पंजाब के एक छोटे से शहर में हमारा परिवार रहता था। मेरा नाम सिमर है और यह घटना उस समय की है जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा था। हमारा घर एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की तरह चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से पिताजी के व्यवसाय में मंदी आ गई थी। उनकी दुकान में ग्राहक कम आने लगे थे और कर्ज़ का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था, हर कोई चिंतित रहता था। माँ के चेहरे पर भी वह पहले वाली मुस्कान कम दिखाई देती थी, हालाँकि वह हम सबके सामने मजबूत बनी रहने की कोशिश करती थीं।
मेरी माँ जसप्रीत कौर उस समय बयालीस वर्ष की थीं, लेकिन उनकी सुंदरता और जवानी देखकर कोई भी उनकी उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता था। उनकी लंबाई पाँच फुट छह इंच थी और उनका गोरा रंग सूरज की किरणों में चमकता रहता था। उनके लंबे काले बाल जब खुले होते तो पीठ तक लहराते हुए दिखाई देते। उनकी आँखों में एक विशेष चमक थी जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती थी। उनका पूरा व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि लोग उन्हें देखते रह जाते थे।
माँ का फिगर सचमुच किसी मॉडल जैसा था। उनके सीने पर छत्तीस इंच के उभरे हुए स्तन थे जो हमेशा उनके कपड़ों के अंदर से साफ झलकते रहते थे। वह आमतौर पर पंजाबी सलवार सूट पहनती थीं, लेकिन उनके सूट इतने टाइट होते थे कि उनकी देह की हर वक्र रेखा स्पष्ट दिखाई देती थी। उनकी कमर पतली थी और कूल्हे गोल और भरपूर, जिससे उनका पंजाबी अंदाज़ और भी निखर जाता था। वह अक्सर गहरे नेकलाइन वाले कुर्ते पहनती थीं जिससे उनकी छाती का क्लीवेज साफ दिखता रहता था।
पिताजी की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्हें शहर के एक कुख्यात गुंडे से कर्ज़ लेना पड़ा था। उस गुंडे का नाम तो मैं नहीं जानता, लेकिन पूरे शहर में उसका डर था। वह एक लंबा, ताकतवर आदमी था जिसके चेहरे पर हमेशा एक अजीब सी मुस्कान रहती थी। उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो लोगों को डरा देती थी। जब भी वह हमारे घर के आसपास आता, माँ किसी बहाने अंदर चली जाती थीं। मुझे अक्सर लगता था कि वह आदमी माँ को बहुत गौर से देखता है, लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाता था।
एक दिन की बात है जब माँ नहाकर बाथरूम से निकली थीं। उस समय उनके बाल गीले थे और सफेद टॉप उनके शरीर से चिपका हुआ था। वह तौलिए से अपने बाल सुखा रही थीं कि अचानक दरवाज़े की घंटी बजी। मैंने दरवाज़ा खोला तो वही गुंडा खड़ा था। उसने बिना कुछ कहे अंदर आकर माँ की ओर देखा। माँ उस समय भीगे बदन थीं और उनकी गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें चमक रही थीं। उस आदमी ने माँ को ऊपर से नीचे तक देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वह कुछ देर खड़ा रहा, फिर बिना कुछ कहे चला गया। मैं उसकी इस हरकत से हैरान रह गया।
उसी रात पिताजी के फोन पर उस गुंडे का कॉल आया। मैंने पिताजी के चेहरे का रंग उड़ते देखा। वह फोन पर कुछ बात कर रहे थे और उनकी आवाज़ काँप रही थी। कॉल खत्म होने के बाद पिताजी ने माँ को सारी बात बताई। उस गुंडे ने कहा था कि या तो पैसे वापस करो या फिर अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो। पिताजी गुस्से से काँप रहे थे, लेकिन माँ के चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। माँ ने पिताजी को समझाया कि परिवार की सुरक्षा सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। उनकी आवाज़ में दृढ़ता थी, लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो मुझे समझ नहीं आ रही थी।
