जून का महीना था और पटना की गर्मी अपने चरम पर थी। सूरज आग बरसा रहा था, ऐसा लग रहा था मानो आसमान से अंगारे बरस रहे हों। मैं, मोहन, केबल कंपनी के लिए पैसे वसूलने का काम करता हूं। उस दिन मेरा लक्ष्य शहर के एक पुराने सरकारी आवासीय भवन था, जहां दस परिवार रहते थे। पांच मंजिला उस इमारत में लिफ्ट नहीं थी, सिर्फ सीढ़ियां थीं जो गर्मी से तपती हुई लग रही थीं।
तेज धूप में चलकर आने के कारण मेरा सिर चकरा रहा था। आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। मैंने नीचे ही सीढ़ियों पर बैठकर आराम करने का फैसला किया। थोड़ी देर बैठे-बैठे मन हुआ कि कोई कहानी पढ़ ली जाए। मैंने अपना फोन निकाला और एक वेबसाइट खोलकर एक उत्तेजक कहानी पढ़नी शुरू कर दी। कहानी पढ़ते-पढ़ते मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैलने लगी।
कहानी खत्म करके मैंने खुद को संभाला और पांचवीं मंजिल की ओर चढ़ना शुरू किया। हर कदम पर मेरी सांस फूल रही थी और शरीर से पसीना बह रहा था। आखिरकार मैं शीर्ष मंजिल पर पहुंचा और एक फ्लैट का दरवाजा खटखटाया। कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला और सामने शालिनी भाभी खड़ी थीं। उन्हें देखते ही मेरी सांस रुक सी गई।
शालिनी भाभी ने ऐसी पोशाक पहन रखी थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। एक ऐसी ड्रेस जो घुटनों से ऊपर थी और ऊपर से इतनी पतली कि उनके आधे स्तन साफ दिखाई दे रहे थे। नीचे ब्रा नहीं थी, सिर्फ एक जालीदार अंतःवस्त्र का अंदाजा लग रहा था। कमरे में एसी नहीं था, सिर्फ एक पुराना कूलर चल रहा था जिसकी हवा उनके शरीर से चिपके कपड़ों को हिला रही थी।
मैं दो साल से उनके घर पैसे लेने आ रहा था, लेकिन आज उनका रूप कुछ और ही था। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे कोई गहरी इच्छा छिपी हो। मैंने अपने आप को संभालने की कोशिश की और अंदर आने के लिए कहा। भाभी ने मुस्कुराते हुए रास्ता दिया। मेरी नजर अनजाने में ही उनके शरीर के वक्रों पर टिक गई थी।
अंदर आकर मैंने महसूस किया कि मेरी जींस की चेन थोड़ी खुली हुई है। सीढ़ियां चढ़ते समय शायद खुल गई होगी। मैंने जल्दी से उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन तभी मैंने देखा कि भाभी की नजरें मेरी जींस पर टिकी हुई हैं। मेरे शरीर का तना हुआ हिस्सा कपड़ों के अंदर साफ उभर रहा था। भाभी के होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान खेल रही थी।
मैंने अपनी बेचैनी छुपाते हुए कहा, “भाभी, मुझे तेज धूप लग गई है, कुछ पीने को मिलेगा?” भाभी ने तुरंत हामी भरी और रसोई की ओर चली गईं। कुछ ही देर में वो एक बड़े गिलास में ठंडी लस्सी लेकर आईं। मैंने प्यास से तड़पते हुए पूरी लस्सी एक ही सांस में पी ली। स्वाद थोड़ा अजीब था, लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया।
लस्सी पीने के बाद भाभी ने बताया कि उनका टीवी ठीक से काम नहीं कर रहा है। मैंने टीवी ठीक करने की कोशिश शुरू कर दी। इस बीच भाभी दूसरे कमरे से पैसे लाने चली गईं। मैंने सोचा कि जींस में अपने उभार को ठीक कर लूं, ताकि वो ज्यादा न दिखे। जैसे ही मैंने जींस का बटन खोला, वैसे ही भाभी अचानक वापस आ गईं।
उन्हें देखते ही मेरे सिर में चक्कर सा आने लगा। कमरा घूमने लगा और आंखों के सामने अंधेरा छा गया। मैं जमीन पर गिर पड़ा। धीरे-धीरे मुझे होश आने लगा, लेकिन शरीर सुन्न पड़ा हुआ था। फिर मुझे एक अजीब सी अनुभूति हुई – कोई मेरे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्से को अपने मुंह में ले रहा था।
मैं आंखें पूरी तरह नहीं खोल पा रहा था, लेकिन महसूस कर सकता था कि शालिनी भाभी मेरे सामने थीं। उनकी आवाज मेरे कानों में गूंज रही थी, “इतना बड़ा… इतना मोटा… आज तो जन्नत का मजा आएगा।” मैं समझ गया कि लस्सी में कुछ मिला दिया गया था। भाभी अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए मुझे बेहोश करना चाहती थीं।
