रात का समय था और मेरी माँ रेखा ने जलील अंकल के साथ चार बार चूत और दो बार गांड मरवाई थी। इतनी अथक चुदाई के बाद सुबह उठते ही उनके शरीर में एक अजीब सी अकड़न और दर्द महसूस हो रहा था। उनके पैरों में इतनी कमजोरी आ गई थी कि वे बिस्तर से उठकर सीधे खड़े भी नहीं हो पा रही थीं। उनके चेहरे पर थकान के साथ-साथ एक संतुष्टि भी झलक रही थी, मानो उन्होंने कोई बहुत बड़ा काम पूरा कर लिया हो। कमरे की हवा में अभी भी पसीने और शारीरिक संबंध की गंध मिली हुई थी। चादरें बेतरतीब ढंग से बिखरी पड़ी थीं और कमरे का माहौल एक अजीब सी शांति से भरा हुआ था। मैंने देखा कि माँ बिस्तर पर कराह रही हैं और उनकी आँखों में दर्द साफ झलक रहा है। मैंने तुरंत फैसला किया कि उनकी मालिश करूंगा ताकि उनके शरीर का दर्द कुछ कम हो सके। मैंने धीरे से उनके पास जाकर उनके कंधों और पीठ की मालिश शुरू की। उनकी त्वचा गर्म और नम महसूस हो रही थी। फिर, जब मैंने देखा कि उनकी चूत में भी सूजन और दर्द है, तो मैंने हल्के हाथों से वहाँ भी मालिश करने का निर्णय लिया। मेरे हाथों का स्पर्श पाते ही माँ ने एक लंबी सांस ली, मानो उन्हें राहत मिल रही हो।
इससे पहले की रात की घटना याद करते हुए, मम्मी और जलील अंकल की चुदाई खत्म हुई थी तो अंकल ने मम्मी को धन्यवाद देते हुए कहा था, “तुमने मस्त चुदाई का मजा दिया है रेखा रानी… सच में तुम्हारी गांड मारने में मजा आ गया।” उनकी आवाज़ में संतुष्टि और थकान दोनों ही झलक रहे थे। मम्मी ने यह सुनकर एक शरमाती हुई मुस्कान के साथ जवाब दिया था, “इसके लिए आप मेरे बेटे को थैंक्स दो।” उनकी आँखों में एक चमक थी, मानो वे इस पूरे अनुभव से बहुत खुश थीं। कमरे में बिखरी हुई चादरें और तकिए उस रात की जंग का सबूत दे रहे थे। हवा में सेक्स की गंध अभी भी तैर रही थी। जलील अंकल ने मेरी तरफ मुड़कर पूछा, “बेटा, जब मैं तेरी मम्मी की गांड मार रहा था तो तुझे कैसा लग रहा था?” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्सुकता थी। मैंने हंसकर जवाब दिया, “अंकल मुझे लगा जैसे मम्मी किसी पोर्न फिल्म की हिरोइन हैं और आप हीरो… और यहां ब्लू फिल्म की शूटिंग चल रही हो। अंकल, आपका बड़ा-मोटा काला लंड मेरी मम्मी की बड़ी गांड के लिए बिल्कुल परफेक्ट है।” मेरे शब्दों ने कमरे के माहौल को और भी गर्म कर दिया। मम्मी शर्माती हुई बोलीं, “धत् बदमाश… कैसे बोल देता है ये सब!” लेकिन उनकी आँखों में नाराजगी के बजाय एक चंचल चमक थी।
जलील अंकल गर्व से बोले, “सुनील, तूने आज मुझ जैसे एक विधर्मी को अपने कमरे में बुलाकर अपनी मम्मी की गांड मरवा कर मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है… मैं ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा।” उनके चेहरे पर एक गहरी कृतज्ञता की भावना थी। मैंने विनम्रता से कहा, “अंकल, मेरी मम्मी को आपका कट लगा लंड बहुत पसंद आया है… इसलिए मैंने अपनी मम्मी की खुशी के लिए आपको यहां बुलाया।” मेरे इन शब्दों को सुनकर मम्मी मुस्कुराईं और बोलीं, “बेटा मैं आज तुझसे बहुत-बहुत खुश हूँ… अगर तू न होता तो मुझे ये खुशी कभी नहीं मिलती।” उनकी आवाज़ में ममता और संतुष्टि का अनोखा मेल था। मैंने कहा, “मम्मी आप किस्मत वाली हो जो आपको इतना ताकतवर मर्द मिल गया। मैंने देखा था कि अंकल कैसे आपके भारी जिस्म को अपनी गोद में उठा कर आपकी ले रहे थे।” मम्मी शर्माती हुई बोलीं, “बेटा… इसलिए तो मैं इनकी दीवानी हूँ।” उनके गालों पर हल्का लालिमा आ गई थी।
मैंने आगे कहा, “मम्मी आज आपकी मोटी-गोरी गांड में जलील अंकल का काला-मोटा लंड देखकर बहुत अच्छा लगा… इनका लंड साइज आपकी मोटी गांड के लिए बिल्कुल सही है… बिल्कुल फिट बैठता है।” मेरे शब्द सुनकर मम्मी फिर बोलीं, “धत् बदमाश।” लेकिन उनकी आवाज़ में नाराजगी नहीं, बल्कि एक शरारत भरी लापरवाही थी। मैंने हैरानी से कहा, “मम्मी, सच कह रहा हूँ कि आज मैं अंकल की ताकत देखकर बड़ा हैरान हुआ था। आपका वजन 80 किलो है, लेकिन अंकल आपको गोद में उठाकर ऐसे चोद रहे थे जैसे आप कोई कमसिन लड़की हों और वे आपको उछाल-उछाल कर खेल खेला रहे हों।” मेरे शब्दों ने उस रात की तस्वीर फिर से जीवंत कर दी। जलील अंकल गर्व से बोले, “बेटा तेरी मम्मी 80 नहीं… 90 किलो की भी होती तो मैं इन्हें ऐसे ही गोद में उठाकर चोदता!” उनकी आवाज़ में एक अदम्य आत्मविश्वास था।
