अवनी की कुंवारी चूत से गांड तक का कामुक सफर

मेरी भतीजी की सहेली अवनी की कुंवारी चूत का उद्घाटन करने के बाद, मेरे मन में उसकी गांड को अपने कब्जे में लेने की इच्छा और तेज हो गई थी। वह पल अब भी मेरी आँखों के सामने तैरता रहता था, जब मेरा लंड उसकी तंग और गर्म चूत में पहली बार घुसा था। उसकी चीख और फिर आनंद से भरी सिसकारियाँ मेरे कानों में गूँज रही थीं। अब मेरी नजर उसके उभरे हुए, गोल-मटोल चूतड़ों पर टिकी थी, जो उसकी टाइट जींस के अंदर से मुझे ललचा रहे थे। मैं उसे धीरे-धीरे अपने जाल में फँसा रहा था, उससे सेक्सी बातें करके, उसकी इच्छाओं को हवा देकर, ताकि वह खुद ही मेरे सामने अपनी गांड परोस दे।

मैंने धीरे से अपना हाथ उसके टॉप के अंदर सरकाया और उसके नरम स्तनों को थाम लिया। मेरी उँगलियों के स्पर्श से ही उसके निप्पल कड़क होकर नुकीले हो गए, जैसे छोटे-छोटे कंटक। मैंने अपनी एक उँगली अपने मुँह में डालकर थूक से गीली की और फिर उसे अवनी के होंठों पर रख दिया। उसने बिना हिचकिचाहट के उस उँगली को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी, उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं। मैंने उससे पूछा, “अवनी, सच-सच बताओ, क्या तुम्हारी चूत में कुछ हो रहा है?” अवनी ने मेरी उँगली मुँह से निकाली, एक पैर चेयर पर रखा और दूसरा फैलाते हुए, अपनी उँगली थॉन्ग के ऊपर से अपनी चूत पर फिराने लगी। “देखो ना चाचू,” उसने कामुक स्वर में कहा, “मेरा थॉन्ग तो पूरा गीला हो चुका है!”

मैंने अपना हाथ उसकी टाँगों के बीच ले जाकर थॉन्ग को साइड में किया और उसकी चूत को नंगा कर दिया। जैसे ही मैंने उसके चिकने, गुलाबी होंठों के बीच उँगली फिराई, अवनी ने अपना सिर पीछे झुकाते हुए एक लंबी सिसकारी भरी। “आह चाचू!” उसकी आवाज़ में आनंद और वेदना का मिला-जुला स्वर था। मेरी उँगली उसके गर्म और चिकने पानी से तरबतर हो गई। मैंने वही उँगली दोबारा उसके मुँह के पास ले जाई तो उसने उसे चूसकर साफ कर दिया, उसकी जीभ का स्पर्श बिजली की तरह मेरी रीढ़ में दौड़ गया। अवनी में सेक्स की आग भड़कते देख मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा, मेरी पैंट तन गई।

मैंने अवनी को खींचकर उसका थॉन्ग पूरी तरह उतार दिया और उसे अपनी गोद में बिठा लिया। वह अपने भारी, मुलायम चूतड़ों को मेरे घुटनों पर टिकाकर मेरी तरफ मुँह करके बैठी थी। उसकी गर्म और नम चूत मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरे लंड से सटी हुई थी, और उसके भारी स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके दोनों चूतड़ों को अपनी हथेलियों में कसकर पकड़ा और अपना मुँह उसकी गर्दन और कंधों पर रगड़ने लगा, उसके शरीर की गर्माहट और खुशबू मेरे अंदर एक जंगली उत्तेजना भर रही थी। पर अवनी ने मुझे रोकते हुए मेरा चेहरा ऊपर उठाया और अपने होंठ मेरे होंठों पर जमा दिए। हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूसने लगे।

मेरे हाथ अवनी के चूतड़ों को मसल रहे थे, उनकी मुलायमता मेरी उँगलियों में समा रही थी। बीच-बीच में मैं उसके गोल चूतड़ों पर हल्के थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे वह और अधिक उत्तेजित हो उठती। अवनी पूरे कामुक अंदाज़ में मेरी बाँहों में झूल रही थी, उसके मुँह से लगातार गहरी सिसकारियाँ और छोटे-छोटे आह निकल रहे थे। बहुत देर तक चुंबन के बाद अवनी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लेकर, अपना माथा मेरे माथे से टिकाते हुए फुसफुसाया, “आह चाचू… मेरी चूत में चींटियाँ रेंग रही हैं… उफ्फ, कुछ करो ना!” उसकी आवाज़ में एक बेचैन इच्छा थी।

मैंने अवनी के चूतड़ के नीचे से हाथ निकालकर अपनी दो उँगलियाँ थूक से गीली कीं और उसके चूतड़ों के बीच से होकर उसकी गांड के छोटे से गुलाबी छेद को टटोला। फिर एक उँगली को धीरे से उसकी गांड में सरका दिया। अवनी ने “आह उम्मम्म चाचू!” करते हुए अपनी गांड पीछे की ओर उभार दी और एक हाथ से अपने स्तन का निप्पल पकड़कर मेरे मुँह में डाल दिया। मैं उसके कड़क निप्पल को चूसते हुए उसकी गांड में उँगली अंदर-बाहर करने लगा। अवनी बिन पानी की मछली की तरह मेरी बाँहों में तड़प रही थी, उसका शरीर पसीने से तरबतर हो गया था।

