मेरी कहानी शुरू होती है एक ऐसी इच्छा से जो मेरे भीतर हमेशा सुलगती रहती है। मुझे अपनी गांड मरवाने का शौक है, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। कई दिनों से किसी मर्द का लंड न मिलने के कारण मेरे शरीर में एक अजीब सी बेचैनी घर कर गई थी। मेरी गांड में एक तरह की खुजली सी महसूस हो रही थी, जैसे कोई अंदरूनी भूख मचल रही हो। यह कोई साधारण इच्छा नहीं थी, बल्कि एक जरूरत बन चुकी थी जिसे पूरा किए बिना चैन नहीं मिल रहा था। मैं बेसब्र होकर सड़कों पर घूमने लगा, मेरी नजरें हर उस आदमी को तलाश रही थीं जो मेरी इस भूख को शांत कर सके।मेरा नाम शिवम है और मैं कन्नौज का रहने वाला हूं। बाईस साल की उम्र में मैं पूरी तरह से जवान हो चुका हूं। मेरा रंग गोरा है और कद पांच फुट आठ इंच का है। वैसे तो मैंने अपनी जिंदगी में कई बार गांड मरवाई है, लेकिन पिछले कुछ समय से कोई ऐसा सही आदमी नहीं मिला था जो मेरी इच्छाओं को समझ सके। इसी कारण मेरे अंदर एक तनाव सा बना हुआ था। मैं हर रोज बेचैन रहता, अपने आसपास के लोगों को देखता और सोचता कि कौन मेरी इस जरूरत को पूरा कर सकता है। मेरा दिमाग हमेशा इसी उधेड़बुन में लगा रहता था।एक दिन मैंने अपने एक पुराने दोस्त से बात की। हमारे बीच एक खास तरह का रिश्ता था क्योंकि मैं उसका लंड अपने मुंह में ले चुका था। इस वजह से हमारी बातचीत आसानी से हो जाती थी। जब मैंने अपनी परेशानी उसके सामने रखी, तो उसने एक पहलवान का नंबर मुझे दिया। उसने बताया कि यह आदमी बहुत हैंडसम है और शायद मेरी मदद कर सकता है। मैंने उस नंबर को अपने फोन में सहेज लिया, लेकिन तुरंत कॉल करने का साहस नहीं जुटा पाया।उस पहलवान का नाम मदन था। मेरे दोस्त ने उसके बारे में जो बताया था, वह सुनकर ही मेरा दिल धड़कने लगा था। छह फुट की लंबी कदकाठी, मजबूत शरीर और डोले-शोले जैसे मांसपेशियों वाला आदमी। मैं उसकी तस्वीर अपने दिमाग में बनाने लगा और एक अजीब सा डर महसूस करने लगा। क्या वह आदमी मेरी नाजुक देह को सहन कर पाएगा? मैं उसे पहले से जानता था, हालांकि वह इस बात से अनजान था। कई दिन तक मैं उस नंबर को देखता रहा, फोन उठाता और फिर रख देता।आखिरकार, जब मेरी बेचैनी सीमा पार करने लगी, तो मैंने हिम्मत जुटाई। मैंने मदन को फोन किया। फोन की घंटी बजते ही मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। जब उसने फोन उठाया, तो उसकी आवाज में एक गहरापन था जिसने मेरे शरीर में एक सिहरन पैदा कर दी। उसने मुझे मिलने के लिए बुला लिया। फोन रखते ही मैंने खुद को तैयार किया। मैं जानता था कि मैं उससे मिलने नहीं, बल्कि अपनी गांड मरवाने जा रहा हूं। यह सोचकर मेरे अंदर एक उत्साह और डर का मिश्रण सा हो गया।जब मैं उससे मिला, तो मेरा डर सच साबित हुआ। वह वाकई में बहुत बड़ा और ताकतवर आदमी था। उसकी मांसपेशियां उसके कपड़ों के अंदर से भी साफ दिखाई दे रही थीं। मैंने सोचा, कहीं यह मेरी गांड का गोदाम न बना दे। हमारी बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि उसके पास कोई ऐसा कमरा नहीं है जहां हम आराम से अपना काम कर सकें। मैं थोड़ा निराश हुआ, लेकिन फिर उसने एक सुझाव दिया। उसने कहा कि हम किसी सुनसान जगह पर चले जाएं, जहां कोई न हो। मैंने हां कर दी, हालांकि मन में डर बना हुआ था।हम दोनों एक ऐसी जगह की तरफ चल पड़े जहां घनी झाड़ियां थीं। रास्ते में मैंने चारों तरफ नजरें घुमाई तो वाकई कोई नहीं दिखा। इससे मेरा डर थोड़ा कम हुआ। तभी मदन ने एक तरफ खड़े होकर पेशाब करना शुरू किया। मैं चुपचाप उसकी तरफ देखने लगा, उसके लंड को देखने की कोशिश करने लगा। उसने मेरी नजरें पकड़ लीं और गुस्से में बोला कि मैं क्या देख रहा हूं, सीधा मुंह में ही दे देगा। मैं चुप हो गया और उसके बगल में खड़ा रहा। उसने अपना काम खत्म किया और फिर आगे बढ़ने को कहा।