उस दोपहर की शांति में घर का वातावरण सामान्य से अधिक शांतिपूर्ण लग रहा था। पिताजी बाज़ार गए हुए थे, और माँ अपने कमरे में विश्राम कर रही थीं। मैं धीरे से उनके कमरे में प्रवेश किया, उनके चेहरे पर थकान के हल्के निशान देखे। जब मैंने उनकी तबीयत के बारे में पूछा, तो उन्होंने पैरों में दर्द की शिकायत की। मैंने तुरंत उनके पैर दबाने का प्रस्ताव रखा, और वे मुस्कुराते हुए राजी हो गईं। उनकी मुस्कान में एक अजीब सी चमक थी, जैसे कोई गहरा रहस्य छुपा हो।
तेल की बोतल लेते हुए मैंने उनके पैरों पर हल्के हाथों से मालिश शुरू की। कमरे में तेल की सुगंध फैलने लगी, और धीरे-धीरे माँ के शरीर की जकड़न कम होती गई। मैंने देखा कि तेल उनकी साड़ी पर लग रहा है, तो मैंने साड़ी थोड़ा ऊपर करने का सुझाव दिया। माँ की आँखों में एक चंचल चमक आई, और उन्होंने मुझे ही करने के लिए कहा। उनकी इस हामी में एक अटूट विश्वास था, जैसे हमारे बीच की सारी सीमाएँ धुंधली हो चुकी थीं।
जैसे ही मैंने साड़ी ऊपर की, उनकी गोरी जाँघें दिखाई दीं। त्वचा चिकनी और कोमल थी, मोमबत्ती की लौ की तरह चमकती हुई। मालिश करते-करते मेरे हाथ अनजाने में उनकी पैंटी के पास पहुँच गए। माँ के मुँह से एक मादक सिसकारी निकली, जिसने कमरे के वातावरण को एकदम बदल दिया। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस आँखें बंद करके मालिश का आनंद लेती रहीं। मेरी हिम्मत बढ़ गई, और मैंने पूरी साड़ी उतारने का सुझाव दिया।
माँ ने बिना किसी हिचकिचाहट के साड़ी और पेटीकोट उतार दिए। अब वे सिर्फ ब्लाउज़ और पैंटी में थीं। उनकी जाँघों पर तेल लगाते हुए मैंने महसूस किया कि उनकी त्वचा गर्म हो रही है। मेरा हाथ धीरे-धीरे पैंटी के अंदर सरक गया, और मैंने उनकी कोमल त्वचा को सहलाना शुरू किया। माँ की साँसें तेज़ हो गईं, उनके होठों से मादक आवाज़ें निकलने लगीं। कमरे में यौन उत्तेजना का वातावरण घनीभूत होता जा रहा था।
मैंने सीधे शब्दों में पैंटी उतारने की बात कही। माँ शर्मा गईं, उनके गालों पर लालिमा छा गई। लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वे इस पल का इंतज़ार कर रही थीं। उन्होंने मुझे ही उतारने के लिए कहा, और मैंने फटाक से पैंटी उतार दी। अब माँ नीचे से पूरी तरह नंगी थीं, और उनकी योनि स्पष्ट दिखाई दे रही थी। मैंने खूब सारा तेल लिया और उनकी योनि पर रखकर मालिश शुरू की।
माँ की आवाज़ें और तेज़ हो गईं। उन्होंने अपनी टाँगें पूरी तरह फैला दीं, और मालिश का आनंद लेने लगीं। मैंने देखा कि उनकी योनि के आसपास घने बाल हैं, तो मैंने मज़ाक में उन्हें साफ़ करने की बात कही। माँ हँसते हुए बोलीं कि अगली बार जलील अंकल से मिलने से पहले साफ़ कर लेंगी। मैंने और आगे बढ़ते हुए खुद साफ़ करने का प्रस्ताव रखा। माँ ने नाटकीय गुस्सा दिखाया, लेकिन उनकी आँखों में हँसी छिपी थी।
