मेरा नाम मयूर है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में रहता हूँ। हमारा परिवार सामान्य सा लगता था, लेकिन अंदर ही अंदर कई तनावों से जूझ रहा था। मेरे पिता एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते थे और शहर से दूर रहते थे। उनका घर आना-जाना बहुत कम हो गया था, महीने में एक या दो बार से ज्यादा नहीं। धीरे-धीरे यह अहसास होने लगा था कि उनकी दूसरी औरत से भी कोई संबंध है, जो हमारे परिवार को तोड़ रहा था।हमारे घर में मेरी माँ सुमन, मैं और मेरी दादी रहते थे। मेरी माँ की उम्र अभी चालीस के आसपास थी और उनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था। उनका फिगर 38-32-36 का था, जो उनकी उम्र के हिसाब से बहुत सुडौल और आकर्षक था। मैं अक्सर सोचता था कि कोई भी पुरुष उन्हें देखकर आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता, फिर भी मेरे पिता उनकी तरफ ध्यान नहीं देते थे।मेरी माँ के चेहरे पर हमेशा एक उदासी छाई रहती थी, जैसे कोई बड़ी कमी उनके जीवन में हो। वह चुपचाप सब कुछ सहती रहतीं, शायद इसलिए कि परिवार टूट न जाए। पिता जब भी घर आते, सिर्फ पैसे देकर चले जाते, बातचीत नाममात्र की होती। माँ की आँखों में एक तड़प साफ देखी जा सकती थी, एक ऐसी तड़प जो शारीरिक और भावनात्मक स्पर्श की भूखी थी।एक दिन की बात है जब मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। माँ बाथरूम में नहा रही थीं और अचानक उन्होंने मुझे आवाज दी। ‘मयूर, अंदर आकर मेरी पीठ पर साबुन लगा दो।’ मैं थोड़ा झिझकता हुआ अंदर गया। बाथरूम में भाप से सब कुछ धुंधला सा था। माँ ने दरवाजा खोलकर मुझे अंदर बुलाया।वह केवल ब्रा और पैंटी में थीं, उनका शरीर पानी की बूंदों से भीगा हुआ था। मैंने हाथ में साबुन लिया और उनकी पीठ पर रगड़ना शुरू किया। उनकी त्वचा मुलायम और चिकनी थी, साबुन के बुलबुले उनकी पीठ पर स्लाइड हो रहे थे। कुछ देर बाद मैंने कहा, ‘माँ, यह ब्रा बीच में आ रही है, दिक्कत हो रही है। इसे निकाल दो तो ठीक रहेगा।’ माँ ने बिना कुछ सोचे कहा, ‘तुम ही खोल दो पीछे से।’मेरे हाथ काँप रहे थे जब मैंने ब्रा के हुक खोले। ब्रा निकलते ही उनकी पीठ पूरी तरह नंगी हो गई। मैं उनकी नंगी पीठ पर साबुन लगाता रहा, मेरे मन में अजीब सी घबराहट और उत्तेजना दोनों थीं। उस दिन पहली बार मैंने अपनी माँ को इस तरह देखा था और मेरे अंदर कुछ बदल सा गया था।उस घटना के बाद माँ और मेरे बीच का रिश्ता बदलने लगा। वह मुझसे अपने दिल की बातें शेयर करने लगीं, अपनी उदासी, अपनी अकेलीपन की कहानियाँ सुनाने लगीं। मैं उन्हें समझाता, सांत्वना देता। धीरे-धीरे हमारे बीच एक अलग ही तरह की नजदीकी बढ़ने लगी, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था।फिर एक दिन रसोई में काम करते हुए माँ ने मुझे कुछ सामान उठाने के लिए बुलाया। रसोई संकरी थी और जगह कम थी। मैं माँ के पीछे सटकर खड़ा हो गया। अचानक मेरा शरीर उनके शरीर से टकरा गया। मेरा लिंग उनके नितंबों से सट गया और मैं स्तब्ध रह गया। माँ ने पलटकर मेरी तरफ देखा और एक अजीब सी मुस्कान उनके चेहरे पर आ गई।उस मुस्कान ने मेरे अंदर की सारी हिचकिचाहट दूर कर दी। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनके स्तनों के पास रख दिया। एक बार, दो बार मैंने उन्हें हल्के से छुआ। माँ ने कुछ नहीं कहा, न ही मना किया। मेरा लिंग पूरी तरह तन गया था जो उनके नितंबों से दब रहा था। माँ की चुप्पी ने मेरी हिम्मत और बढ़ा दी थी।अगले दिन हमें एक शादी में जाना था। हम दोनों तैयार हो रहे थे। माँ कपड़े बदलने बाथरूम में जाने लगीं तो मैंने कहा, ‘माँ, हम दोनों को ही तैयार होना है, तो आपको बाहर जाने की क्या जरूरत है? यहीं पर चेंज कर लो।’ माँ ने कोई आपत्ति नहीं की और कमरे में ही कपड़े बदलने लगीं।