बाहरी दुनिया के लिए मैं एक सामान्य टॉप की भूमिका निभाता हूँ, लेकिन मेरे भीतर एक गहरा सच छिपा है। मैं एक ऐसा गांडू बॉटम हूँ जो लंड के प्रति अपार प्रेम और समर्पण महसूस करता है। मेरी आत्मा की गहराइयों से एक इच्छा उठती रहती है, एक ऐसी तमन्ना जो मुझे रातों में जगाए रखती है। मैं चाहता हूँ कि एक साथ दो लंडों का अनुभव करूँ, एक मेरी गांड की गहराइयों में समाया हुआ और दूसरा मेरे मुंह की नमी में डूबा हुआ। यह विचार मेरे मन में इतना बलवान हो गया कि मैंने इसे पूरा करने का निश्चय किया। ऑनलाइन दुनिया की गलियों में मैंने एक उपयुक्त टॉप की तलाश शुरू कर दी, एक ऐसा साथी जो मेरी इस जटिल इच्छा को समझ सके।
चार लंबे वर्षों तक पुणे में नौकरी करने के बाद, मैं अपने पैतृक शहर लौट आया था। पुणे का जीवन व्यस्तता और काम के दबाव से भरा था, जहाँ सेक्सुअल इच्छाओं के लिए कोई जगह नहीं बची थी। लेकिन अपने शहर की परिचित गलियों में कदम रखते ही, कॉलेज के दिनों की यादें ताज़ा हो उठीं। उन दिनों की बातें याद आने लगीं, जब मैं अपने एक करीबी दोस्त को खुश करने के लिए उसका लंड चूसा करता था। उसकी आँखों में छलकती संतुष्टि और उसके होंठों से निकलती हल्की कराह मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम थी। शहर लौटने के महज एक महीने के भीतर ही मैंने दो बार अपनी गांड मरवाई, लेकिन फिर भी एक अधूरापन सा रह गया था।
धीरे-धीरे मेरे मन में एक नई और साहसिक ख्वाहिश ने जन्म लिया। क्यों न एक साथ दो लंडों का आनंद लिया जाए? यह विचार मेरे दिमाग में एक जुनून की तरह घर कर गया। मैंने इस इच्छा को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया। सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर मैंने एक ऐसे टॉप की तलाश शुरू की जो न केवल शारीरिक रूप से मेरी पसंद के अनुरूप हो, बल्कि गोपनीयता और सुरक्षा का भी ध्यान रखे। मेरी शर्तें स्पष्ट थीं: उसके पास अपनी निजी जगह हो, वह मेरे घर से कम से कम बीस किलोमीटर दूर रहता हो, उसका लंड बड़ा हो, और माहौल पूरी तरह सुरक्षित हो।
कई दिनों की मेहनत और बातचीत के बाद आखिरकार मुझे एक उपयुक्त व्यक्ति मिला। उसका नाम मनोज था। जब मैंने उसे अपनी अजीबोगरीब इच्छा के बारे में बताया, तो उसकी प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक रूप से सहज थी। उसने कहा, “पहले हम दोनों आपस में मज़ा लेते हैं। फिर बाद में देखते हैं, किसी और को भी साथ ले लेंगे!” यह सुनकर मेरे मन में एक उम्मीद की किरण जगी। मनोज ने यह भी बताया कि उसका लंड आठ इंच से भी बड़ा है। मैंने सोचा, जो मिल गया, वही सही है, और मैं बाइक पर सवार होकर उसके घर की ओर चल पड़ा।
मनोज का घर एक शांत इलाके में था। वह स्वयं बहुत शांत और संयमित स्वभाव का लग रहा था। उम्र लगभग बाईस साल। उसने मेरा स्वागत किया और चाय पीने का आग्रह किया। लेकिन मेरे अंदर का उत्साह और इंतज़ार मुझे बेचैन किए जा रहा था। मैंने विनम्रता से मना करते हुए कहा, “मैं अब बस लंड ही लूँगा!” मेरी इस सीधी बात पर वह खिलखिलाकर हँस पड़ा और बोला, “इतनी भी क्या जल्दी है? आ, पहले आराम से बैठ जा।” मैं सोफे पर बैठ गया, जबकि मनोज एक कुर्सी पर टाँगें फैलाकर बैठ गया। मेरी नज़रें बार-बार उसकी पैंट के बटन की ओर भटक रही थीं, जबकि वह अपने फोन में व्यस्त था।
थोड़ी देर बाद मनोज का फोन बजा। उसने कॉल रिसीव की और बातचीत शुरू की। “क्यों भाई, रोहन, कैसा है?” फोन के दूसरी ओर से आवाज़ आई, “मजे में हूँ, भाई!” मनोज ने कहा, “अबे, मेरे घर आता क्या? एक मस्त लड़का है यहाँ, बड़ी गांड वाला। उसको चोदना है!” रोहन ने जवाब दिया, “अरे यार, मैं तो अभी मार्केट में फँसा हुआ हूँ!” मनोज ने कहा, “ठीक है, चल बाद में बात करते हैं!” कॉल खत्म होते ही मैंने उत्सुकता से पूछा, “भाई, ये कौन था?” मनोज ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुझे दो लंड चाहिए थे न? इसलिए एक दोस्त को बुला रहा था!” दो लंडों का ज़िक्र सुनते ही मेरे मन में खुशी के लड्डू फूटने लगे। मेरी तमन्ना पूरी होने का रास्ता साफ दिख रहा था।
