छह महीने पहले की एक गर्मियों की दोपहर थी जब हमारे घर के खाली कमरे में नए किरायेदारों का आगमन हुआ। चांदनी भाभी, उनके पति और सात साल की बेटी अंशिका ने हमारे घर की दूसरी मंजिल पर रहना शुरू किया। पहली नजर में ही चांदनी भाभी की मासूमियत भरी मुस्कान और उनके छोटे कद ने मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। उनका गठीला शरीर और आँखों में चमकती जवानी देखकर मेरे मन में वह भावना जाग उठी जिसे रोक पाना मेरे लिए मुश्किल हो गया।
मैं एक युवा लड़का हूँ जिसकी उम्र अभी बीस साल के आसपास है और शारीरिक रूप से मैं काफी ताकतवर हूँ। चांदनी भाभी की हर छोटी-छोटी हरकत, उनकी मासूम मुस्कान और घर के आँगन में चहलकदमी करते हुए उनकी आवाज़ मेरे दिमाग में बसती चली गई। धीरे-धीरे मैंने उनके साथ बातचीत करने के बहाने ढूँढने शुरू कर दिए। कभी पानी माँगने का बहाना, तो कभी घर के किसी काम में मदद करने का।
एक दिन जब चांदनी भाभी रसोई में दूध गर्म कर रही थीं, मैंने हिम्मत जुटाकर उनसे कहा, “भाभी, आज ताजा दूध पीने का मन कर रहा है।” उनकी आँखों में एक चमक दौड़ गई और वे मुस्कुराकर बोलीं, “पहले शादी तो करवा लो, फिर रोज ताजा दूध मिल जाया करेगा।” उनकी इस बात ने मेरे अंदर के साहस को और बढ़ा दिया। मैंने उनके करीब जाकर कहा, “शादी तो जब होगी तब होगी, अभी तो आप मेरी बात समझो न!”
उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैं अक्सर उनके कमरे के आसपास मंडराया करता, किसी न किसी बहाने से उनसे बातें करता रहता। चांदनी भाभी भी मेरी इन हरकतों पर कभी नाराजगी नहीं दिखाती थीं। बल्कि कई बार तो वे इतनी मासूम मुस्कान दे देतीं कि लगता जैसे वे मेरी बातों का आनंद ले रही हों। एक दिन तो मैंने उनके दूध को हल्के से छू भी दिया, जिस पर वे हँसते हुए दूर हो गईं और बोलीं, “ऐसे खुले में पियोगे क्या?”
धीरे-धीरे हमारे बीच की दूरी कम होती चली गई। मैं अक्सर उनके कमरे में जाकर उनके साथ हल्की-फुल्की बातें करता, कभी उनके बालों में हाथ फेरता, तो कभी उनकी पीठ थपथपाता। चांदनी भाभी भी मेरी इन हरकतों पर सिर्फ मुस्कुरा देतीं, कभी कोई आपत्ति नहीं करतीं। लगता था जैसे वे भी मेरे इस व्यवहार का आनंद ले रही हों और मुझे और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही हों।
एक शाम जब चांदनी भाभी के पति किसी काम से बाहर गए हुए थे, उन्होंने खुद मुझसे कहा, “आज रात तेरे भैया बाहर जा रहे हैं।” उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और आवाज़ में एक मधुर कंपन। मैं तुरंत समझ गया कि आज का दिन कुछ खास होने वाला है। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और मैंने तुरंत उन्हें अपनी बाँहों में खींच लिया।
चांदनी भाभी ने मुझे धीरे से दूर किया और फुसफुसाकर कहा, “ऐसे में मजा नहीं आएगा। आज रात तुम मेरे पास सो जाना, फिर हम आराम से मस्ती करेंगे।” मैंने उनकी योजना को और बेहतर बनाने का सुझाव दिया कि वे मेरी माँ से कह दें कि उन्हें अकेले सोने में डर लगता है। चांदनी भाभी ने मेरी इस बात पर सहमति जताई और शाम को मेरी माँ के पास जाकर उन्होंने यही बात कह दी।
रात होते ही मैं चांदनी भाभी के कमरे में पहुँच गया। कमरे में हल्की सी लाल बत्ती जल रही थी और हवा में खुशबूदार इत्र की महक फैली हुई थी। चांदनी भाभी ने मेरे लिए गर्म दूध का गिलास लाया। जब मैंने दूध पीना शुरू किया तो उन्होंने मेरे पास आकर बैठ गईं और मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं। उनकी नजदीकी ने मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ा दी।
कुछ देर तक हमने उनकी बेटी अंशिका के साथ बातें कीं। वह भोली सी बच्ची थी जो हमारी बातों में शामिल होकर खुश हो रही थी। जब वह सो गई तो कमरे का माहौल एकदम बदल गया। चांदनी भाभी ने मेरी ओर देखा और उनकी आँखों में एक तरह की भूख साफ झलक रही थी। मैंने धीरे से उनके शरीर पर हाथ फेरना शुरू किया।
