मेरी दुनिया उस दिन अचानक हिल गई जब मेरी गर्लफ्रेंड फरहाना की माँ, रूबीना खातून, ने गलती से उसके फोन में मेरे निजी अंग की एक तस्वीर देख ली। वह तस्वीर हमारी एक रात की गर्मजोशी भरी चैट का हिस्सा थी, जिसे फरहाना मिटाना भूल गई थी। अगली सुबह, मेरे फोन पर एक कॉल आई और दूसरी तरफ से रूबी आंटी की कठोर आवाज सुनाई दी। उन्होंने मुझे तुरंत अपने घर बुलाया, और मेरे मन में डर के साथ-साथ एक गहरी, दबी हुई उत्सुकता भी जाग उठी। मैं उन्हें पहले से ही चाहता था, यह एक ऐसा रहस्य था जो मेरे अंदर धधक रहा था।
मेरा नाम राज है और मैं पटना का रहने वाला हूँ। इक्कीस साल की उम्र में, मैंने अभी-अभी बारहवीं की परीक्षा पास की थी। मेरा रंग गोरा है और कद छह फुट दो इंच का है। मैं अपने बारे में झूठ नहीं बोलता; मेरा आकार एक औसत भारतीय जैसा ही है। मेरी गर्लफ्रेंड फरहाना स्कूल के दिनों से ही मेरे जीवन का हिस्सा थी। वह जीवंत और स्नेही थी, और हमारे बीच का आकर्षण गहरा था। लेकिन उसकी माँ, रूबी आंटी, धीरे-धीरे मेरे विचारों पर छा गईं। अड़तीस साल की उम्र में भी वे अद्भुत रूप से संवरी हुई थीं, जैसे कोई अठ्ठाइस साल की युवती हो।
रूबी आंटी का रंग साँवला था और चेहरा साधारण, लेकिन उनका शरीर किसी मूर्ति जैसा था। अड़तीस इंच के स्तन, तीस इंच की कमर और चालीस इंच की नितंबों वाली उनकी आकृति उन्हें अविश्वसनीय रूप से आकर्षक बनाती थी। उनकी चाल में एक लय थी, एक ऐसा मटकाव जो पूरे मोहल्ले का ध्यान खींच लेता था। शुरू में, मैंने उनके प्रति कोई गलत भावना नहीं रखी थी, लेकिन एक रात फरहाना ने मुझे एक कहानी सुनाई जिसने सब कुछ बदल दिया।
फरहाना ने बताया कि कैसे एक रात उसने अपनी माँ को अकेले में आत्म-सुख पाते हुए देखा था। उसने चुपके से एक वीडियो भी बना ली थी। जब उसने वह वीडियो मुझे दिखाई, तो मैं हिल गया। रूबी आंटी के रसीले अंग, उनकी देह की छवि मेरे मन में बस गई। उस रात मैं सो नहीं सका; मेरे विचार केवल उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते रहे। एक गुप्त इच्छा ने जन्म लिया, जो दिनों के साथ और प्रबल होती गई।
मैंने एक बार फरहाना से कहा भी दिया कि मैं उसकी माँ को चाहता हूँ। इस पर वह बहुत नाराज हुई और हमारा झगड़ा हो गया। लेकिन मेरी लालसा कम नहीं हुई। आखिरकार, मैंने फरहाना को मना लिया, और वह मुझे रूबी आंटी के इस्तेमाल किए हुए अंदरूनी कपड़े लाकर देने लगी। उन कपड़ों की खुशबू, उनमें समाई देह की सुगंध मुझे पागल कर देती थी। यह मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। फरहाना के साथ होते हुए भी, मेरे मन में उसकी माँ की छवि रहती थी।
भाग्य ने मेरी मदद की। एक रात, फरहाना और मैं सेक्स चैट कर रहे थे। मैंने उसे अपने उत्तेजित अंग की तस्वीर भेजी। बातचीत के बाद वह सो गई, लेकिन अपना फोन बंद करना भूल गई। रात में, रूबी आंटी किसी कारण से उसके कमरे में आईं और उसके फोन पर हमारी पूरी चैट, साथ ही वह तस्वीर देख ली। बाद में उन्होंने बताया कि उस तस्वीर को देखकर उनके शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई थी।
अगले दिन, उन्होंने फरहाना को रिश्तेदारों के घर भेज दिया और अपने पति के कार्यालय जाने का इंतजार किया। फिर उन्होंने मुझे फोन किया। शुरू में उनकी आवाज में गुस्सा था; उन्होंने मुझे डाँटा और धमकी दी कि वे यह सब मेरे पिता को बता देंगी। मेरा दिल धड़क रहा था, डर से पसीना आ रहा था। मैं फोन पर ही गिड़गिड़ाने लगा। तभी उन्होंने कहा कि अगर मैं बचना चाहता हूँ तो तुरंत उनके घर आऊँ, और ख्याल रखूँ कि कोई मुझे देखे नहीं।
मैं तुरंत अपनी बाइक पर सवार होकर उनके घर की ओर निकल पड़ा। रास्ते भर मेरे मन में डर और उलझन थी। घर पहुँचकर मैंने दरवाजे की घंटी बजाई। दरवाजा खुला और रूबी आंटी ने मुझे अंदर खींच लिया। मैं अभी भी काँप रहा था। वे मुझे अपने शयनकक्ष में ले गईं और बिस्तर पर बैठा दिया। मेरी काँपती देह देखकर वे मुस्कुराईं। फिर उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा कि अगर मैं उनकी एक इच्छा पूरी कर दूँ, तो वे यह सब भूल जाएँगी।
