श्रेया की गांड मारने के बाद मेरा शरीर थकान से भर गया था, पर मन में एक अजीब सी विजय की भावना थी। मेरा लंड अभी भी गीला था, उस पर पसीने और श्रेया के रस की बूंदें चमक रही थीं। मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं, दिल धड़क रहा था। मैंने श्रेया को वहीं फर्श पर छोड़ दिया और सोफे की तरफ बढ़ा। मेरे पैरों में थकान थी, पर मस्तिष्क में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी। सोफे पर बैठते ही मैंने आंखें बंद कर लीं और टांगें फैला दीं। कमरे की हवा में सेक्स की गंध घुली हुई थी, जो मेरे नथुनों में समा रही थी।
थोड़ी देर बाद मुझे अपने लंड पर हल्का सा स्पर्श महसूस हुआ। यह स्पर्श इतना नाजुक था कि लगा कोई पंख छू रहा हो। मैंने आंखें खोलीं तो देखा अलका मेरी टांगों के बीच बैठी हुई थी। उसने एक हाथ में मेरा लंड पकड़ रखा था और दूसरे हाथ में तौलिया लेकर उसे साफ कर रही थी। उसकी उंगलियों का स्पर्श मधुर था, जैसे वह किसी कीमती चीज को संभाल रही हो। जैसे ही हमारी नजरें मिलीं, अलका ने शर्माते हुए मुस्कुराया और नजरें झुका लीं। उसकी आवाज में एक मधुर कंपन था जब वह बोली, “अंकल, लगता है यह इतनी मेहनत करके थक गया है!”
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा, उसके नरम बाल मेरी उंगलियों में फंस गए। मैंने कहा, “अरे नहीं अलका, मर्द कभी नहीं थकते! तेरा थोड़ा सा प्यार मिलते ही यह फिर से जवान हो जाएगा!” अलका ने लंड को देखते हुए कहा, “जानती हूं अंकल, पर देखो ना… यह अभी भी कितना बड़ा और मोटा लग रहा है!” फिर उसने लंड के टोपे पर एक कोमल चुंबन दिया, उसके होंठों की गर्माहट मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर गई। अलका बोली, “अंकल, कितना सुंदर है यह! दिल करता है इसे चूमती रहूं!”
मैं समझ गया कि अलका फिर से उत्तेजित हो गई है। उसकी आंखों में वही चमक थी जो सेक्स की भूख दर्शाती है। मैंने हंसते हुए उसका कंधा पकड़ा और उसे ऊपर उठाया। जैसे ही वह उठी, मैंने अपना हाथ उसकी जांघों के बीच रख दिया। वहां की गर्मी और नमी ने मेरी हथेली को गीला कर दिया। मैंने विजय की तरफ देखते हुए कहा, “ओ विजय! देखो, तुम्हारी बीवी श्रेया की गांड चुदाई देखकर गर्म हो गई!” विजय पास आया और अलका को देखने लगा।
मैंने अपनी उंगलियों पर लगा अलका का रस विजय को दिखाया। वह चिपचिपा और गर्म था। मैंने कहा, “देखो, साली की चूत कैसे टपक रही है!” विजय की आवाज में उत्तेजना थी जब वह बोला, “अंकल, बहुत गर्म है यह! साली की फाड़ डालो!” मैंने अलका को घुमाया और उसके चूतड़ अपनी तरफ कर लिए। उसकी गांड का छेद दिख रहा था, जो गुलाबी और संकरा था। मैंने उंगली से उसे छुआ तो अलका ने हल्का सा झुकाव दिया।
मैंने विजय से कहा, “अरे विजय, इसकी चूत तो मैं मार ही चुका, अब इसकी गांड खोलना जरूरी है! देखो तो कितनी टाइट है!” विजय ने सहमति में सिर हिलाया। मैंने अलका के चूतड़ पर एक थप्पड़ मारा, जिससे उसकी त्वचा पर लालिमा आ गई। मैंने कहा, “कोई बात नहीं, जितनी इसकी चूत तड़पेगी, उतनी मस्ती से यह अपनी गांड मरवाएगी!” विजय खुश होते हुए बोला, “अंकल, आपकी बात सही है, पर आपको नहीं पता इसमें कितनी आग है!”
मैंने अलका को अपनी गोद में बिठा लिया। उसके नरम चूतड़ मेरी जांघों पर टिक गए। मैंने उसके स्तन पकड़े, जो गर्म और भारी थे। मैंने विजय से कहा, “कोई बात नहीं विजय, तुम फिक्र मत करो। तुम्हारे हनीमून पर मैं इसकी चूत और गांड मार-मारकर इसको ठंडी कर दूंगा!” अलका ने मुस्कुराते हुए विजय के सिकुड़े हुए लंड को उंगली से हिलाया और शरारत से बोली, “जानू, अंकल सही कह रहे हैं! अब तुम्हें अपने इस नूनी से मेहनत करने की जरूरत नहीं। अंकल का मोटा और तगड़ा लंड है मेरे पास!”