उन्होंने अपने कपड़े उतारे और मेरे सामने नंगी खड़ी हो गईं। मैं उनके सुडौल शरीर को देखकर स्तब्ध रह गया। उनके स्तन भरे हुए थे, कमर पतली और नितंब गोल। माँ ने ब्रा पहननी शुरू की लेकिन हुक लगाने में दिक्कत हो रही थी। ‘मेरा हुक लगा दो,’ उन्होंने कहा। मैं हुक लगाने लगा और लगाते हुए अनजाने में ही उनके स्तनों को आगे से दबा दिया।माँ चौंक गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं। फिर बोलीं, ‘कौन सी साड़ी पहनूं, समझ नहीं आ रहा!’ मैंने कहा, ‘ब्लैक कलर की पहन लो।’ मैंने उन्हें ब्लैक साड़ी निकालकर दी। फिर वह मेरे सामने ही पैंटी बदलने लगीं। मैंने कहा, ‘आप तो बहुत हॉट हो माँ।’ वह बोलीं, ‘हट बदमाश! वैसे, अब तो मैं कुछ भी नहीं लग रही, पहले के मुकाबले।’मैं बोला, ‘माँ अगर आप मेरी वाइफ होतीं तो मैं आपको बहुत खुश रखता।’ वह बोलीं, ‘कैसे?’ मैंने तुरंत उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। माँ ने जरा सा भी विरोध नहीं किया। हम दोनों कुछ देर तक होंठों को चूसते रहे, एक दूसरे की सांसों में खोए हुए। फिर वह अलग होकर बोलीं, ‘इससे काम नहीं चलेगा बेटा!’मैंने उनकी योनि को पैंटी के ऊपर से ही सहलाते हुए कहा, ‘मैं इतने में ही रुकने वाला भी नहीं माँ।’ मैंने तुरंत माँ की ब्रा निकाल दी और उनके स्तनों को नंगा कर दिया। वह नीचे से भी नंगी ही थीं, सिर्फ योनि पर एक पैंटी डाली हुई थी। मैं जोर-जोर से उनके स्तनों को दबाने लगा। माँ आहें भरने लगीं।फिर मैंने मुँह लगाकर माँ के स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। कुछ देर स्तनों को चूसने और योनि को पैंटी के ऊपर से सहलाने के बाद मैंने जल्दी से अपने कपड़े भी उतार फेंके। मैंने झट से माँ की पैंटी खींचकर उनकी टाँगों से अलग कर दी। अब वह पूरी तरह नंगी थीं। हम दोनों बिस्तर पर कूद गए और 69 की पोजीशन ले ली।माँ मेरे लिंग को चूसने लगीं और मैंने उनकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। माँ की योनि पर बहुत काले-घने बाल थे। योनि में पसीना सा लग रहा था या फिर वह योनि का रस था शायद। मैं मजा लेकर योनि को चाट रहा था। माँ भी मेरे लिंग को पूरा मुँह में ले रही थीं। उनके मुँह से गूं…गूं… की आवाज आ रही थी।लिंग पूरा गले तक जा रहा था और मैं चुसाई के मजे में पागल हुआ जा रहा था। माँ को भी योनि चटवाने में पूरा मजा मिल रहा था। वह मेरे मुँह पर बार-बार अपनी योनि को रगड़ रही थीं। पाँच मिनट के बाद माँ की योनि से काफी सारा नमकीन सा रस निकलने लगा। मैं उस रस को चाटता जा रहा था। माँ अब जोर से योनि मेरे मुँह पर दबा रही थीं।फिर आखिर में उन्होंने मुँह से लिंग निकाला और बोलीं, ‘बेटा अब डाल दे, नहीं रुका जा रहा है। बहुत इंतजार किया है मेरी योनि ने लिंग का।’ खुद मैं भी माँ की संभोग के लिए तड़प सा गया था। मैंने उनकी टाँगों को फैलाया और माँ के थूक में गीला हो चुका लिंग उनकी योनि पर रख दिया।मैंने योनि के छेद पर टोपा रखा और एक धक्का दे दिया। माँ की आह निकल गई और मेरा लिंग माँ की योनि में घुसने लगा। मैंने हल्का सा जोर लगाते हुए धक्के देना शुरू किया तो लिंग योनि में अंदर तक राह बनाने लगा। धीरे-धीरे धक्कों के साथ अब लगभग पूरा लिंग योनि में अंदर उतर जा रहा था। फिर मैंने संभोग की गति तेज कर दी।अब माँ की संभोग मैं तेज-तेज धक्कों के साथ कर रहा था। उन्हें भी मजा आने लगा था। वह संभोग के मजे में चिल्ला रही थीं, ‘येस बेटा…आह्ह…और चोद…आह्ह और अंदर डालता जा…आह्ह मजा आ रहा है…ओह्ह।’ मैं भी माँ की ऐसी आवाजों से पूरे जोश में आता जा रहा था। मेरे धक्कों के साथ माँ के स्तन आगे-पीछे हिल रहे थे।लगभग दस मिनट हो चुके थे मुझे माँ की योनि में धक्के लगाते हुए। फिर मेरा वीर्य निकलने को हो गया। मैं बोला, ‘माँ होने वाला है मेरा!’ वह बोलीं, ‘अंदर ही गिरा देना, बहुत दिनों से मैंने योनि में वीर्य नहीं लिया है। मेरी योनि को भर दे बेटा…आह्ह।’ मैंने धक्के और तेज कर दिए। फिर मैं चोदते हुए माँ की योनि में ही झड़ गया।उनकी बालों वाली योनि में मेरा लिंग जड़ तक समाकर पिचकारी मार रहा था। फिर म