मेरा नाम श्वेता है और मैं अठारह वर्ष की हुई हूँ। मेरा शरीर पूरी तरह से विकसित हो चुका है, मेरा फिगर चौंतीस-अट्ठाईस-छत्तीस का है और मेरी गोरी चमकती त्वचा मुझे एक आकर्षक पंजाबन लड़की बनाती है। मेरे परिवार में मेरे माता-पिता और दो भाई हैं। बड़े भाई का नाम रोहन है और मुझसे बड़े भाई का नाम रोहित है। घर में सबसे छोटी और लाडली मैं ही हूँ। मेरा अठारहवां जन्मदिन था और मेरे मन में उत्साह के साथ-साथ एक नई उम्र में कदम रखने का संकोच भी था।
जन्मदिन की रात, हम सब लोग केक काटने के लिए लिविंग रूम में इकट्ठा हुए। मैंने एक हल्की नाइट ड्रेस पहन रखी थी। कमरे की रोशनी मधुर थी और केक पर लगी मोमबत्तियों की लौ हवा में हल्की-हल्की डोल रही थी। मैंने केक के पास जाकर चाकू उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि अचानक पूरे घर की बिजली चली गई। अंधेरा इतना घना था कि हाथ को हाथ सूझ नहीं रहा था।
उसी क्षण, मेरे पैर के पास कुछ तेजी से सरकता हुआ महसूस हुआ, शायद कोई चूहा। मैं एकदम से चौंक गई और संतुलन खोकर पीछे की ओर गिरने लगी। घबराहट में, मैंने संभलने के लिए आसपास कुछ पकड़ने की कोशिश की। मेरा हाथ किसी गर्म और मुलायम, पर सख्त आकार वाली चीज से टकराया। मैंने अनजाने में उसे जोर से पकड़ लिया।
वह स्पर्श अजीब सा था, एक अलग ही तरह की गर्माहट थी उसमें। पल भर में ही मेरे दिमाग में एक चिंगारी सी कौंध गई और मैंने उसे तुरंत छोड़ दिया, जैसे कोई गर्म अंगार छू लिया हो। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कुछ ही सेकंड बाद इन्वर्टर की वजह से लाइट वापस आ गई।
मैंने तेजी से अपने आसपास देखा। मेरे दोनों भाई मेरे बगल में खड़े थे। रोहित और रोहन दोनों के चेहरे पर सामान्य सी मुस्कान थी, जैसे कुछ हुआ ही न हो। किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। मेरे मन में तूफान उठने लगा। क्या मैंने जो पकड़ा, वह वास्तव में वही था जिसका मुझे अंदेशा था? और अगर हां, तो वह किसका था? रोहित का या रोहन का?
मैंने अपना ध्यान वापस केक पर केंद्रित करने की कोशिश की। मैंने चाकू उठाया और केक काटा, पर मेरे हाथ कांप रहे थे। माता-पिता को केक खिलाया, भाइयों ने मुझे खिलाया, पर सब कुछ एक धुंध में हो रहा था। मैं जल्दी से एक मुस्कान बिखेरकर अपने कमरे की ओर भाग गई। मेरा पूरा ध्यान उस एक स्पर्श पर अटका हुआ था।
अपने कमरे में बिस्तर पर लेटकर मैं उस पल को बार-बार याद करने लगी। अंधेरे में वह गर्म, नरम-कठोर आकार… उसके बारे में सोचते ही मेरे रोंगटे खड़े हो जाते और शरीर के भीतर एक अजीब सी गुदगुदी, एक झनझनाहट सी दौड़ने लगती। मुझे नींद नहीं आ रही थी। आखिरकार, सुबह के चार बजे के करीब मुझे नींद आई और मैं दोपहर बारह बजे उठी।
नीचे उतरी तो देखा रोहित अकेला सोफे पर बैठा है। उसे देखते ही मेरे गाल फिर से लाल हो गए। क्या कल रात मैंने उसी को छुआ था? मैं उस वक्त नाइट सूट में थी और बिना ब्रा के। भाई के उस अंग के बारे में सोचते ही मेरे स्तनों में एक अजीब सी कसावट आने लगी, निप्पल सख्त होकर कपड़े के ऊपर से उभरने लगे।
शर्म से मैं फिर से अपने कमरे में लौट आई। मैंने नाइट सूट उतारी और एक चमकदार लाल रंग की रेशमी ब्रा पहनी, जो काफी छोटी और सेक्सी थी। उस पर मैंने एक पतली सी सफेद टी-शर्ट डाली। नीचे हाफ कैप्री पहनी। शीशे में देखा तो टी-शर्ट के पार से ब्रा का लेस साफ दिख रहा था और मेरे भरे हुए स्तन उस छोटी ब्रा से बाहर आने को बेचैन लग रहे थे।
नीचे आकर मैंने रोहित को देखा। वह मुझे देखता रह गया, उसकी नजरें मेरे शरीर के वक्रों पर चिपकी हुई थीं। मैंने पूछा, “क्या देख रहे हो भाई?” वह चौंककर बोला, “अरे कुछ नहीं… बस, तुमने आज कुछ अलग स्टाइल से ड्रेसिंग की है न!” मैंने मन ही मन सोचा, तुम आंखों से मुझे नोच लो, पर मम्मी-पापा को कुछ मत बताना।
रोहित ने बताया कि माता-पिता मेरी पार्टी की तैयारी के लिए बाजार गए हैं। मेरे मन में एक साहसिक विचार कौंधा। मैंने अपने कमरे में जाकर सारे कपड़े उतारे, स्नान किया और एक तौलिए में लिपटकर दरवाजे के पास जाकर गिरने का नाटक किया। मैंने कराहते हुए आवाज लगाई, “आह… रोहित भाई… प्लीज आओ ना, मैं गिर गई!”