मैंने तुरंत हाँ में सिर हिला दिया। तब उन्होंने कहा कि वे कई सालों से अकेली और असंतुष्ट हैं। अगर मैं उन्हें संतुष्ट कर दूँ, तो वे सब कुछ भूल जाएँगी, और फरहाना से मेरी शादी कराने में भी मदद करेंगी। यह सुनकर मेरा डर जैसे हवा हो गया। मैंने मुस्कुराते हुए अपनी सहमति दी। उन्होंने मेरी ओर देखा, और फिर अचानक मुझे अपनी ओर खींचकर चूमना शुरू कर दिया।
उनके होठ नरम और गर्म थे। मैं भी उत्तर देने लगा। चुंबन गहरा होता गया। मैंने उनके शरीर को महसूस किया, उनके स्तनों को सहलाया। वे मुझे कसकर पकड़े हुए थीं। कुछ देर बाद, मैंने उनकी कुर्ती उतार दी। उन्होंने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनके स्तनों को दबाना शुरू किया। उनकी साँसें तेज हो गईं, और मादक कराहें निकलने लगीं। फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए।
मेरे नग्न शरीर को देखकर उनकी आँखों में चमक आ गई। मैंने उनकी ब्रा खोल दी, और उनके भरे हुए स्तन बाहर आ गए। मैंने उन्हें चूसना, दबाना और काटना शुरू कर दिया। वे पागलों की तरह कराह रही थीं। मैंने उनकी बाँहों के नीचे की गर्म त्वचा को चाटा, उनके पसीने की गंध मुझे और उत्तेजित कर रही थी। फिर मैंने उनकी सलवार उतार दी। अंदर उन्होंने कुछ नहीं पहना था।
उनका शरीर पूरी तरह से प्रकट हो गया। मैंने उनकी जँघाओं के बीच की ओर देखा। मैं नीचे झुका और उनकी गंध को महसूस किया। फिर मैंने अपना मुँह उनकी योनि पर रख दिया और चाटना शुरू कर दिया। वे चिल्लाईं, मेरे सिर को पकड़कर अपनी ओर दबाने लगीं। उनकी कराहें कमरे में गूँज रही थीं। कुछ ही देर में वे चरम पर पहुँच गईं, और मैंने उनके रस का स्वाद चखा।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपने उत्तेजित अंग को उनकी योनि के द्वार पर रखा। वे बेसब्र होकर मुझे अंदर खींच रही थीं। मैंने एक जोरदार धक्का दिया, और मेरा पूरा अंग उनकी गर्म और तंग देह के भीतर समा गया। वे चीख उठीं। मैंने तेज गति से धक्के देना शुरू किया। उनकी टाँगें मेरे कंधों पर थीं। मैं उनके स्तनों को दबाता हुआ, उनकी देह को अपनी ओर खींचता हुआ आगे बढ़ता रहा। कमरा उनकी आहों और हमारी देहों के टकराने की आवाज से भर गया।
कुछ देर बाद, मैंने उन्हें घुटनों के बल लिटा दिया और पीछे से उनके नितंबों पर थप्पड़ मारते हुए धक्के देना शुरू किया। उनकी त्वचा पर मेरे हाथों के निशान पड़ गए। वे लगातार मेरा नाम ले रही थीं, मुझे और तेज करने के लिए कह रही थीं। फिर मैंने अपनी एक उँगली उनके गुदा में डाल दी। वे चौंक गईं, लेकिन फिर और जोश से कराहने लगीं। अचानक, उनका शरीर काँप उठा, और वे दोबारा चरम पर पहुँच गईं। उनकी देह की गर्मी ने मुझे भी विचलित कर दिया, और मैं भी गहरे धक्कों के साथ अपना वीर्य उनके भीतर छोड़ दिया।
शांति छा गई। हम दोनों साँस ले रहे थे। मैं उनके पास लेट गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आज तक उन्होंने ऐसा आनंद नहीं लिया था। उन्होंने तीन बार चरम का अनुभव किया था। मैंने उन्हें गले लगा लिया। कुछ ही देर में, मेरा शरीर फिर से तैयार हो गया। इस बार मैंने उनके गुदा का रास्ता चुना। मैंने उन्हें सावधानी से तैयार किया, और फिर धीरे से प्रवेश किया। वह अनुभव और भी तीव्र था। हम फिर से एक दूसरे में खो गए।
उस दिन के बाद, सब कुछ बदल गया। रूबी आंटी और मेरे बीच एक गुप्त संबंध शुरू हो गया। कुछ समय बाद, फरहाना को भी सब पता चल गया। आश्चर्यजनक रूप से, वह भी इस रिश्ते का हिस्सा बन गई। अब हम तीनों एक साथ रहते थे। दुर्भाग्य से, फरहाना के पिता की एक बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। इसके बाद, मैंने फरहाना और रूबीना दोनों से विवाह कर लिया। आज, हम तीनों एक घर में रहते हैं। फरहाना अभी गर्भवती है, इसलिए मेरा अधिकांश समय रूबीना के साथ बीतता है। हमारा जी