पहचान का सफर

पटना से फतुहा की अपनी +2 परीक्षा यात्रा के पहले दिन ही आदित्य की नज़र ट्रेन की एक बोगी में बैठी एक लड़की पर पड़ी। उसके हाथ में प्रवेश पत्र देखकर आदित्य समझ गया कि वह भी परीक्षा देने जा रही है। लड़की इतनी सुंदर थी कि आदित्य बस उसे देखता ही रह गया। वह … Read more

अपनी भाषा का जादू

संजीव और पंकज, गोरखपुर के गहरे दोस्त, अपनी उच्च शिक्षा के लिए बैंगलोर चले गए। उनकी मातृभाषा भोजपुरी थी, हालांकि वे थोड़ी हिंदी बोल लेते थे, जिसमें अक्सर भोजपुरी का पुट होता था। कन्नड़ बहुल बैंगलोर शहर ने उन्हें तुरंत एक चुनौती पेश की। शुरुआत में, कुछ भी समझ पाना मुश्किल था। जबकि कुछ लोग … Read more

महत्वाकांक्षा और प्रेम

पंकज स्वभाव से बेहद किताबी कीड़ा था। उसे बाहरी दुनिया या सामाजिक मेलजोल में कोई खास रुचि नहीं थी। उसका अपना एक छोटा सा संसार था, जो किताबों से भरा था। जब उसके पिताजी का तबादला इंदौर हुआ और वे एक पॉश मोहल्ले में फ्लैट लेकर रहने लगे, तो पंकज अपने परिवार के साथ नए … Read more

किताबी कीड़ा और स्कूटी वाली लड़की का पीछा

मिर्जापुर का संजीव एक गहन किताबी कीड़ा था। उसकी दुनिया किताबों से शुरू होकर किताबों में ही समाप्त होती थी। पाठ्यपुस्तकों के अलावा भी वह बहुत कुछ पढ़ता था, लेकिन अत्यधिक ज्ञान भी कभी-कभी बोझ बन जाता है। संजीव के साथ भी यही हुआ। दुनिया से बेखबर, वह किताबों में इतना खो गया कि अचानक … Read more

फिर से मोहब्बत

रोहन और प्रिया बचपन के दोस्त थे, जिनके दिलों में एक-दूसरे के लिए खास जगह थी। उनके खेल-कूद, हंसी-मजाक और छोटे-छोटे झगड़े धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गए। समय के साथ, ज़िम्मेदारियों और दूरियों ने उन्हें अलग कर दिया, लेकिन उनकी यादें उनके साथ रहीं। वर्षों बाद, जब नियति ने उन्हें एक छोटे से कैफे … Read more

बदलते रिश्ते और एक माँ की अंतिम इच्छा

सोहन के पिता, जो एक बैंक में प्रबंधक थे, का तबादला गोरखपुर हो गया। यह सोहन की माँ का नानी का गाँव भी था, इसलिए उन्हें वहाँ जाने में कोई परेशानी नहीं हुई। सोहन की माँ ने पहले ही रिश्तेदारों की मदद से एक अच्छा फ्लैट किराए पर ले लिया था। सोहन दिल्ली में एक … Read more

अनकही मोहब्बत

संतोष के पिता बैंक में कार्यरत थे और उनका तबादला हर तीन साल में होता था। संतोष ने अपना बचपन भोपाल में बिताया था, क्योंकि उनके पिता का स्थानांतरण आसपास के ही शहरों में होता था, इसलिए परिवार को भोपाल में ही रहने दिया जाता था। जब संतोष बड़े हुए और अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी … Read more

दिव्या की दुविधा

भोपाल की दिव्या पढ़ाई में बहुत होशियार थी, लेकिन परिवार की मजबूरियों के कारण वह महानगरों में जाने का अपना सपना पूरा नहीं कर पाई। पिता ने लड़की होने की वजह से उसे भोपाल से बाहर नहीं जाने दिया, इसलिए उसने वहीं रहकर बी.एड. करना शुरू किया। इसी दौरान उसकी मुलाकात अमित से हुई, जो … Read more

संस्कृति का संगम

सतविंदर अपने कामों को जल्दी-जल्दी निपटा कर घर से निकलने ही वाला था कि केट ने पूछा, “अभी से?” सतविंदर जोश से भरा हुआ था क्योंकि उसके माता-पिता, बीजी और दारजी, पूरे 21 साल बाद लंदन आ रहे थे। एयरपोर्ट पहुँचने में दो घंटे लगने थे, इसलिए वह बेताब था। पास बैठे अनीटा और सुनीयल … Read more

एकतरफा प्यार का अनकहा अफ़साना

प्रिय रानी, जब मैंने तुम्हें मुहर्रम के दौरान पहली बार देखा, तो मुझे लगा जैसे मेरे दिल में कुछ ख़ास हुआ हो। पहली ही नज़र में तुम मुझे इतनी अच्छी लगीं कि मैं तुमसे बात करने के बहाने ढूंढने लगा। न कोई फ़ोन नंबर था, न पता, बस दोस्तों से तुम्हारा नाम और थोड़ी जानकारी … Read more