हम घनी झाड़ियों के पास पहुंचे। वहां की हवा में एक अजीब सी खामोशी थी। मदन ने झाड़ियों की ओट में जाकर अपनी पैंट खोली और अपना लंड मेरे सामने कर दिया। मैं देखकर हैरान रह गया। उसका लंड आठ इंच लंबा और बेहद मोटा था, जैसे लोहे की कोई रॉड हो। वह टनटन कर रहा था। मदन ने उसे हिलाते हुए कहा कि अब मैं उसे अपने मुंह में ले लूं। मैं घुटनों के बल बैठ गया और धीरे से उसके लंड को अपने होंठों से छुआ। फिर पूरा मुंह में ले लिया।उसका स्वाद और गंध मेरे दिमाग में समा गई। मैं उसे चूसने लगा, अपने हाथों से उसके अंडकोष को सहलाते हुए। कुछ ही पलों में मदन ने अपना पूरा लंड मेरे मुंह के अंदर ठूंस दिया। वह बार-बार मेरे गले तक अपना हथियार धकेलने लगा और साथ ही मेरे स्तनों को मसलने लगा। मैं उसकी इस रफ्तार के आगे बेबस सा हो गया। पांच मिनट के अंदर ही वह तेजी से मेरा मुंह चोदने लगा, गालियां देते हुए। फिर एक लंबी आह के साथ उसने मेरे मुंह में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। मैंने उसे निगल लिया।मैं उससे गांड मरवाना चाहता था, लेकिन उसने मना कर दिया। वह बोला कि उसे गांड मारने में मजा नहीं आता और वहां से चला गया। मैं मन मसोस कर रह गया। मेरी इच्छा अधूरी रह गई थी और मेरी गांड में आग सी लगी हुई थी। मैं वापस अपनी बाइक के पास आया और क्रॉसिंग की तरफ चल पड़ा। मैं किसी ऐसे आदमी की तलाश में था जो मेरी इस आग को बुझा सके।तभी मेरी नजर एक लड़के पर पड़ी। वह काफी गोरा था और उसकी हाइट पांच फुट सात इंच के करीब थी। उसका नाम मनोज था। वह खुद मेरे पास आया और बस स्टॉप का रास्ता पूछने लगा। मैंने उसके शरीर को देखा, उसकी आंखों में झांका और फिर बोला कि मैं भी उधर ही जा रहा हूं, वह मेरी बाइक पर बैठ जाए। वह मान गया और बैठ गया। बस स्टॉप थोड़ी दूर पर था, लेकिन मैं उस दूरी को बढ़ाना चाहता था।रास्ते में मैंने उससे बातचीत शुरू की। मैंने पूछा कि क्या उसकी शादी हो गई है। उसने बताया कि उसकी दो-दो शादियां हो चुकी हैं, एक गांव में और एक शहर में। मैं हैरान हुआ और फिर पूछा कि दो-दो बीवियों के साथ कैसे रहता है। उसने मुस्कुराते हुए कहा कि सर्दियों के मौसम में तो बहुत सुकून मिलता है। मैं समझ गया कि उसे रोजाना सेक्स करने की आदत है।मैंने उससे कहा कि ऐसी सर्दी में तो उसके मजे होते होंगे, दो-दो के साथ एक साथ। उसने बताया कि वह एक महीने से घर नहीं गया है और एक साथ दोनों के साथ तो वैसे भी नहीं हो पाता। फिर मैंने पूछा कि उसकी टाइमिंग कैसी है। वह मुस्कुराया और बोला कि वह एक घंटे तक बिना किसी दवा के कर सकता है। यह सुनकर मेरे अंदर का गांडू जाग उठा। मैंने उससे पूछा कि वह कहां तक जाएगा। उसने बताया कि कानपुर के आगे उसका गांव है।मैंने उसे बताया कि अभी उधर की बस नहीं है, एक घंटे बाद आएगी। फिर मैंने सुझाव दिया कि तब तक मैं उसे कन्नौज घुमा देता हूं। वह पहले तो मना करने लगा, लेकिन मेरे जोर देने पर मान गया। मुझे बस उससे बात करने का बहाना चाहिए था। एक घंटे में मेरा काम पूरा हो सकता था। मैं उसे एक सुनसान रास्ते की तरफ ले जाने लगा और सेक्स की बातें करने लगा।बातचीत के दौरान उसने बताया कि बहुत सी लड़कियां उस पर मरती हैं और उसने कई लड़कियों और भाभियों के साथ संबंध बनाए हैं। मैंने पूछा कि क्या उसने कभी किसी की गांड मारी है। उसने कहा कि उसे गांड मारने में मजा नहीं आता। यह सुनकर मैं फिर निराश हो गया। कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा कि उसका लंड कितना बड़ा है। उसने कहा कि उसने कभी नहीं नापा।मैंने कहा कि मैं नाप दूं। वह हंसने लगा और बोला कि मैं मजाक कर रहा हूं। मैंने जिद की कि वह दिखाए। वह मेरे पीछे बैठा था, मैंने अपनी गांड उसकी तरफ कर दी और कहा कि वह एक बार खोलकर दिखाए। उसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं उसके लंड के चक्कर में हूं। कुछ देर बाद मैंने पूछा कि क्या उसका खड़ा हुआ है। उसने कहा नहीं, लेकिन मैंने महसूस किया कि झूठ बोल रहा है।मैंने कहा कि हो गया है, लगता है। वह मान गया और बोला कि थोड़ा-थोड़ा, बीवी की याद आने लगी है। मैंने अपना हाथ उसके पेट की तरफ बढ़