मैंने कहा, “अंकल, मेरी मम्मी सच में खुशनसीब हैं कि उन्हें इतना ताकतवर लंड मिला… मेरी मम्मी की बड़ी-मोटी गांड मारने के लिए तो इतना ही बड़ा-मोटा लंड चाहिए!” मम्मी हंसती हुई बोलीं, “तू तो बहुत बिगड़ गया है… अपनी मम्मी के सामने गंदी-गंदी बातें करता है।” लेकिन उनकी हंसी में कोई डांट नहीं थी। जलील अंकल बोले, “रेखा तेरी गांड इतनी बड़ी है कि इसके सामने मेरा लंड छोटा लगता है… इतनी बड़ी गांड लेकर भी तू डर रही थी।” मम्मी मुस्कुराकर बोलीं, “इतने बड़े-मोटे लंड से किसे डर नहीं लगेगा लेकिन अगर मुझे पहले पता होता कि गांड मरवाने में इतना मजा आएगा तो मैं आपको कभी नहीं रोकती… आपसे गांड मरवाकर मुझे बहुत अच्छा लगा।” उनकी स्वीकारोक्ति ने कमरे के वातावरण को और भी अधिक इंटिमेट बना दिया। जलील अंकल ने कहा, “रेखा मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे इतनी बड़ी और सुंदर गांड वाली संस्कारी औरत मिलेगी।” उनके शब्दों में प्रशंसा और आश्चर्य का मिश्रण था।
कुछ देर बाद जलील अंकल का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया। इस बार उन्होंने मम्मी को कुतिया स्टाइल में किया, पीछे से अपना मोटा लंड मम्मी की चूत में पेल दिया और वापस धकापेल चुदाई चालू हो गई। कमरे में फिर से कराहने और चीखने की आवाजें गूंजने लगीं। मैं अपनी मम्मी की चुदाई देखता हुआ अपना लंड सहला रहा था। उनके शरीर का हर मूवमेंट, हर झटका मेरे लिए एक दृश्य दावत थी। काफी देर तक की घमासान चुदाई के बाद अंकल मेरी मम्मी की चूत में जोर-जोर से लौड़े को पेलते निकालते हुए झड़ गए। दोनों के शरीर से पसीना बह रहा था और सांसें तेज चल रही थीं। मैंने जलील अंकल से कहा, “अंकल एक बज गया है… आज आप तीन बार मेरी मम्मी को चोद चुके हो। आप थक गए होंगे। अभी दो घंटे बचे हैं, सो लीजिए।” जलील अंकल ने हंसकर कहा, “बेटा, तेरी मम्मी को नंगी देखकर मुझे नींद कैसे आ सकती है?” उनकी आँखों में अभी भी कामुकता की चिंगारी थी। मैंने कहा, “अंकल मुझे नींद आ रही है… आप ठीक 3 बजे यहां से चले जाना।” जलील अंकल बोले, “ठीक है बेटा… तू सो जा!” मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, आप अपने कमरे चली जाइए।” फिर मैं सो गया।
जब मेरी नींद खुली तो सुबह के ठीक 5 बज रहे थे। कमरे में हल्की रोशनी आ रही थी। मैंने देखा कि जलील अंकल और मम्मी अभी तक बिल्कुल नंगे होकर सो रहे थे। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे, मानो उन्हें अलग होने का डर हो। मैंने तुरंत जलील अंकल को जगाया और कहा, “अंकल मैंने आपसे कहा था कि 3 बजे यहां से चले जाना… और आप अभी तक सो रहे हैं?” जलील अंकल घबराकर बोले, “बेटा… नींद लग गई थी… मुझे समय का पता ही नहीं चला।” वह जल्दी से उठे और कपड़े पहनने लगे। तभी मम्मी भी जाग गईं। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी मैंने आपसे कहा था कि 3 बजे पापा के रूम चली जाना… और आप यहीं सो गईं? अगर पापा आपको ढूंढते हुए यहां आ जाते तो क्या होता?” मम्मी शर्माती हुई बोलीं, “बेटा… मुझे माफ कर दो… आज रात भर इन्होंने मुझे सोने ही नहीं दिया… पूरी रात मुझे सांड की तरह पेला है… मैं बहुत थक गई थी, इसलिए यहीं सो गई।” उनकी आवाज़ में थकान और लज्जा दोनों थे।
मैंने जलील अंकल से कहा, “अंकल अब जल्दी यहां से जाइए।” जलील अंकल ने जेब से मोटी नोटों की गड्डी निकाली और मुझे देने लगे। मैंने मना करते हुए कहा, “अंकल, मैं ये सब पैसों के लिए नहीं करता… अपनी मम्मी की खुशी के लिए करता हूँ… मुझे आ