एक दिन में तीन प्यास बुझाने की कहानी: दो बहनें और उनकी माँ

मेरा नाम आलोक है और मैं आपके सामने फिर से अपने अनुभवों की एक और कहानी लेकर आया हूँ। यह कहानी उस दिन की है जब मैंने एक ही दिन में तीन अलग-अलग औरतों के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इनमें से दो तो कुंवारी बहनें थीं और तीसरी उनकी ही माँ थी। पिछली कहानी में आपने पढ़ा था कि मेरी पड़ोसन अंजलि मेरे साथ रिश्ते में आ गई थी और मैं उसके घर में उसकी योनि चाट चुका था। जब मैंने उससे अपना लिंग चूसने के लिए कहा तो वह नखरे दिखाने लगी कि उसे यह काम करने में घिन आएगी। इस बात पर मैं उससे नाराज हो गया और वह मुझे मनाने लगी। आखिरकार वह मेरे लिंग को चूसने के लिए तैयार हो गई और मेरे लिंग को पकड़कर उससे खेलने लगी, मुझे चूमने लगी।

अब वह धीरे से नीचे झुकी और मेरे लिंग को अपनी जीभ की नोक से हल्के-हल्के चाटने लगी। मुझे इसमें आनंद आने लगा तो मैंने रबड़ी का पैकेट उठाया और अपने लिंग पर अच्छी तरह रबड़ी लगा दी। उसके बाद मैंने कहा, “रानी, तुम्हें तो रबड़ी बहुत पसंद है ना? अब मेरे लिंग को चूस-चूसकर सारी रबड़ी खा लो!” वह अभी भी हल्के-हल्के से लिंग को चूस रही थी। शायद उसे लिंग चाटने में अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने अचानक उसका सिर पकड़ा और पूरा लिंग उसके मुँह में डाल दिया। वह चौंक गई और लिंग को मुँह से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी।

लेकिन मैंने उसके मुँह को अपने लिंग पर दबाए रखा तो रबड़ी की मिठास के कारण उसे लिंग चूसने में आनंद आने लगा। वह लिंग के साथ सहज हो गई। मैं भी आनंद से उसके मुँह की गहरी चुदाई करने लगा। मुझे भी काफी आनंद आ रहा था। मैंने कहा, “आह रानी… बहुत मज़ा आ रहा है… तूने मुझे खुश कर दिया!” वह कुछ नहीं बोली। उसके बाद मैंने उसके सिर से हाथ हटा लिया। उसने कहा, “राजा जी… अब आप अपनी रानी की चुदाई करके उसे खुश कर दो!” मैंने कहा, “जो हुक्म रानी जी!” फिर अंजलि बिस्तर पर लेट गई और मैंने उसकी दोनों टाँगें फैलाकर अपना लिंग उसकी योनि पर रख दिया।

यह मेरा भी पहली बार वाला यौन संबंध था। इससे पहले मैंने कभी किसी के साथ यौन संबंध नहीं बनाए थे। मैंने एक झटका दिया तो मेरा आधा लिंग योनि में घुस गया। अंजलि की चीख निकल गई। वह दर्द से कराह रही थी, “आह निकालो लिंग को… दर्द हो रहा है!” मैंने कहा, “मेरी रानी… पहली बार सबको दर्द होता है… इसमें घबराने की कोई बात नहीं है!” मैं प्यार से उसके स्तन चूसता रहा और उसे चूमता रहा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हो गया। फिर मैंने धीरे-धीरे लिंग को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया और वह भी आराम से चुदवाने लगी।

कुछ पल बाद जब वह सहज हो गई तो मैंने एक और जोरदार झटका दिया। इस बार पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया था और वह फिर से चिल्लाने लगी थी, “आह मर गई… मेरी फट गई… आह निकालो इसे जल्दी!” मैंने उसे समझाया और उसे चूमा, उसके स्तन चूसे। थोड़ी देर बाद वह सामान्य हो गई और आनंद से योनि चुदवाने लगी। वह बोल रही थी, “चोदो राजा जी अपनी रानी को… आज मेरी प्यास बुझा दो।” अब तो वह अपनी योनि को खूब उठा-उठाकर चुदवा रही थी। इस तरह मैंने उसे बीस मिनट तक चोदा और कहा, “मेरा निकलने वाला है… जल्दी बताओ… कहाँ निकालूँ!” तो वह बोली, “अंदर नहीं… बाहर निकालो!”

मैंने लिंग को बाहर निकाला और उससे कहा, “हिलाओ मेरे लिंग को… अपने हाथों से!” वह मेरे लिंग के सामने बैठ गई और लिंग को हाथ में पकड़कर हिलाने लगी। कुछ ही देर में मेरा वीर्य उसके मुँह पर गिर गया। वह नाराज होने लगी, “तुमने बताया क्यों नहीं कि निकलने वाला है… मैं लिंग का मुँह नीचे कर देती!” मैंने कहा, “अरे यार मैं कहने ही वाला था… पर तब तक वीर्य ही निकल गया!” फिर मैंने उससे माफी माँगकर उसे मना लिया। हम दोनों लोग नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। मैंने उसके शरीर को खूब धोया, उसने मेरे शरीर को। उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और घर चला गया। इस तरह मैं हफ्ते में एक दिन छुट्टी लेता और अंजलि की योनि रबड़ी के साथ मारता।