अलका की बात पर हम तीनों हंस पड़े। तभी श्रेया ने फर्श से उठकर विजय को आवाज दी, “भइया, तौलिया देना तो!” विजय बाथरूम से तौलिया ले आया और श्रेया के शरीर को साफ करने लगा। श्रेया मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गई। उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली, “ओह डैडी! आपने तो मुझे बुरी तरह थका दिया! अब मुझे पेग की सख्त जरूरत है। मेरा पूरा बदन दुख रहा है!” मैंने विजय से पूछा कि क्या उनके कमरे में शराब है। विजय ने मना कर दिया और कहा कि वे लोग ड्रिंक नहीं करते।
मैंने श्रेया को आराम करने को कहा और खुद अलका को गोद से उतारकर तौलिया लपेटा। मैं अपने कमरे में गया और शराब की बोतल लेकर वापस आया। मैंने अलका को बोतल देते हुए कहा, “चल मेरी जान, सबके लिए पेग बना!” अलका ने बोतल पकड़ी, पर वह विजय की तरफ देखने लगी, जैसे वह कुछ समझ नहीं पा रही हो। मैंने श्रेया से कहा, “तुम इसकी मदद कर दो!” श्रेया बोली, “नहीं चाचू, मेरे में हिम्मत नहीं है। आप ही भाभी को पेग बनाना सिखा दो!”
श्रेया ने विजय से पूछा, “भइया, तुम भी पेग लोगे ना?” विजय ने कहा, “मैंने कभी शराब नहीं पी!” श्रेया ने अंगड़ाई ली और अपने स्तन उभारते हुए मुस्कुराई। वह बोली, “अरे भइया! शराब पीकर शवाब का स्वाद चखकर देखो, मजा आ जाएगा!” विजय चुप रहा। श्रेया फिर बोली, “देखना, अभी पापा तुम्हारी पत्नी की चूत में शराब भरकर पिएंगे, फिर उसको शराब पिलाकर उसकी गांड मारेंगे! तुम भी देखना कैसे तुम्हारी बीवी शराब पीकर उछल-उछल कर अपनी गांड मरवाएगी!” विजय ने कहा, “ठीक है, अगर आप पीओगी तो मैं भी ले लूंगा!”
मैंने अलका का हाथ पकड़ा और उसे टेबल के पास ले गया। टेबल कमरे के कोने में थी। वहां आते ही मैंने अलका को बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसे। उसके होंठ मुलायम और मीठे थे। मैंने कहा, “अलका, तुम बहुत सुंदर हो!” अलका कसमसाते हुए बोली, “थैंक्यू अंकल!” मैंने उसकी आंखों में देखकर पूछा, “सच बताओ, तुम मेरे से चुदवाकर खुश हो या नहीं?” अलका मेरे से चिपकते हुए बोली, “अंकल, आप सोच नहीं सकते मैं कितनी खुश हूं! मुझे आज तक कभी किसी के साथ इतना मजा नहीं आया।”
मैंने शरारत से कहा, “वो बेचारा क्या करे, तुम हो ही इतनी गर्म!” अलका बोली, “नहीं अंकल, उसके बस का नहीं है कि वह किसी लड़की को खुश कर सके। पर अंकल, आपके साथ तो लड़की होना क्या होता है, यह मैंने आज महसूस किया है!” मैंने अलका के चूतड़ पकड़े और उसकी गर्दन पर जीभ फिराई। मैंने कहा, “अलका, लड़की होने का मजा तो तुमने ले लिया। क्या तुम लड़की के अंदर की रंडी होने का मजा लेना चाहोगी?” अलका ने कसमसाते हुए कहा, “हां आह… सी… अंकल… उम्म्म्म… बिलकुल अंकल! मुझे आपसे हर मजा चाहिए!”
मैंने कहा, “ठीक है, फिर तुम यह भूल जाओ कि विजय तुम्हारा पति है। बस तुम यहां सिर्फ मेरी बनकर मजा लो!” अलका ने मेरी कमर में लिपटे तौलिये की गांठ खोल दी। तौलिया नीचे गिर गया। अलका ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे अपनी चूत से रगड़ने लगी। वह बोली, “अम्म्म्म… आह… ठीक है अंकल! जैसा आप कहोगे मैं वैसा ही करूंगी!” मैंने अलका को छोड़कर टेबल पर रखे गिलास सीधे किए और चार पेग बनाए। मैंने श्रेया का पेग सबसे बड़ा रखा, अपना मीडियम और अलका-विजय का सबसे छोटा।
फिर मैंने अलका को ट्रे उठाने को कहा। वह मेरे लंड को अपनी चूत से जोर से रगड़ते हुए बोली, “रुको ना अंकल, दो मिनट बस!” मैंने कहा, “अलका, लंड लेने का दिल है ना?” अलका बोली, “हां अंकल, बहुत!” मैंने कहा, “बस थोड़ी देर सब्र करो, फिर मैं तुम्हें बहुत मजा दूंगा!” अलका ने लंड छोड़ दिया और थोड़े गुस्से से बोली, “ठीक है अंकल, आपकी मर्जी!” मैंने उसे समझाया, “मेरी जान, पूरा मजा चाहिए ना?” वह सिर हिलाकर बोली, “हां अंकल!” मैंने कहा, “फिर गुस्सा छोड़ो और थोड़ी देर इंतजार करो!” अलका चुपचाप ट्रे उठाकर चल पड़ी। मैं उसके पीछे-पीछे चला और उसके उछलते चूतड़ देखने लगा।