मनोज ने फिर से अपना फोन उठाया और एक और नंबर डायल किया। “हैलो गोपाल, तू फ्री है क्या अभी?” फोन के दूसरे छोर से आवाज़ आई, “नहीं यार, काम में हूँ। क्यों, क्या हुआ?” मनोज ने समझाया, “अरे, एक मस्त रंडी टाइप लड़का मेरे घर आया है। वो बोल रहा है, उसे दो लंड चाहिए। पर तू फ्री नहीं है!” गोपाल ने एक सुझाव दिया, “एक काम कर, उसकी गांड की फोटो भेज मुझे। पसंद आया, तो आ जाऊँगा!” मनोज ने कॉल काटी और मेरी ओर मुड़कर कहा, “चल बेटा, पैंट उतार के डॉगी पोज़ में आ। जरा गांड ऊपर उठा!” मैंने उसके निर्देशों का पालन किया, लेकिन एक शर्त रखी। “पर फोटो में मेरा चेहरा नहीं आना चाहिए। फोटो खींचने के बाद मुझे दिखा। अगर चेहरा नहीं है, तभी आगे भेजना!” मनोज ने हामी भरी, फोटो खींची, और उसे गोपाल को भेज दिया। इसके बाद, मैं फिर से मनोज के लंड को अपने मुंह में लेने में व्यस्त हो गया।
कुछ ही देर बाद दरवाज़े की घंटी बजी। गोपाल आ गया था। वह देखने में काफी हैंडसम और आत्मविश्वास से भरा हुआ लग रहा था। मैंने स्पष्ट कहा, “मुझे सिर्फ बड़े लंड पसंद हैं!” मेरी इस बात पर दोनों एक-दूसरे की ओर देखकर हँस पड़े। मनोज ने गोपाल से कहा, “गोपाल, इस रंडी को लंड दिखा, भाई!” गोपाल ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पैंट उतारी और बेड पर लेट गया। उसका लंड तनकर खड़ा था, जो आठ इंच से भी अधिक लंबा और मोटा था। यह देखकर मैं मस्ती में आ गया और तुरंत उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया। गोपाल का लंड न केवल आकार में बड़ा था, बल्कि उसकी बनावट और गर्माहट भी मुझे बेहद पसंद आई।
मनोज ने भी अपने कपड़े उतारे और गोपाल के बगल में बेड पर लेट गया। उसका लंड भी आठ इंच का था, हालाँकि गोपाल के लंड की तुलना में थोड़ा कम मोटा। अब मेरे सामने दो लंड थे। मैंने एक के बाद एक, दोनों लंडों को अपने मुंह की गर्मी और नमी से सराबोर करना शुरू कर दिया। दोनों लंड चूसते-चूसते मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत के दरवाज़े पर पहुँच गया हूँ। सालों से दबी हुई मेरी तमन्ना आज पूरी हो रही थी। मनोज ने एक सिगरेट सुलगाई और सोफे पर जाकर बैठ गया, जबकि मैं गोपाल के लंड को मस्ती से चूस रहा था। कुछ देर बाद मनोज ने मुझे आवाज़ लगाई, “अबे लवड़े, जरा मेरे लंड पर भी मक्खन लगा दे!” मैं उसके पास गया और न केवल उसके लंड को, बल्कि उसकी गोटियों को भी अपनी जीभ से चाटने लगा।
तभी गोपाल का फोन बजा। कॉल खत्म करने के बाद, उसने मुझे रोकते हुए एक आदेश दिया। “चल, गांड उठा, भोसड़ी के!” गोपाल ने मुझे पोज़ लेने का इशारा किया। मैंने अपनी पैंट पूरी तरह उतार दी, बेड के किनारे हाथ टिकाए, और अपनी गांड ऊपर उठाकर खड़ा हो गया। गोपाल ने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और तेजी से मेरी गांड के अंदर घुसा दिया। उफ! यह दर्द तो मैंने जितना सोचा था, उससे कहीं अधिक तीखा और गहरा था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अनियंत्रित होकर चिल्लाने लगा, “आह! ओह माय गॉड! चोदो मुझे! चोदो! आह!” मनोज ने चेतावनी दी, “रंडी, चिल्ला मत! पास में पड़ोसी रहते हैं। सब तेरी गांड मारने आ जाएँगे!” मैं बस मुस्कुरा सका, लेकिन मेरी कराहें रुक नहीं रही थीं।
गोपाल ने मनोज से कहा, “अबे, इसके मुँह में लंड डाल। तब इसकी आवाज़ बंद होगी!” मनोज ने तुरंत अपना पूरा लंड मेरे मुंह के अंदर घुसेड़ दिया। अब मैं एक फुल पैकेज रंडी की तरह दो लंडों का एक साथ मज़ा ले रहा था। गांड में गोपाल के बड़े लंड का दर्द और मुंह में मनोज के लंड की भरपूर उपस्थिति। इस सुनहरे और अविस्मरणीय क्षण को मैं हमेशा के लिए सहेजना चाहता था। मैंने मनोज को अपना मोबाइल फोन दिया और वीडियो बनाने का अनुरोध किया। थोड़ी देर बाद गोपाल का काम पूरा हो गया। उसे जल्दी में कहीं जाना था, इसलिए वह कपड़े पहनकर चला गया। गोपाल के बड़े और मोटे लंड ने मेरी गांड की हालत खराब कर दी थी। मेरी गांड एक तरह से सदमे में थी, दर्द से भरी हुई।
गोपाल के जाने के बाद, मनोज ने कंड