फिर एक दिन मैंने छुट्टी ली… जैसा कि मैं हफ्ते में एक दिन करता हूँ… और बाजार चला गया। वहाँ से रबड़ी और एक यौन उत्तेजना की गोली का पैकेट लेकर आ गया। अंजलि के घर आया और बोला, “आज मैं तुम्हें खूब चोदूँगा… आज मैं यौन उत्तेजना की गोली का पैकेट लेकर आया हूँ!” अंजलि ने कहा, “ठीक है… आओ कमरे में चलते हैं।” मैंने रबड़ी और यौन उत्तेजना की गोली अंजलि को दे दी। उसने उसे एक तरफ रख दिया। हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारे और रबड़ी उठाकर अंजलि के शरीर पर लगाई और उसके होंठ, स्तन, योनि चूसने का काम शुरू कर दिया। मुझे उसे चूसते-चूसते दस मिनट हो गए थे। हम दोनों अपने यौन क्रिया में तल्लीन थे।

तभी एक आवाज आई, “तुम लोग ये क्या कर रहे हो?” मैं और अंजलि चौंक गए। देखा तो पता चला कि सुमन आज कॉलेज से जल्दी लौट आई थी। दरअसल अंजलि के घर की तीन चाबियाँ हैं। एक चाबी अंजलि के पास, एक सुमन के पास, एक अंजलि की माँ रेखा के पास रहती है। सुमन हमें ये सब करते हुए पाँच मिनट से देख रही थी। ऐसा उसने बाद में मुझे बताया था। सुमन बोली, “आलोक… तुम क्या कर रहे हो दीदी के साथ… तुम्हें शर्म नहीं आती… और दीदी आपको भी?” अंजलि ने तो जल्दी से कपड़े पहन लिए। लेकिन मैंने जैसे ही अपने कपड़े उठाए, वैसे ही सुमन ने छीन लिए। उसने कहा, “मैं आज तुम्हें नंगा घुमाऊँगी सड़क पर… और सबके सामने तुम्हारी बेइज्जती करूँगी।”

मैं डर गया और उसके पैरों में गिर गया। मैं गिड़गिड़ाने लगा, “कृपया मुझे माफ कर दो सुमन जी!” फिर अंजलि ने कहा, “सुमन, कृपया हमें माफ कर दो!” तब सुमन ने अंजलि से कहा, “दीदी तुम इस कमरे से बाहर जाओ… मैं तब तक इस आलोक को देखती हूँ।” अंजलि दूसरे कमरे में चली गई। फिर सुमन ने मुझसे कहा, “मैं तुझे माफ तो कर दूँगी… पर मैं जो कहूँगी वह करना पड़ेगा!” मैंने कहा, “सुमन जी… आप जो कहोगी मैं वह सब करूँगा!” सुमन ने कहा, “चल तो आगे आ और मेरे तलवे चाट!” मैं कुत्ते की तरह उसके पैर चाटने लगा। वह गर्म होने लगी थी। हम दोनों का यौन क्रिया देखकर वह पहले से ही उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए उसने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए।

मैं उसे नंगी होते देखकर चौंक गया कि ये क्या कर रही है! फिर उसने कहा, “जैसे तू अंजलि दीदी को चाट रहा था ना… वैसे ही मुझे भी चूस और चाट! मैं तुम दोनों को पाँच मिनट से देख रही थी कि कैसे तुम अंजलि के शरीर पर रबड़ी लगाकर उसको चूस और चाट रहे थे!” मैंने तुरंत रबड़ी उठाई और अंजलि की तरह सुमन को रबड़ी लगाकर उसे भी चूसने और चाटने लगा। कुछ मिनट बाद उसकी माँ आ गईं और उन्होंने भी मुझे सुमन के साथ देख लिया। वे बोलीं, “ये क्या हो रहा है?” सुमन तुरंत उठी और अपने कपड़े पहनने लगी। फिर मैंने जैसे ही अपने कपड़े उठाए, वैसे ही आंटी जी ने कपड़े छीन लिए और कहा, “ये जो काम कर रहा था, तो तुझे शर्म नहीं आई… अब तुझे शर्म लग रही है?”

आंटी जी ने अंजलि को आवाज लगाई तो अंजलि कमरे में आ गई। आंटी जी ने कहा, “देख अंजलि, इन दोनों के काम!” मैं आंटी जी के आगे गिड़गिड़ाने लगा, “मुझे माफ कर दो!” पर आंटी जी कह रही थीं, “तुम्हें माफ नहीं करूँगी… तुम्हें आज पूरे मोहल्ले में घुमाऊँगी!” वह माफ करने को तैयार नहीं थीं! फिर आंटी जी ने अंजलि से कहा, “किचन में जाओ और मेरे लिए जूस ले आओ!” फिर अंजलि के मन में विचार आया और उसने वही किया। जो यौन उत्तेजना की गोलियाँ लेकर मैं आया था, उसने दो गोलियाँ उठाईं और गोली पीसकर जूस में डालकर मिला दीं। फिर वह जूस का गिलास आंटी जी के लिए ले आई। उसने कहा, “लो मम्मी जी जूस!” फिर आंटी ने सारा जूस पी लिया और थोड़ा सा छोड़ दिया। उन्होंने मुझसे कहा, “ले… अब ये बाकी का तू पी ले।”

मैंने वह जूस पी ल

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