मेरा नाम राजा है। मैं देखने में काला हूँ, पर मेरी कहानी उस रंग से कहीं ज्यादा गहरी है। यह सिर्फ एक भेनचोद की कहानी नहीं, बल्कि उन दस दिनों का विस्तृत ब्योरा है, जब मैं अपनी बहन सोनम के घर रहने गया था। सोनम मुझसे नौ साल बड़ी थी और शादीशुदा थी। उसकी उम्र उनतीस साल थी, जबकि मैं बीस का नौजवान था। वह देखने में गोरी और मोटी थी, उसके शरीर के घुमाव मुझे हमेशा से आकर्षित करते थे। वह अक्सर शॉर्ट्स, पैंटी और ब्रा पहनती थी, और यह सब मुझे बाद में पता चला, जब हमारे बीच की सारी सीमाएँ टूट गईं।
सोनम को सरकारी डाकघर में नौकरी लग गई थी, लेकिन उसका तबादला घर से पैंतीस किलोमीटर दूर हो गया था। उसके पति, मेरे जीजा, ने उसके लिए एक स्कूटी खरीद दी थी, पर सोनम को अभी तक स्कूटी चलानी नहीं आती थी। कुछ दिन तक जीजा उसके साथ ऑफिस जाते रहे, फिर अचानक उन्हें दस दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। चूँकि सोनम अकेले सफर नहीं कर सकती थी, इसलिए जीजा ने मुझे बुला लिया। मैं शाम को पाँच बजे उनके घर पहुँच गया। जीजा रात की ट्रेन पकड़कर चले गए, और अब घर में सिर्फ हम दोनों रह गए थे। वह पहली रात साधारण थी, हमने खाना खाया और अलग-अलग कमरों में सो गए।
सुबह होते ही सोनम नौकरी पर जाने की तैयारी करने लगी। ठंड के मौसम में उसने पजामा और कुर्ती पहनी थी। मैंने स्कूटी चलाई और वह पीछे बैठ गई। रास्ते में हवा के झोंके उसके बालों को छू रहे थे, और मैं सिर्फ आगे देखने की कोशिश कर रहा था। ऑफिस पहुँचकर उसने मेरे लिए बाजार से सेव और केले लिए। छुट्टी के बाद लौटते समय रास्ते में उसकी एक जान-पहचान वाली मिल गई, जिसे उसने स्कूटी पर बैठा लिया। अब हम तीनों स्कूटी पर सवार थे। सोनम बीच में बैठी थी, और उसके बूब्स मेरी कमर से सटे हुए थे। हर झटके के साथ वे मुझे आगे की ओर धकेल रहे थे, जिससे मेरे मन में अजीब-सी बेचैनी पैदा हो रही थी।
दीदी की दोस्त के उतरने के बाद, सोनम ने होटल पर खाना खाने का सुझाव दिया। खाने के बाद उसकी इच्छा हुई कि मैं उसे स्कूटी चलाना सिखाऊँ। मैंने उसे आगे बैठा दिया और पीछे से हैंडल पकड़कर निर्देश देने लगा। वह धीरे-धीरे स्कूटी चलाने लगी, पर मेरे और उसके शरीर के बीच की दूरी खत्म हो गई। अचानक मेरा लंड खड़ा हो गया, और मुझे शर्मिंदगी महसूस होने लगी, क्योंकि वह उससे छू रहा था। मैं थोड़ा पीछे हटा, जिससे स्कूटी का संतुलन बिगड़ गया और वह गिर गई। सोनम की एक टाँग पर गहरी चोट लग गई। उसने दर्द से कराहते हुए कहा, “अपने जीजा को मत बताना, वरना वे तुझे डाँटेंगे।” मैंने स्कूटी संभाली और हम घर पहुँच गए।
शाम हो चुकी थी। हम दोनों ने कपड़े बदले। सोनम ने एक हल्की नाइटी पहन ली। कुछ देर जीजा से फोन पर बात करने के बाद वह सो गई। मैं भी बेड पर अंडरवियर और बनियान पहनकर लेट गया। रात के अँधेरे में अचानक सोनम की कराह सुनाई दी। मैंने पूछा तो वह बोली, “मेरी टाँग में दर्द हो रहा है। मालिश कर दे।” मैं मना नहीं कर सकता था। मैंने सरसों का तेल गर्म किया और उसके कहने पर मुख्य बल्ब बंद करके एक छोटा बल्ब जलाया। वह उल्टी लेट गई और अपनी नाइटी थोड़ी ऊपर कर दी। मैंने उसकी टाँग पर मालिश शुरू की।
