यह सिखाया कि इच्छाएँ और आकर्षण कितने शक्तिशाली हो सकते हैं। आज मैं अपने निर्णय से संतुष्ट हूँ और भविष्य के लिए आशावादी हूँ।