होली की रंगीन रात: तीन दोस्तों और उनकी पत्नियों का खुला खेल
सुबह के दस बजे थे जब मेरे दो पक्के दोस्त, पीयूष और केशव, अपनी पत्नियों के साथ मेरे घर होली खेलने पहुँचे। उनके आते ही पूरा घर खिलखिलाहट और उल्लास से भर गया। हवा में गुलाल की महक तैर रही थी और सूरज की किरणें खिड़कियों से झांकती हुई रंगों को और चमकदार बना रही … Read more