रोहित तेजी से दौड़ा आया। उसने मुझे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया। उसके हाथों की पकड़ में एक अद्भुत मर्दाना ताकत थी। उसने मेरी जांघों और कमर को पकड़कर मुझे बिस्तर की ओर उठाया। जैसे ही उसने मुझे बिस्तर पर रखा, मैंने जानबूझकर तौलिया छोड़ दिया। मेरे नग्न स्तन उसकी नजरों के सामने आ गए।
वह स्तब्ध रह गया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने कहा, “तुम समझ गए न भाई, मैं क्या चाहती हूँ। मेरा यही बर्थडे गिफ्ट होगा… प्लीज!” रोहित ने कहा, “पर तुम काफी छोटी हो…” मैंने अपनी जांघों से तौलिया हटा दिया और अपनी नंगी योनि उसकी ओर कर दी।
रोहित ने मेरी चिकनी त्वचा की ओर देखा और फुसफुसाया, “तुम बहुत खूबसूरत हो… जैसे किसी गुड़िया में रस भर दिया हो।” मैंने उठते हुए कहा, “तो पी लो ना वह रस… किसी को पता भी नहीं चलेगा।” उसने मुझे वापस बिस्तर पर लिटा दिया।
उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले लिया। एक अद्भुत विद्युत सी मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैंने उसकी पैंट उतार दी। सामने साढ़े सात इंच का एक शक्तिशाली लिंग था। मैंने उसे पकड़ा और मुंह में ले लिया। वह मेरा सिर पकड़कर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
फिर उसने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मेरी योनि उसके लिंग को छू रही थी और मेरे स्तन उसकी छाती से रगड़ खा रहे थे। उसने मेरे नितंबों पर एक थप्पड़ मारा और मेरे होंठों को चूम लिया। मैंने उससे विनती की, “प्लीज अब अंदर भी डाल दो ना!”
उसने मेरी योनि पर थूक लगाया और धीरे से अपना लिंग अंदर करना शुरू किया। पहले तो तेज दर्द हुआ, मैं चीखने लगी। पर उसने मेरा मुंह पकड़ लिया और एक जोरदार झटके में पूरा लिंग अंदर धकेल दिया। दर्द धीरे-धीरे एक अजीब सी मधुर पीड़ा में बदलने लगा।
वह लगातार अंदर-बाहर करता रहा। मैं उसकी गोद में बैठी थी और उसका लिंग मेरे भीतर था। उसने मेरे नितंबों पर फिर थप्पड़ मारा और पूछा, “कैसा लग रहा है?” मैं हांफते हुए बोली, “वाह… पहली बार इतना अच्छा बर्थडे जा रहा है!”
तभी अचानक दरवाजे पर खटखटाहट हुई। दरवाजा खुल गया और मेरे बड़े भाई रोहन अंदर आ गए। वह हम दोनों को उस अंतरंग मुद्रा में देखकर स्तब्ध रह गया। उसके मुंह से अचानक निकल पड़ा, “पकड़ा तो तूने मेरा था, और शुरुआत इसने कर दी!” अब आगे क्या होगा? क्या मैं दोनों भाइयों के साथ इस रिश्ते में बंधूंगी? यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।