चांदनी भाभी ने भी हिचकिचाहट छोड़ दी और मेरे शरीर को छूने लगीं। हमारी साँसें तेज होने लगीं और शरीर गर्माहट से भरने लगे। चांदनी भाभी ने फुसफुसाकर कहा, “इतने दिन बाद तो आज तुमसे चुदवाने का मौका मिला है। मैंने तुम्हारे लिए खुद को तैयार किया है।” उनकी बातों ने मेरे अंदर की आग को और भड़का दिया।
मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारने शुरू किए। उनका शरीर चाँदनी की तरह चमक रहा था। उनकी त्वचा मखमल सी कोमल थी और शरीर की रेखाएँ किसी कलाकार की कृति जैसी लग रही थीं। जब मैंने पूरी तरह से उन्हें नंगा किया तो उनकी सुंदरता देखकर मेरी साँसें रुक सी गईं। उनका शरीर पूरी तरह से तैयार और सजा हुआ लग रहा था।
हम दोनों एक दूसरे के शरीर का आनंद लेने लगे। चांदनी भाभी ने मेरे शरीर को चूमना शुरू किया और मैंने उनके नरम अंगों को छूकर उनका स्वाद लिया। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज़ और शरीरों के टकराने की मधुर ध्वनि गूँज रही थी। हवा में पसीने और खुशबू का मिश्रण फैल गया था।
जब हमने एक दूसरे को पूरी तरह से अनुभव कर लिया तो मैंने चांदनी भाभी को अपने नीचे लेटाया। उनकी आँखों में एक तरह की बेसब्री झलक रही थी। मैंने धीरे से उनके शरीर के ऊपर अपना शरीर रखा और फिर एक साथ हम दोनों एक दूसरे में विलीन हो गए। चांदनी भाभी की आँखें बंद हो गईं और उनके होठों से एक मधुर आह निकली।
उस रात हम दोनों ने पहली बार एक दूसरे को पूरी तरह से अनुभव किया। चांदनी भाभी का शरीर मेरे लिए एक नई दुनिया की तरह था। हर छूअन, हर चुंबन, हर आलिंगन में एक नया आनंद छिपा हुआ था। हम दोनों ने उस रात कई बार एक दूसरे को प्यार किया और हर बार नई अनुभूति हुई।
सुबह जब मैं उठा तो चांदनी भाभी मेरे पास ही सो रही थीं। उनके चेहरे पर एक शांत मुस्कान थी और शरीर पर प्यार के निशान साफ दिख रहे थे। मैंने उन्हें जगाया तो वे मुस्कुराकर मेरी ओर देखने लगीं। उस दिन के बाद से हमारे रिश्ते में एक नया मोड़ आ गया। अब हम दोनों किसी न किसी बहाने एक दूसरे के करीब आने की कोशिश करते रहते।
कुछ दिनों बाद चांदनी भाभी ने अपनी बहन की बेटी को हमारे घर बुला लिया। वह लड़की सिर्फ इक्कीस साल की थी और देखने में काफी आकर्षक थी। उसका नाम रिया था और वह पढ़ाई के लिए शहर आई थी। पहली नजर में ही मैं समझ गया कि रिया अनुभवी लड़की है और उसकी आँखों में एक तरह की चालाकी झलक रही थी।
एक दिन जब चांदनी भाभी के पति ऑफिस गए हुए थे और उनकी बेटी स्कूल में थी, मैंने रिया के साथ बातचीत शुरू की। वह बहुत ही खुले विचारों की लड़की थी और जल्दी ही मेरी बातों में रुचि दिखाने लगी। कुछ ही दिनों में हमारे बीच एक अलग तरह का रिश्ता बन गया। रिया ने खुद ही मुझे अपने करीब आने के संकेत दिए और एक दिन तो वह सीधे मेरे कमरे में आ गई।
उस दिन हमने पहली बार एक दूसरे को अनुभव किया। रिया का शरीर युवा और ऊर्जा से भरा हुआ था। उसकी हरकतों में एक तरह की जंगलीपन थी जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी। जब हम दोनों एक दूसरे में लीन थे, तभी अचानक चांदनी भाभी कमरे में आ गईं। पहले तो वे हैरान रह गईं, फिर मुस्कुराने लगीं।
चांदनी भाभी ने हमें देखकर कोई आपत्ति नहीं की, बल्कि वे भी हमारे साथ जुड़ गईं। उस दिन पहली बार मैंने दो महिलाओं के साथ एक साथ समय बिताया। यह अनुभव बिल्कुल नया और रोमांचक था। तीनों शरीर एक दूसरे में इस तरह घुले-मिले जैसे कोई सुंदर कलाकृति बन रही हो। हवा में पसीने, खुशबू और उत्तेजना का मिश्रण फैल गया था।
उस दिन के बाद से हम तीनों के बीच एक अलग तरह का रिश्ता बन गया। रिया ने तो स्थायी रूप से हमारे घर में रहना शुरू कर दिया। अब हम तीनों किसी न किसी बहाने एक दूसरे के करीब आते रहते। कभी चांदनी भाभी के साथ, तो कभी रिया के साथ, और कभी तीनों एक साथ। हर बार नया अनुभव, हर बार नया रोमांच।
आज भी जब भी मौका मिलता है, हम तीनों एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं। चांदनी भाभी की मासूमियत और रिया की जंगलीपन का मिश्रण मेरे लिए एक अनोखा अनुभव बन गया है। हर रोज नई कहानी, हर रोज नया रो