चंडीगढ़ के एक आलीशान अपार्टमेंट में हवा गर्म और भारी थी, जैसे कोई तूफ़ान आने वाला हो। अवनी, एक जवान और आकर्षक लड़की, अपने चाचा के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। उसके मन में उत्सुकता और वासना का एक अजीब मिश्रण था। वह जानती थी कि आज का दिन उसके लिए साधारण नहीं होगा। उसकी सहेली श्रेया भी वहाँ मौजूद थी, एक कैमरा हाथ में लिए, इस अजीबोगरीब मुलाकात को कैद करने के लिए तैयार। कमरे में खुशबू और तनाव दोनों ही महसूस किए जा सकते थे।
चाचा के आते ही माहौल और गर्म हो गया। अवनी की आँखों में एक विशेष चमक थी, जैसे वह किसी लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करने के कगार पर हो। उसने हल्के से अपना टॉप समेटा, अपने उभार को और स्पष्ट करते हुए। चाचा ने उसकी ओर देखा, उसकी नज़रों में अनुमति और उत्सुकता दोनों थी। श्रेया ने कैमरा चालू किया, इस अंतरंग क्षण के दस्तावेज़ीकरण की तैयारी में। सब कुछ शांत था, केवल कैमरे के हल्के भनभनाहट की आवाज़ हवा में तैर रही थी।
चाचा ने धीरे से अवनी के पास जाकर उसके टॉप के ऊपर से उसकी कोमल चुची को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लिया। एक हल्का दबाव डाला। अवनी ने एक झटके के साथ आह भरी, “आऊ! आउच! क्या कर रहे हो जीजू!” उसकी आवाज़ में दर्द नहीं, बल्कि उत्तेजना का एक सुरीला स्वर था। चाचा मुस्कुराया, “कुछ नहीं! बस देख रहा था तुम्हारे कबूतर कितना उड़ सकते हैं!” उसकी आवाज़ में एक शरारतीपन था।
अवनी ने शरारत से अपनी आँखें झपकाई और अपनी चुचियों को और उभारकर चाचा की छाती से सटा दिया। उसकी गर्माहट महसूस हो रही थी। “जीजू! ये उड़ तो बहुत सकते हैं, पर कोई इनको प्यार से उड़ाने वाला चाहिए!” उसने फुसफुसाते हुए कहा। जैसे ही चाचा ने उन्हें पकड़ना चाहा, अवनी हँसकर लहराते हुए दूर हो गई। “जीजू! आप दोनों फिल्म स्टार्ट कीजिए, मैं रिकॉर्ड करती हूँ!” उसने कहा, और श्रेया की ओर इशारा किया।
चाचा ने श्रेया के लंबे, रेशमी बालों को अपनी मुट्ठी में लिया और धीरे से खींचा। श्रेया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि एक कुतिया की तरह दोनों घुटनों और कुहनियों के बल चलते हुए सोफे की ओर बढ़ने लगी। उसकी हरकतें लचीली और आकर्षक थीं। चाचा का लंड पहले से ही कड़ा होकर छत की ओर मुँह उठाए हुए था, एक शक्तिशाली उपस्थिति की तरह। कमरे में हवा और गाढ़ी हो गई।
श्रेया सोफे के पास पहुँची। उसने पहले एक कुहनी को सोफे पर टिकाया, फिर दूसरी को, और धीरे से सोफे पर चढ़ गई। फिर, अपनी गोल गांड को हवा में उछालते हुए, वह अपने चूतड़ मटकाने लगी। उसकी गति लयबद्ध और आमंत्रित करने वाली थी। उसके चूतड़ खुल और बंद हो रहे थे, और हर बार खुलने पर उसकी भीगी हुई चूत के गुलाबी होंठ दिखाई देते, जो बार-बार एक-दूसरे को चूमते प्रतीत होते थे। यह दृश्य अत्यंत कामुक था।
चाचा ने आगे बढ़कर श्रेया के दोनों चूतड़ अपने हाथों में कसे। उनकी गर्माहट और कोमलता उसकी हथेलियों को भर रही थी। उसने ज़ोर से उन्हें फैलाया, श्रेया की चूत के पूरे दृश्य को उजागर किया। फिर, वह झुका और अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। स्वाद एक मिश्रण था – उसके कामरस की मिठास और प्राकृतिक गंध। श्रेया ने एक गहरी साँस ली, उसकी पीठ में एक हल्का कंपन दौड़ गया।
थोड़ी देर चाटने के बाद, चाचा ने अपनी स्थिति बदली। उसने श्रेया की चूत के छेद पर अपने कड़े लंड का सिरा रखा। फिर, अवनी की ओर मुड़कर बोला, “देख अवनी! इस रण्डी की चूत में मेरा फौलादी लण्ड कैसे जाता है!” अवनी, कैमरा लिए, करीब आ गई। उसकी आँखें चौड़ी थीं, इस मिलन को रिकॉर्ड करने के लिए पूरी तरह केंद्रित। उसकी साँसें तेज़ थीं।
चाचा ने एक हाथ श्रेया की कमर पर रखा, उसे कसकर पकड़ा। फिर, अपनी कमर से दबाव देते हुए, उसने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर सरकाना शुरू किया। श्रेया की चूत तंग थी, और लंड का सिरा अंदर जाते ही उसने एक तीखी आह भरी। “ओह डैडी! इट्स टू मच बिग! आह! प्लीज़ डैडी थोड़ा धीरे करना!” उसकी आवाज़ में दर्द और आनंद का मिश्रण था। चाचा ने उसके एक चूतड़ पर ज़ोर से हाथ मारा, एक तेज़ आवाज़ के साथ, और अपनी कमर को एक झटके से आगे बढ़ाया। लंड आधे से ज़्यादा अंदर घुस गया। श्रेया चीखी, “आई मम्मी!”