जब मैंने कहा कि मैं उसी जगह से निकला हूँ, तो माँ जोर से हँस पड़ीं। उन्होंने बताया कि मैं ऑपरेशन से पैदा हुआ था। इस पर हम दोनों हँसते रहे, और फिर माँ ने मज़ाक में पूछा कि मैं बाल कैसे साफ़ करूँगा। मैं तुरंत अपने कमरे में गया और ट्रिमर व रेज़र लेकर आया। मैंने पहले ट्रिमर से बाल छोटे किए, फिर रेज़र से साफ़ किया। सिर्फ योनि के ऊपर एक पतली लाइन छोड़ी, जिसे फ्रेंच कट कहते हैं।
माँ ने जब देखा तो पूछा कि ऊपर कुछ बाल क्यों छोड़े हैं। मैंने समझाया कि यह फ्रेंच कट डिज़ाइन है, जो पोर्न फिल्मों में दिखाया जाता है। माँ ने मज़ाक में कहा कि वह पोर्न हीरोइन नहीं हैं। मैंने उनकी तारीफ़ करते हुए कहा कि उनकी गोरी योनि पर काले बाल बहुत सुंदर लग रहे हैं। यह सुनकर माँ फिर हँसने लगीं। उनकी चिकनी योनि देखकर मैं उत्तेजित हो गया, और फिर से तेल लगाकर मालिश शुरू की।
पाँच मिनट बाद मैं खुद को रोक नहीं पाया और अपनी उँगली धीरे से उनकी योनि में डाल दी। माँ उछल पड़ीं, लेकिन फिर मादक सिसकारियाँ लेने लगीं। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, और वे मेरी उँगली के हर हरकत का आनंद लेने लगीं। पूरे पाँच मिनट तक यह सिलसिला चला, और अंत में माँ संतुष्ट होकर शांत लेट गईं। मैंने कपड़े से उनकी योनि साफ़ की और पीठ की मालिश का प्रस्ताव रखा।
माँ पेट के बल लेट गईं। उनकी विशाल नितंब देखकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैं एक हाथ से अपना लिंग थामे हुए था, और दूसरे हाथ से उनके नितंबों की मालिश कर रहा था। माँ ने मज़ाक में डाँटा, लेकिन फिर कहा कि उन्हें अच्छा लग रहा है। मैंने उनके नितंब पर एक जोरदार चुंबन दिया, जिससे वे चौंक गईं। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो मैं अपना लिंग थामे हुए खड़ा था।
माँ ने नाटकीय गुस्सा दिखाया, लेकिन फिर हँसते हुए कहा कि कोई बात नहीं। मैंने पीठ की मालिश शुरू की और ब्लाउज़ उतारने को कहा। माँ ने ब्लाउज़ उतार दिया और ब्रा का हुक खोलने को कहा। जैसे ही मैंने ब्रा उतारी, उनके स्तन स्वतंत्र हो गए। वे गोल और भारी थे, मैं उन्हें देखकर मदहोश हो गया। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थाम लिया, और माँ ने मुझे रोकने की कोशिश की। लेकिन फिर वे शर्माते हुए मुस्कुरा दीं।
मैंने पीठ की मालिश शुरू की, तभी मुझे उनकी पीठ पर छिली हुई त्वचा दिखाई दी। मैंने पूछा तो माँ ने बताया कि जलील अंकल ने बाग में ज़मीन पर रगड़कर संभोग किया था। मैं गुस्से में बोला कि अब वे बाग में नहीं जाएँगी। माँ ने हँसते हुए कहा कि फिर उनकी प्यास कैसे बुझेगी। तभी जलील अंकल का फोन आ गया। मैंने स्पीकर ऑन कर दिया। जलील ने मीठी आवाज़ में माँ से बात की, और मिलने की जिद की। माँ ने मना किया, और कहा कि मैंने रोक दिया है। जलील ने गिड़गिड़ाते हुए मुझसे बात की। मैंने सख्ती से कहा कि माँ अब कभी नहीं मिलेंगी, और फोन काटकर नंबर ब्लॉक कर दिया। इस घटनाक्रम ने हमारे रिश्ते में एक नया मोड़ ला दिया था।