मैंने उसे होश में लाने के लिए उसके निप्पल को दाँतों से हल्का सा काटा तो उसने “आउच!” कहते हुए मेरे मुँह से निप्पल खींच लिया और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी। मैंने उसकी गांड में उँगली करते हुए कहा, “बड़ी गरमी है कुतिया तेरे अंदर!” अवनी ने अंगड़ाई लेते हुए जवाब दिया, “तो निकाल दो ना अपनी इस कुतिया की गरमी! मना कौन कर रहा है!” उसकी बातों ने मेरे अंदर के जानवर को जगा दिया। मैंने कहा, “तुम जैसी कम उम्र की लड़कियाँ मुझे इसीलिए पसंद हैं, क्योंकि तुममें चुदाई की आग भड़कती है तो तुम खुद ही टाँगें फैला देती हो!”

अवनी सिसकते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ती रही, “आह मेरी जान… उफ्फ कितना मस्त लंड है आपका… एकदम गरम लोहा है… इसे मेरी गरम भट्टी में डाल दो ना!” वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूब चुकी थी। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर ले आया और उसे लिटाकर उसकी टाँगें फैला दीं। अवनी ने अपनी चूत के दाने को मसलते हुए मेरी आँखों में देखा, “चाचू, लुक एट माई पुसी! कैसी लगी ये आपको?” मैंने अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए कहा, “बहुत सुंदर! आज तक जितनी भी चूत मारी हैं, सबसे सुंदर चूत है तुम्हारी!” अवनी खुश होकर बोली, “सच्ची चाचू?” मैंने कहा, “हाँ, सबसे सुंदर!”

अवनी ने फिर पूछा, “क्या श्रेया से भी सुंदर?” मैंने जान-बूझकर कहा, “श्रेया की चूत तो कुछ भी नहीं तुम्हारी चूत के सामने!” यह सुनकर अवनी ने खुश होते हुए अपने घुटनों के पीछे से दोनों टाँगें पकड़कर ऊपर उठा लीं और मुस्कुराते हुए बोली, “कम ऑन चाचू! प्लीज प्यार करो ना मेरी चूत को!” मैं बेड पर चढ़कर बैठ गया और उँगली से बहुत सारा थूक लेकर उसकी गांड के छेद के आसपास फिराने लगा। अवनी के दोनों छेद देखकर मेरा लंड बेकाबू हो चुका था। मैंने अवनी की चूत के पास मुँह ले जाकर उसकी चूत पर भी थूका और उँगली चूत के होंठों में फिराने लगा। अवनी हवस की आग से बुरी तरह काँप रही थी। उसने सिसकारते हुए कहा, “आई मम्मी! आह, कुछ करो! मेरे अंदर कुछ हो रहा है!”

मैंने उसकी हालत देखकर धीरे से उँगली उसकी चूत में सरका दी। उँगली अंदर जाते ही अवनी “आह चाचू, दुखता है!” बोलते हुए उछलकर बैठ गई और बोली, “नहीं चाचू, रहने दो! मैं नहीं कर पाऊँगी! शायद आपके लंड से मेरी चूत अंदर से छिल चुकी है!” मैंने अवनी को बाँहों में लेकर प्यार से कहा, “अरे मेरी प्यारी बच्ची! कोई बात नहीं जान, अगर तुम नहीं चुदवा सकती तो कोई बात नहीं!” अवनी ने भोला चेहरा बनाकर कहा, “चाचू, दिल तो बहुत है, पर मैं उँगली तो डलवा नहीं पा रही! आपका लंड कैसे ले लूँगी?” मैंने कहा, “कोई बात नहीं! चल, तुझे लंड बिना अंदर डाले जन्नत की सैर करवाता हूँ!” अवनी मेरी आँखों में देखकर बोली, “वो कैसे चाचू?” मैंने उसे आँख मारकर जीभ बाहर निकालकर चाटने का इशारा किया।

वह मुस्कुराकर पास में रखा तकिया खींचकर अपनी गांड के नीचे लगा कर लेट गई और टाँगें फैलाकर बोली, “आह प्लीज आओ चाचू! आह, लिक माई कंट प्लीज!” मैंने अवनी के ऊपर झुककर उसके होंठ चूमे और कहा, “अवनी, मैं तो तेरी चूत का पानी निकाल दूँगा, पर मेरे खड़े लंड का क्या होगा?” अवनी झट से बोली, “श्रेया आने वाली है ना! आप उस कुतिया की गांड में डाल लेना!” मैंने कहा, “नहीं अवनी! मेरे लंड का उसूल है – ये उसी की चूत और गांड में जाता है जो इसे खड़ा करती है!” फिर मैंने कहा, “तुम्हें पता है, अगर श्रेया होती तो बिना कुछ सोचे मेरे सामने अपनी गांड परोस देती! क्या तुम अपने चाचू को ऐसे प्यासा छोड़ दोगी?” मेरा तीर निशाने पर लगा।

अवनी बोली, “नहीं चाचू! मैं भी आपको प्यासा नहीं छोड़ सकती! पर क्या करूँ, आपका लंड कोई मामूली लंड नहीं जिसे गांड में डलवाया जा सके!” मैंने थोड़ा गुस्सा होते हुए क

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