मेरा नाम सुमित है और मैं इंदौर शहर का रहने वाला हूँ। तेईस वर्ष की उम्र में मैंने अभी-अभी अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है और कुछ महीने पहले ही अपने घर वापस लौटा हूँ। हॉस्टल के जीवन के बाद घर की शांति और सुकून में समायोजित होने की कोशिश कर रहा था। मैं एक साधारण दिखने वाला युवक हूँ, पर नियमित जिम जाने की वजह से मेरा शरीर सुडौल और ताकतवर बना हुआ है। मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती है जिसका नाम प्रांजलि है। वह सांवले रंग की है और उसकी कद-काठी बेहद आकर्षक है। उसके उभरे हुए स्तन और गोल मटोल नितंब उसे देखने वाले किसी भी युवक का ध्यान खींच लेते हैं। जब वह चलती है तो उसके नितंबों का हिलना एक लयबद्ध नृत्य सा प्रतीत होता है।
चार महीने पहले की एक सामान्य सुबह थी जब प्रांजलि किसी काम से मेरे घर आई। दरवाज़ा खोलते ही हमारी नज़रें मिल गईं और मैं उसकी ओर देखता रह गया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उसके होंठों पर मंद मुस्कान तैर रही थी। उसने ‘हाय’ कहा और हाथ बढ़ाया। जैसे ही मैंने उसका हाथ अपने हाथों में लिया, एक विद्युत सी धारा मेरे शरीर में दौड़ गई। उसकी उंगलियों का स्पर्श नरम और गर्म था। वह चली गई पर उसकी छवि मेरे मन में बस गई। उस रात मैं उसके बारे में सोचता रहा और अपनी कल्पनाओं में खोया रहा।
अगली सुबह मेरी माँ ने मुझे जगाया और बताया कि प्रांजलि के भाई शहर से बाहर गए हैं, इसलिए मुझे उसे कॉलेज छोड़ने जाना है। यह सुनकर मेरा दिल धड़कने लगा। मैं तुरंत तैयार हो गया। जब प्रांजलि आई तो वह और भी खूबसूरत लग रही थी। उसने नीले रंग की जीन्स और एक फिटिंग वाली टी-शर्ट पहनी हुई थी जो उसके घुमावदार शरीर को और भी उभार रही थी। उसकी आवाज़ में एक अलग सी मिठास थी जब उसने कहा, “प्लीज, मुझे जल्दी छोड़ दो, मैं लेट हो रही हूँ।” मैंने अपनी बाइक निकाली और उसे पीछे बैठाया। सड़क पर चलते हुए मैंने जानबूझकर कई बार ब्रेक लगाए ताकि उसके स्तन मेरी पीठ से टकराएँ। हर टकराहट पर मुझे एक अजीब सी रोमांचक अनुभूति होती थी।
उस दिन के बाद से हमारी मुलाकातें बढ़ने लगीं। छोटी-छोटी बातों के बहाने हम एक-दूसरे के करीब आते गए। फिर एक दिन ऐसा आया जब मेरे घर वाले किसी रिश्तेदार की शादी में चले गए और मैं अकेला घर पर रह गया। मैंने सोचा कि क्यों न कुछ अश्लील फिल्में देखी जाएँ। लैपटॉप पर फिल्म चल रही थी कि अचानक दरवाज़े की घंटी बजी। दरवाज़ा खोला तो सामने प्रांजलि खड़ी थी। वह अन्दर आई और बोली, “आंटी से कुछ काम था।” मैंने बताया कि सब बाहर गए हैं। वह जाने लगी तो मैंने उसे रोक लिया। मेरे मन में एक विचार कौंधा – आज का दिन वही है जब हमारे बीच का तनाव टूटेगा। मैंने उसे बैठने को कहा और फिल्म देखने का प्रस्ताव रखा।
प्रांजलि ने हिचकिचाते हुए हाँ कह दिया और मेरे पास सोफे पर बैठ गई। मैंने दरवाज़ा बंद किया और वापस आकर उसके पास बैठ गया। फिल्म के दृश्यों ने कमरे का माहौल गर्म कर दिया था। मैंने देखा कि प्रांजलि की साँसें तेज हो रही हैं और उसके गालों पर लालिमा छा गई है। वह उठकर जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – डर और उत्सुकता का मिला-जुला भाव। मैंने उसके करीब जाकर कहा, “प्रांजलि, मैं तुम्हें पसंद करता हूँ।” वह कुछ पल चुप रही फिर बोली, “मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ, पर…” उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैंने उसे चूम लिया।
पहले तो वह हल्का सा विरोध करने लगी, पर फिर उसने भी जवाब देना शुरू कर दिया। हमारा चुंबन गहरा होता गया। मैंने धीरे से उसकी टी-शर्ट उतार दी। नीले रंग की ब्रा में वह और भी आकर्षक लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा खोली तो उसके स्तन बाहर आ गए। वे गोल, उभरे हुए और आकर्षक थे। मैंने एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया। प्रांजलि की साँसें तेज हो गईं और वह मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फँसाने लगी। फिर मैं उसे उठाकर बेडरूम में ले गया। वहाँ मैंने उसकी जीन्स उतार दी। काले रंग की पैंटी में उसका शरीर और भी भड़कीला लग रहा था।
मैंने धीरे से उसकी पैंटी उतार दी। अब वह पूरी तरह नग्न थी। उसकी जाँघें मोटी और आकर्षक थीं। मैंने उसकी योनि को चूमना शुरू किया। वह मुझे अपनी जाँघों से दबाने लगी। कुछ देर बाद मैंने अपने कपड़े उतारे। जब उसने मेरा लिंग देखा तो वह डर गई। वह बोली, “यह इतना बड़ा कैसे अंदर जाएगा? मेरी जान निकल जाएगी!” मैंने उसे समझाया और धीरे से उसकी योनि में प्रवेश किया। पहले धक्के के साथ ही वह चिल्ला उठी। आँसू उसकी आँखों से बहने लगे। मैंने रुककर उसे चूमा और प्यार से सहलाया। धीरे-धीरे उसका दर्द कम हुआ और वह शांत हो गई।
फिर मैंने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। प्रांजलि भी अब आनंद ले रही थी। वह मेरे साथ तालमेल बिठाने लगी। करीब बीस मिनट तक हम एक-दूसरे में लीन रहे। जब मैंने अपना वीर्यस्खलन किया तो उसकी जाँघों पर निकाल दिया। हम दोनों थककर चूर हो गए थे। प्रांजलि मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी थी। उसने कहा, “मैं यह पल कभी नहीं भूलूँगी।” शाम तक हम दोनों ने फिर से संभोग किया। रात को जब मैं सोने जा रहा था तो उसका फोन आया। वह बोली, “छत पर आओ।” मैं छत पर गया तो वह नाइटी में खड़ी थी। चाँदनी रात में वह और भी खूबसूरत लग रही थी। हमने फिर से प्रेम किया।
आज मैं नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर में रहता हूँ, पर जब भी इंदौर आता हूँ तो प्रांजलि से मिलता हूँ। हमारा रिश्ता और गहरा हो गया है। वह अब पहले से भी ज्यादा आत्मविश्वासी और खूबसूरत लगती है। उसकी सहेलियों को भी हमारे रिश्ते के बारे में पता चल गया है। यह मेरा पहला गहरा यौन अनुभव था जिसने मेरे जीवन को बदल कर रख दिया। प्रांजलि और मेरे बीच का यह रिश्ता आज भी जारी है, और हर मुलाकात नए रोमांच और नए अनुभवों से भरी होती है।