खामोश मोहब्बत का एक खत
मुझे नहीं पता था कि प्यार क्या होता है, जब तक मैंने तुम्हें मुहर्रम में नहीं देखा था. उस पल मेरे दिल में कुछ हुआ, और पहली नज़र में ही तुम मुझे अच्छी लगने लगीं. उस समय मैं सोचता था कि तुमसे बात कैसे करूँ, मेरे पास न कोई नंबर था न कोई पता. दोस्तों … Read more