मामा के पड़ोस की वह रात: एक गर्म अन्तर्वासना की कहानी

मेरा नाम राहुल है और मैं रोहतक, हरियाणा से हूँ। जीवन में हर किसी को किसी न किसी चीज़ की तलाश रहती है, और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था। मेरे मामा जी का घर झज्जर में है, और उनके पड़ोस में एक भाभी रहती थीं। उनकी सुंदरता इतनी मनमोहक थी कि देखते ही मन भर जाता था। उनके रूप-रंग, उनकी मुस्कान, और उनके अंदाज़ में एक ऐसा जादू था जो मुझे बार-बार अपनी ओर खींचता। मेरे मन में अक्सर यही ख़्वाहिश उमड़ती कि काश मैं उनके साथ एक रात बिता पाता, उनकी कोमल त्वचा को महसूस कर पाता। पर मेरी किस्मत में यह शायद लिखा नहीं था। लंबे समय तक मैं उनके नाम का जाप करता रहा, उनकी कल्पना में खोया रहा, और अपनी अकेली रातों को उनकी यादों से सजाता रहा। फिर एक दिन, ऐसा लगा जैसे ऊपर वाले ने मेरी गुहार सुन ली हो, और मेरी यह गुप्त इच्छा एक जीवंत अनुभव में बदल गई।

उस दिन मैं मामा जी के घर आया हुआ था। शाम के समय, वह भाभी अचानक मामा के घर आईं। उनकी आवाज़ में एक मधुरता थी, और चेहरे पर एक हल्की सी लालिमा दिख रही थी। उन्होंने मेरी मामी से कहा, “दीदी, आज अनुज के पापा पड़ोस में शादी की बारात में गए हुए हैं, इसलिए मैं और अनुज अकेले हैं। क्या राहुल को आज रात हमारे घर सोने के लिए भेज सकती हैं?” मामी ने तुरंत हामी भर दी और मुझसे भाभी के घर सोने का कह दिया। यह सुनकर मेरा दिल धड़कने लगा, और मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई। ऐसा लगा जैसे मेरी सारी इच्छाएं एक साथ पूरी होने वाली हैं। भाभी के जाते ही मैं बाथरूम में गया और अपने आप को तैयार किया, मन की उत्तेजना को शांत करने की कोशिश की। रात का खाना खाकर मैं भाभी के घर की ओर चल पड़ा, हर कदम पर मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

जब भाभी ने दरवाज़ा खोला, तो मैं उन्हें देखकर स्तब्ध रह गया। उन्होंने एक काला कुर्ता, सफेद सलवार और काले दुपट्टे में खुद को सजाया हुआ था। उनका फिगर 34-30-36 का था, और कपड़े उनके शरीर के उभार को और भी आकर्षक बना रहे थे। उनके तने हुए स्तन और उभरी हुई कमर ने मेरे मन में एक तूफान खड़ा कर दिया। भाभी ने मुस्कुराते हुए मुझे अंदर आने का इशारा किया। मैं अंदर गया और देखा कि उनका बेटा अनुज टीवी देख रहा था, लेकिन मेरी नज़रें तो केवल भाभी पर टिकी थीं। उनकी हर हरकत, हर मुस्कान मेरे लिए एक नया आकर्षण थी। मैंने अपने आप को संभालने की कोशिश की, लेकिन मेरे अंदर की इच्छाएं मुझे बेकाबू कर रही थीं। हमने कुछ देर सामान्य बातचीत की, लेकिन मेरा ध्यान हमेशा उनकी ओर ही रहा।

रात होते ही हम सोने के लिए तैयार हुए। भाभी और अनुज बिस्तर पर सो गए, जबकि मेरे लिए बिस्तर के पास एक चारपाई बिछाई गई थी। वे दोनों जल्दी ही सो गए, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे दिमाग में केवल भाभी की छवि घूम रही थी। मैंने अपना मोबाइल निकाला और ब्लूटूथ से कनेक्ट करके पोर्न देखना शुरू कर दिया। कमरे में अंधेरा था, और मैं पूरी तरह से उसमें खो गया था। मुझे पता नहीं था कि भाभी भी जाग रही हैं और मेरी हरकतों पर नज़र रखे हुए हैं। अचानक, उन्होंने मेरा फोन छीन लिया और लाइट ऑन कर दी। मैं डर गया, और मेरे मन में सवाल उठने लगे कि अब क्या होगा। भाभी ने गंभीर आवाज़ में पूछा, “यह क्या कर रहे हो? बोलो न!” मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था, मेरी जुबान लड़खड़ा रही थी।

भाभी ने फिर पूछा, “इन सबको देखकर तुझे क्या मिलता है?” मैंने हकलाते हुए कहा, “कुछ नहीं, भाभी जी… वो… वो…” उन्होंने मेरी ओर गहरी नज़र से देखा और कहा, “वो वो क्या? जब कुछ नहीं मिलता, तो क्यों देखते हो?” मैंने नज़रें झुकाते हुए कहा, “बस, अच्छा लगता है।” उनकी आँखों में एक चमक आई, और उन्होंने पूछा, “किसको?” मैंने अपने शरीर की ओर इशारा करते हुए कहा, “मुझे… और इसको।” भाभी हल्की सी मुस्कुराई और बोलीं, “इसको किसको?” मैंने फिर से अपने शरीर की ओर इशारा किया। उनकी मुस्कान और भी गहरी हो गई, और वे इठलाते हुए बोलीं, “अच्छा… इसे कैसे अच्छा लगता है? जरा मैं भी तो देखूँ कि इसमें क्या अच्छा दिखने लगा है!”