अवनी उत्तेजना से चहक उठी। “वाउ जीजू! गया! घुस गया! ओह माई गॉड! श्रेया की तो आज फट गई!” उसने कहा। फिर, वह और करीब आई, और एक हाथ से चाचा के लंड को पकड़कर नापने लगी, जो अभी भी आधा बाहर था। “बस श्रेया! थोड़ा सा और रह गया!” उसने उत्साहित होकर कहा। फिर, अवनी ने एक अप्रत्याशित हरकत की। वह झुकी, और श्रेया की गांड के छेद के पास बहुत सारा थूक दिया। गाढ़ा थूक बहकर चाचा के लंड पर इकट्ठा होने लगा।
अवनी ने अपनी कोमल अंगुलियों से उस थूक को चाचा के लंड पर चुपड़ दिया, एक चिकनाई का काम करते हुए। फिर, वह चाचा की आँखों में देखते हुए बोली, “जीजू! बस एक और स्ट्रोक मारो ज़ोर से! देखना पूरा अंदर चला जाएगा!” उसकी अंगुलियों का स्पर्श विद्युत् सा था। चाचा के अंदर का जानवर जाग उठा। उसने एक हाथ से श्रेया की कमर को और कसकर जकड़ा, दूसरे हाथ से उसके बाल पकड़े, और अपनी एक टाँग को श्रेया के घुटने से आगे रखकर जमकर एक शक्तिशाली धक्का दिया। पूरा लंड सरसराता हुआ श्रेया की गहराई में, उसकी बच्चेदानी की जड़ तक पहुँच गया।
श्रेया ने ज़ोर से आह मारी, “बहनचोद! कुत्ते!” उसने अपनी गांड को भींचते हुए कमर को ऊपर उठाने की कोशिश की, पर चाचा ने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखकर ज़ोर से नीचे दबा दिया। श्रेया के चूतड़ वापिस खुल गए, और चाचा बिना रुके तेज़ गति से अपना लंड उसकी चूत के अंदर-बाहर करने लगा। फच-फच की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं, एक कामुक लय बनाते हुए। श्रेया ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी, उसकी आवाज़ में आनंद और आत्मसमर्पण का भाव था।
अवनी, अभी भी कैमरा लिए, उत्साहित होकर बोली, “वाउ जीजू! कितना सुंदर लग रहा है आपका फौलादी लण्ड इसकी छोटी सी चूत के अंदर-बाहर होता हुआ! उफ्फ़ जीजू! पूरा बाहर तक लाकर फिर अंदर डालो!” चाचा अवनी की बात मानते हुए, अपनी गति को और नाटकीय बनाने लगा, कभी पूरा बाहर निकालकर, तो कभी पूरा अंदर धकेलकर। श्रेया एक हाथ से अपनी चुची को टॉप के ऊपर से सहलाने लगी, वीडियो बनाने के इस अनोखे अनुभव में पूरी तरह लीन।
थोड़ी देर बाद, चाचा ने श्रेया को गोद में उठा लिया और खड़ा हो गया। श्रेया की पीठ उसकी छाती से चिपकी हुई थी, उसके दोनों पैर एड़ियों के पास से चाचा के हाथों में कसे हुए थे। वह हवा में झूल रही थी, एक निरीह गुड़िया की तरह। चाचा ने अवनी से कहा, “देख! इस कुतिया की चूत में मेरा लण्ड अंदर-बाहर होते हुए!” अवनी ने कैमरे को जूम करते हुए कहा, “ओह जीजू! श्रेया तो आपकी बाहों में ऐसे लग रही है जैसे छोटी कुतिया किसी बड़े सांड की बाहों में हो! और आपका गधे के लण्ड जैसा लण्ड कैसे इसकी चूत में फँसा हुआ है! वाउ! मज़ा आ गया!”
श्रेया ने अवनी की ओर थूकते हुए जवाब दिया, “रुक साली रण्डी! इसी लण्ड से तेरी गांड ना फड़वाई तो मेरा नाम श्रेया नहीं!” अवनी हँसते हुए बोली, “साली! पहले तू अपनी चूत के बारे में सोच! आज जीजू इसका भोसड़ा बना देंगे!” चाचा इन बातों को अनसुना करते हुए, श्रेया की चूत में और ज़ोर से धक्के मारने लगा। श्रेया उसकी मजबूत बाहों में बिल्कुल असहाय सी झूल रही थी, “आह! ओह! उफ्फ़ डैडी!” उसकी हर आह कामुकता से भरी थी।
थोड़ी देर बाद, अवनी बोली, “जीजू! अब पोज़ीशन चेंज करो!” चाचा ने तुरंत श्रेया को नीचे छोड़ दिया। वह गिरते-गिरते बची, पर अचानक छोड़े जाने से उसकी चूत में एक तीखा दर्द उठा, क्योंकि लंड बाहर आते समय उसकी गांड के छेद की तरफ बुरी तरह दबाव दे गया। श्रेया बोली, “आई आह मम्मी!” और रोने जैसा मुँह बनाकर, अपनी चूत को दोनों हथेलियों से कसकर पकड़कर सिसकने लगी। चाचा ने उसके मुँह पर थूकते हुए कहा, “साली रण्डी! चल बेड पर! ये तो ट्रेलर ही है! अभी तो अव