अगले दिन वह गुंडा फिर हमारे घर आया। माँ उसके लिए पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने काले रंग का टाइट सलवार सूट पहना था और उनके बाल खुले हुए थे। उनके होठों पर लाल लिपस्टिक थी और आँखों में काजल। वह किसी दुल्हन की तरह सजी-धजी लग रही थीं। जब वह आदमी अंदर आया तो सीधा माँ के पास गया और उन्हें जोर से पकड़ लिया। पिताजी के सामने ही उसने माँ के होठों पर किस किया। माँ ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने पिताजी से कहा कि वह बाहर चले जाएँ। पिताजी का चेहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया था, लेकिन वह कुछ नहीं कर सके।
जब पिताजी बाहर चले गए तो उस आदमी ने माँ के कपड़े उतारने शुरू कर दिए। माँ ने लाल रंग की रेशमी ब्रा और पैंटी पहनी थी जो उनके शरीर पर एकदम फिट बैठ रही थी। उस आदमी ने माँ के स्तनों को देखा तो उसकी आँखों में कामुकता की चमक और तेज हो गई। उसने माँ को जोर से पकड़ा और उनके होठों को चूसने लगा। माँ की लिपस्टिक उसके मुँह पर लग गई थी। फिर उसने माँ की ब्रा उतार दी और उनके स्तनों को अपने हाथों में ले लिया। माँ की साँसें तेज हो गई थीं और उनके शरीर से खुशबू आ रही थी।
उस आदमी ने अपने कपड़े उतारे तो मैंने देखा कि उसका लिंग बहुत बड़ा और मोटा था। माँ ने उसे देखा तो उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उन्होंने घुटनों के बल बैठकर उसके लिंग को अपने मुँह में ले लिया। माँ उसे चूस रही थीं और उनके हाथ उसकी जाँघों पर थे। वह आदमी माँ के बाल पकड़े हुए था और उसकी आँखें मज़े से बंद थीं। कमरे में सिर्फ चूसने की आवाज़ और साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
फिर उस आदमी ने माँ को नीचे लिटा दिया और उनकी टाँगें फैला दीं। माँ की योनि गुलाबी और नम थी। उसने अपनी उँगली माँ की योनि में डाली तो माँ ने आह भरी। फिर उसने अपना लिंग माँ की योनि में डाला और जोर से धक्का दिया। माँ की जोर से चीख निकली। वह आदमी तेजी से धक्के मार रहा था और माँ उसके साथ तालमेल बिठा रही थीं। कमरे में चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी और बिस्तर की चरमराहट सुनाई दे रही थी।
पूरी रात वह आदमी माँ को अलग-अलग पोजीशन में चोदता रहा। कभी वह माँ को ऊपर लिटाकर चोदता, कभी पीछे से, तो कभी खड़े होकर। माँ की चीखें और कराहें पूरे घर में सुनाई दे रही थीं। मैं अपने कमरे में छिपा हुआ था और मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि माँ वास्तव में इस सब का आनंद ले रही हैं या फिर वह सिर्फ परिवार के लिए यह सब सह रही हैं।
सुबह होने से पहले वह आदमी चला गया। जाते-जाते उसने पिताजी से कहा कि कर्ज़ माफ किया और वह जब भी मन करेगा, माँ के पास आया करेगा। पिताजी का चेहरा शर्म से लाल था। जब वह अंदर गए तो माँ पूरी नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उनके शरीर पर निशान थे और योनि से वीर्य बह रहा था। माँ ने पिताजी से कहा कि चिंता न करें, वह सब संभाल लेंगी। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी थकान थी, लेकिन आँखों में एक चमक थी जो पहले कभी नहीं देखी थी।
उस दिन के बाद से घर का माहौल बदल गया। पिताजी चुपचाप रहने लगे और माँ कभी-कभी उदास रहती थीं। लेकिन कभी-कभी जब वह उस गुंडे के बारे में सोचती थीं तो उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती थी। मैं समझ नहीं पा रहा था कि माँ वास्तव में क्या महसूस कर रही थीं। क्या वह उस आदमी से डरती थीं या फिर उन्हें उसके साथ का अनुभव पसंद आया था? यह सवाल मेरे मन में हमेशा के लिए अधूरा रह गया।