मैं चुप रहा, और तभी भाभी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे शरीर को छुआ। उनके स्पर्श से मेरे शरीर में एक झुरझुरी दौड़ गई। भाभी ने महसूस किया और बोलीं, “अरे बाप रे… यह तो इतना बड़ा हो गया है… ये कैसे हो गया? अब इसको तो चुप करवाने के लिए कुछ चाहिए होगा ना!” मैंने कहा, “चाहिए तो बहुत कुछ है, भाभी जी… लेकिन मिलता ही नहीं है।” यह सुनकर वे मुस्कुरा दीं और धीरे-धीरे मेरे शरीर को सहलाने लगीं। उनके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे लिए एक नए संसार का द्वार खोल रहा था। मैंने भी उनके शरीर को छूना शुरू किया, और हम दोनों एक दूसरे के करीब आते गए।

अब हमारी सांसें तेज़ होने लगी थीं, और हमने एक दूसरे के होंठों को चूमना शुरू कर दिया। यह पहला चुंबन था, जिसने मेरे अंदर की सारी इच्छाओं को जगा दिया। हम धीरे-धीरे एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे, और करीब बीस मिनट की लंबी चुंबन की लड़ाई के बाद हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो गए। मैंने भाभी को नीचे लिटाया और उनके शरीर का आनंद लेना शुरू किया। उनकी त्वचा मखमल जैसी कोमल थी, और हर छूआट एक नया एहसास दे रही थी। भाभी मेरे स्पर्श से मस्त होने लगी थीं, और उनकी आहें कमरे में गूंजने लगी थीं।

कुछ देर बाद, भाभी ने कहा, “मुझे भी केला चूसना है!” मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा, “चूसो न… आपको किसने रोका है!” वे हंस दीं, और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। भाभी मेरे शरीर को चूस रही थीं, और मैं उनके शरीर का आनंद ले रहा था। यह एक ऐसा अनुभव था जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था। कुछ देर बाद, मैंने उन्हें चुदाई की पोजीशन में लिटाया और अपने शरीर को उनके शरीर से जोड़ दिया। उनकी गर्माहट ने मुझे एक नई ऊर्जा से भर दिया, और हम दोनों एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़े।

हमारी चुदाई की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी, और भाभी की आहें मेरे कानों में मधुर संगीत की तरह लग रही थीं। कुछ देर बाद, मैंने भाभी को अपने ऊपर लिटा लिया, और वे खुद ही ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन मेरे मुँह में आते जा रहे थे, और मैं उन्हें चूसते हुए उनके शरीर का आनंद ले रहा था। करीब दस मिनट की मस्त चुदाई के बाद, मेरा पानी निकल गया। भाभी भी एक बार झड़ चुकी थीं, और मेरे शरीर की गर्मी से वे दूबारा स्खलित हो गईं। वे मेरे सीने पर ही ढेर हो गईं, और लंबी सांसें लेते हुए मुझे फिर से गर्म करने लगीं। मैं भी उनके शरीर को सहलाते हुए उन्हें फिर से जागृत करने में लग गया। कुछ मिनट बाद, मेरा शरीर फिर से तैयार हो गया।

इस बार, मैंने भाभी को डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से उनके शरीर में धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ, भाभी की आहें और तेज़ होती जा रही थीं। वे जोर-जोर से सांसें ले रही थीं और मुझे और तेज़ चुदाई करने के लिए कह रही थीं। कुछ देर बाद, मैंने चुदाई रोकी और फिर से भाभी के शरीर को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। भाभी तड़प रही थीं और चिल्लाने लगी थीं, “आह मादरचोद… अब वापस लंड पेल दो न… अन्दर डाल कर चोद दे मुझे… आह खा जा मेरी चूत को!” तभी भाभी का काम तमाम हो गया। मैंने उनके शरीर से निकला सारा पानी पी लिया। यह एक नमकीन और खट्टा स्वाद था, जिसने मुझे एक नशे जैसा एहसास दिया।

मैंने भाभी के शरीर को साफ किया और फिर से चाटने लगा। जब वे फिर से गर्म हो गईं, तो मैंने इशारा किया कि अब वे भी मेरा मुँह में ले लें। वे मान गईं और हम दोबारा 69 की पोजीशन में आ गए। भाभी ने अपना शरीर मेरे मुँह में लगा दिया और मेरे शरीर को चूसने लगीं। वे काफी गर्म हो चुकी थीं, और उनके स्पर्श ने मुझे जन्नत का एहसास दिलाया। फिर मैंने धीरे-धीरे उनके मुँह को चोदना शुरू किया, और वे मेरे शरीर को गले तक ले जाती हुई आहें भरने लगीं। कुछ मिनट की लंबी चटाई के बाद, मैंने उन्हें लिटाया और अपने शरीर को उनके शरीर में डाल दिया। भाभी ह

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