भाभी लगातार मेरे शरीर का आनंद ले रही थीं। उनकी जीभ हर इंच का स्वाद चख रही थी। मैं कुछ कर नहीं पा रहा था, सिर्फ महसूस कर सकता था। करीब दस मिनट तक यह सब चलता रहा। फिर भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं। अब मेरी बेहोशी धीरे-धीरे कम हो रही थी।
भाभी ने मेरे शरीर को अपने शरीर से रगड़ना शुरू किया। मैं महसूस कर सकता था कि उनका शरीर पहले से ही गीला हो चुका था। वो मेरे सीने पर हाथ रखकर बैठी थीं और अपने निचले हिस्से को मेरे शरीर के साथ संयोजित करने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन उनकी कोशिश सफल नहीं हो पा रही थी।
थोड़ी देर कोशिश करने के बाद भाभी नारियल का तेल लाने के लिए उठ गईं। इस बीच मैं पूरी तरह होश में आ चुका था, लेकिन मैंने नाटक जारी रखा। भाभी तेल लेकर वापस आईं और मेरे शरीर पर लगाने लगीं। उनकी उंगलियों का स्पर्श कोमल था, लेकिन जल्दी ही वो अपने शरीर पर भी तेल लगाने लगीं।
फिर से वो मेरे ऊपर आईं। इस बार उन्होंने जोर से नीचे की ओर दबाव डाला। मेरे शरीर का एक हिस्सा उनके अंदर प्रवेश कर गया। भाभी के मुंह से एक आह निकली – आधी पीड़ा की, आधी आनंद की। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। शुरुआत में वो सिर्फ पांच इंच ही अंदर ले पा रही थीं।
भाभी का चेहरा आनंद और पीड़ा के बीच झूल रहा था। उन्होंने अपने स्तनों को अपने हाथों से मसलना शुरू किया। जैसे ही उन्होंने मेरे सीने से हाथ हटाया, मेरा पूरा शरीर उनके अंदर समा गया। भाभी चीख पड़ीं, “ऊईईई… मर गई… मेरी चूत!” वो कुछ देर के लिए स्थिर हो गईं, फिर धीरे से बाहर निकलीं।
दोबारा कोशिश की तो इस बार उन्होंने पूरा शरीर अंदर ले लिया। दर्द अभी भी था, लेकिन भाभी ने सब्र से काम लेना शुरू किया। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और आनंद बढ़ने लगा। भाभी तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके मुंह से आनंद की आवाजें निकलने लगीं – “आह्ह… ओह्ह… मोहन… चोद दो मुझे…”
भाभी पूरे जोश में थीं। उनके स्तन हवा में उछल रहे थे। उनकी आंखें बंद थीं और चेहरे पर एक अद्भुत संतुष्टि का भाव था। कुछ ही देर में उनका शरीर कांपने लगा। वो चरम सीमा पर पहुंच चुकी थीं। उनके अंदर से गर्म तरल निकलने लगा।
इसके बाद भाभी की गति और तेज हो गई। वो बेतहाशा ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं अब अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। कुछ ही देर में मैं भी चरम पर पहुंच गया। भाभी को महसूस हुआ कि मेरा शरीर उनके अंदर सब कुछ छोड़ रहा है। वो एकदम से खुश हो गईं, जैसे उनकी सारी इच्छाएं पूरी हो गई हों।
कुछ देर बाद मैंने नाटक किया कि मुझे अभी होश आया है। मैं एकदम से उठा और पूछा, “आपने ये क्या किया मेरे साथ?” मैंने जल्दी से कपड़े पहनने शुरू किए और बाहर जाने लगा। तभी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उनकी आंखों में आंसू थे।
वो रोते हुए बोलीं, “प्लीज मोहन, मेरी बात सुन लो। मैं बरसों से प्यासी हूं।” उन्होंने बताया कि उनकी शादी जबरदस्ती हुई थी और उनके पति सरकारी नौकरी में इतने व्यस्त रहते हैं कि महीने में एक बार ही घर आते हैं। वो भी थके-हारे आते हैं और सो जाते हैं।
भाभी ने कहा, “मेरे पति जब कभी सेक्स करते भी हैं तो पांच मिनट में ही खत्म हो जाता है। मेरी प्यास कभी नहीं बुझती। इस इमारत में दो परिवार ऐसे हैं जिनके पति अच्छी चुदाई करते हैं। उनकी आवाजें सुनकर मेरी चूत में पानी आ जाता है।”
मैंने कहा, “लेकिन भाभी, आज आपने मेरे साथ जो किया, वो तो गलत था।” भाभी ने माफी मांगी और वादा किया कि अगर मैं उनकी मदद करूं तो वो मुझे दूसरी भाभियों से भी मिलवाएंगी। मैं मान गया। फिर भाभी ने कहा कि एक बार चुदाई से उनकी प्यास नहीं बुझेगी। उन्हें अलग-अलग पोजिशन में चुदाई चाहिए।
मैंने भाभी को बिस्तर पर पटक दिया और फ्रेंच किस करने लगा। भाभी भी उत्साह से जवाब दे रही थीं। पांच मिनट तक हमारी जीभें एक-दूसरे के मुंह में घूमती रहीं। फिर हमने अलग-अलग पोजिशन आजमाईं। हर पोजिशन में भाभी को नया आनंद मिल रहा था।
हम हॉल में ग