हॉस्टल के अंधेरे में जागा एक नया प्यार: साहिल और एजाज की गुप्त कहानी

हॉस्टल का वह छोटा सा कमरा, जहाँ हवा का एक झोंका भी आसानी से नहीं आ पाता था, आज मेरी दुनिया बदलने वाला था। एजाज, मेरा रूममेट, जिसके साथ मैं महीनों से सिर्फ दोस्ती का रिश्ता निभा रहा था, आज उसके प्रति मेरे मन में एक अजीब सी खिंचाव पैदा हो गई थी। मेरी नज़रें बार-बार उसकी ओर खिंचती थीं, उसकी हरकतों में एक अलग ही आकर्षण दिखाई देने लगा था। शायद यह प्यार था, या फिर सिर्फ शारीरिक आकर्षण, मैं खुद भी समझ नहीं पा रहा था। मेरे मन में एक अजीब सी इच्छा उमड़ रही थी—उसके साथ नज़दीकी बढ़ाने की, उसे छूने की, उसके शरीर को महसूस करने की। लगता था जैसे एजाज के मन में भी कुछ ऐसा ही चल रहा हो, पर वह कुछ कह नहीं रहा था, और मैं भी अपनी भावनाओं को शब्द देने से डर रहा था।

एक दिन, मैंने एक ऐप के ज़रिए लड़कों से बात करनी शुरू की, जहाँ मैं खुद को छुपाकर दूसरों से जुड़ रहा था। मुझे नहीं पता था कि उसी ऐप पर एजाज भी मौजूद था, और वह मेरी पहचान जानते हुए भी मुझसे अंधेरे में जुड़ गया। जब यह राज खुला, तो मैंने थोड़ा रूठने का नाटक किया, लेकिन असल में मेरा दिल खुशी से झूम उठा था। एजाज ने मुझे चूमना शुरू किया, और उस पल ने हमारे रिश्ते को एक नई दिशा दे दी। उसकी होंठों की नर्मी, उसकी साँसों की गर्माहट—सब कुछ मेरे लिए एक नई दुनिया की शुरुआत थी। हम दोनों उस पल में खो गए, बिना किसी शब्द के, सिर्फ महसूस करते हुए।

एजाज ने धीरे से पूछा, “अब बोलोगे कि नहीं?” मैं मुस्कुरा दिया और बोला, “नहीं…” मेरी इस जिद ने उसे और उत्तेजित कर दिया। उसने फिर से मेरे होंठों को अपने होंठों से छुआ, और इस बार उसका चुंबन और गहरा हो गया। हम दस मिनट तक लगातार चुंबन लेते रहे—कभी उसके होंठ मेरे मुँह में, कभी मेरे होंठ उसके मुँह में। हर पल एक नया एहसास लेकर आ रहा था। फिर उसने फिर पूछा, “अब?” मैंने कहा, “सोचकर बताऊँगा,” और एक चालाक सी मुस्कान बिखेर दी। एजाज ने कहा, “कमीने, तूने यह सब मुझसे करवाने के लिए यह नाटक किया था ना?” मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “मैं उसमें सफल भी हो गया!”

इसके बाद, हमारे बीच का तनाव और बढ़ गया। एजाज ने धीरे से मेरे लोअर का रिबन खोला और मेरे कपड़ों को नीचे गिरा दिया। मैंने भी उसकी शर्ट उतार दी, और जल्द ही हम दोनों सिर्फ अपनी चड्डी में रह गए। हॉस्टल के इस छोटे से कमरे में गर्मी बढ़ रही थी, और पसीने की बूंदें हमारे शरीरों पर चमक रही थीं। एजाज ने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे ऊपर आ गया। हमारे शरीर एक-दूसरे से चिपक गए, और हमारे होंठ फिर से जुड़ गए। हमारे बीच की दूरी धीरे-धीरे खत्म हो रही थी, और हर छूअन एक नया स्पर्श लेकर आ रही थी।

मैं बेड पर लेटा था, और एजाज मेरे ऊपर था। मैंने अपना हाथ उसकी चड्डी में डाला और उसके चूतड़ों को महसूस किया। उसकी त्वचा एकदम मखमल जैसी चिकनी और नर्म थी। मैं जोर-जोर से उसके चूतड़ दबाने लगा, और मेरा लंड उत्तेजना से सख्त हो गया। एजाज की गांड मेरे लंड के बिल्कुल पास थी, और उसकी गर्माहट मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मैंने उसकी चड्डी निकाल दी, और अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। एजाज मेरे पैरों के बीच बैठ गया और उसने मेरी चड्डी भी नीचे सरका दी।

एजाज उठा और सरसों का तेल ले आया। उसने मुझसे कहा, “साहिल, आज तुम मुझे अपना बना लो!” मैंने पूछा, “अच्छा जी… अपना बना लूँ, वह कैसे?” उसने जवाब दिया, “ये तुम्हारा लंड खड़ा है न… इसका सीमेन मेरी गांड में डाल दो… प्लीज जानू, आज मेरे साथ सो जाओ… आई लव यू डियर साहिल!” मैंने कहा, “कंडोम नहीं है मेरे पास… तुम्हारे पास हो तो बताओ!” उसने हँसते हुए कहा, “कंडोम का क्या करोगे? हम दोनों को कौन सा कोई रोग है?” मैंने मज़ाक में कहा, “हाँ है तो नहीं… लेकिन तुम प्रेग्नेंट हो जाओगे मेरे स्पर्म निकल गया तो!” उसने हँसकर जवाब दिया, “कोई बात नहीं, मैं तुम्हारा ही तो हूँ।”