“थोड़ा और ऊपर,” उसने कहा। मैंने उसकी जाँघ की ओर हाथ बढ़ाया। उसकी त्वचा मुलायम और गर्म थी। उसे देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। सोनम ने मेरी ओर देखा और हँसते हुए बोली, “पागल, शरमा रहा है! कोई अपनी दीदी से शरमाता है क्या? सही से मालिश कर, दर्द हो रहा है।” मैंने मालिश जारी रखी, और तभी मैंने देखा कि उसने लाल रंग की एक शॉर्ट पैंटी पहन रखी थी, जो उसकी गांड में घुसी हुई थी। यह दृश्य देखकर मेरा लंड और कड़क हो गया। मालिश खत्म करके मैं लेट गया, पर मन शांत नहीं था।
रात की ठंड के कारण सोनम ने अनजाने में मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसके शरीर की गर्माहट ने मेरे अंदर की आग को और भड़का दिया। मैंने मौके का फायदा उठाते हुए धीरे से उसके बूब्स दबाने शुरू किए। वह भी गर्म होने लगी। मैंने उसे किस किया और उसकी गर्दन चाटने लगा। अचानक उसकी आँखें खुल गईं। मैं डर गया, पर वह बोली, “पागल, डर क्यों रहा है! मैं किसी से नहीं कहूँगी।” उसकी बातों ने मेरे अंदर का डर दूर कर दिया। मैंने उसकी नाइटी उतार दी और देखा कि उसने एक शॉर्ट ब्रा पहन रखी थी, क्योंकि उसके बूब्स बहुत बड़े थे। मैंने उसकी काली ब्रा और लाल पैंटी उतार दी। उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए, और हम पूरी तरह नंगे हो गए।
मैंने देखा कि उसकी ब्रा का साइज़ चालीस और पैंटी का साइज़ पचानवे था। वह बहुत सुंदर लग रही थी। मैंने उसके बूब्स दबाए और उसकी चूत चाटी। उसने मेरा छह इंच का लंड चूसा। जोश में आकर मैं बोला, “ले रंडी, और चूस!” सोनम के पास कंडोम थे। उसने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया। मैंने उसे लेटा दिया और पहली बार में आधा लंड उसकी चूत में डाल दिया। दूसरी बार में पूरा लंड अंदर डाल दिया। वह चिल्लाने लगी, “ऊई! आह! आह!” मैं लगातार चोदाई करता रहा और उसके मुँह पर किस करने लगा। फिर मैंने सरसों के तेल से उसकी गांड भी मारी। जोश में मैं उसे गालियाँ देने लगा। मैंने उसके ऊपर चार राउंड उतारे। उसकी चूत लाल हो गई थी।
पहले मैंने उसे सीधा लेटाकर चोदा, फिर डॉगी स्टाइल में चोदा। इसके बाद उसके पैर अपने कंधों पर रखकर चोदा, और फिर दोनों टाँगें फैलाकर चोदा। उसे दर्द भी हो रहा था, पर वह चुपचाप सब सह रही थी। उसके जैसे बड़े बूब्स वाली लड़की मैंने आज तक नहीं देखी थी। ऐसा लग रहा था, जैसे दूध की फैक्टरी हो! हम दोनों उन दस दिनों तक एक साथ नहाए। मैंने लगातार दस दिन तक उसे चोदा। खाना हम होटल पर खाते थे। रास्ते में वह अपनी चुदाई की बातें मुझसे शेयर करती थी। एक दिन उसने कहा, “इतना तो तेरे जीजा ने भी मुझे नहीं चोदा, जितना तूने मुझे चोद दिया!”
आज भी, जब भी मौका मिलता है, मैं उसे चोदता रहता हूँ। जब भी वह अकेली घर पर आती है, मेरे कमरे में ही सोती है, और मैं उससे मस्ती कर लेता हूँ। उससे अब सारी शर्म खुल गई है। जब भी मुझे सेक्स करना होता है, मैं उसे बुला लेता हूँ या फिर हम दोनों कोई रूम लेकर मस्ती करते हैं। अभी तक किसी को कुछ पता नहीं चला है, और हम अपनी दुनिया में मगन हैं। यह कहानी सिर्फ एक भेनचोद की घटना नहीं, बल्कि उन गहरे भावनात्मक और शारीरिक अनुभवों का विस्तार है, जो हमारे बीच एक गुप्त बंधन बन गए हैं।