हम दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी। एजाज ने कहा, “बिना कंडोम के जब लंड गांड में घुसता है… तब गांड में गर्म गर्म अहसास होता है और बहुत मज़ा आता है!” अब मैंने एजाज को बेड पर लेटाया और उसकी गांड पर तेल लगा दिया। फिर मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया और उसकी गांड में उँगली करने लगा। वह आह भरते हुए कराह रहा था। मैंने कहा, “जानू, बहुत दर्द होगा, पहली बार है न… प्लीज सह लेना!” उसने जवाब दिया, “आराम से करना… वैसे मैंने अपनी गांड में मोटा बट प्लग लगाकर गांड को ढीला किया है।” मैंने उसे चूमते हुए कहा, “वाह, यह तो बहुत अच्छी बात है… मैं बड़े आराम से तुम्हारी गांड मारूँगा… अब तो तुम जान हो मेरी!”

मैंने उसके पैर फैलाए और धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी मुलायम गांड के छेद पर टच किया। लंड के स्पर्श से वह पहले तो चिहुँका, फिर अपनी गांड को लंड से खुद ही सटाने लगा। मैंने लंड को छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया। हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। एजाज एकदम मछली की तरह मचल रहा था। उसने कहा, “साले, डाल न… कितना तड़पाएगा?” मैंने लंड को उसकी गांड पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालना शुरू किया। एजाज एकदम से चिल्लाने लगा, तो मैं झुककर उसे चूमने लगा और लंड को गांड से निकलने नहीं दिया। जब उसका दर्द कम हुआ, तो मैंने लंड को निकाला, थोड़ा और तेल लगाया, और फिर से डालना शुरू किया।

मेरा साढ़े सात इंच का लंड उसकी गांड में घुसने लगा। उसे बहुत दर्द हो रहा था; उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं उसे चूमे जा रहा था, और उसके होंठ मेरे होंठों में फँसे थे। वह चिल्ला भी नहीं पा रहा था। मुझे अपने मोटे लंड को उसकी गांड की जड़ तक पहुँचाने में करीब पाँच मिनट लग गए। फिर लंड को उसकी गांड में डालकर मैं रुक गया और उससे चुंबन करता रहा। करीब पंद्रह मिनट बाद, जब उसकी तरफ से मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी, तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों से हटाए। अब उसने अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे। मैंने पूछा, “ज्यादा दर्द हो रहा? निकाल लूँ?” उसने कहा, “नहीं… अब नहीं हो रहा। बस ऐसे ही डाले रहो… मज़ा आ रहा है!”

मैंने कहा, “कमीने हरामखोर बकचोद… सीधे-सीधे बोल न कि मज़ा आ रहा है! अभी देख, कैसे और ज्यादा मज़ा आता है!” मैंने अपना लंड गांड से बाहर निकाला और फिर से एक बार में पूरा डाल दिया। हमारे होंठ जुड़े हुए थे, तो उसकी चीख नहीं निकली, लेकिन उसे बहुत तेज़ दर्द हुआ। फिर मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया। पूरे कमरे में आवाज़ें गूँज रही थीं—पछ-पछ… आह-आह। उस समय हॉस्टल में कोई नहीं था, सब बाहर थे। करीब दस मिनट तक मैंने उसे ऐसे ही चोदा। फिर मैंने उसे करवट लेने को कहा। मैं उसके पीछे लेट गया और उसके एक पैर को उठाकर अपने ऊपर रखा। अपने लंड को वापस उसकी गांड में डाला और फिर से चुंबन करते हुए सेक्स करने लगा।

करीब पंद्रह मिनट तक एजाज की चुदाई चलती रही। फिर मैं बेड पर सीधा लेट गया, और एजाज मेरे लंड को अपनी गांड में डालकर बैठ गया। वह मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगा। कुछ और मिनट के बाद, मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने उससे कहा, “मेरा निकलने वाला है… हट जाओ!” वह बोला, “मैं अन्दर ले लूँगा!” मैंने कहा, “साली, प्रेग्नेंट हो जाओगी!” वह हँसकर बोला, “ठीक है। वैसे भी सुहागरात वाले सारे काम हो ही रहे हैं!” मैंने उसे अपने नीचे कर लिया, और मैं ऊपर हो गया। फिर दो मिनट बाद, चोदते-चोदते मेरा सारा स्पर्म उसकी गांड के अन्दर चला गया।

मैं उसकी गांड में लंड डाले हुए ही उसके बगल में लेट गया। हम दोनों थक गए थे, तो कुछ पता ही नहीं लगा कि हमारी आँख कब लग गई। हम दोनों वैसे ही नंगे सो गए। इतनी देर की चुदाई के बाद थक तो वैसे ही गए थे। मेरा लंड एजाज की गांड पर वैसे ही पड़ा था। कर

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