गर्मी की दोपहर और एक भाभी की प्यास
जून का महीना था और पटना की गर्मी अपने चरम पर थी। सूरज आग बरसा रहा था, ऐसा लग रहा था मानो आसमान से अंगारे बरस रहे हों। मैं, मोहन, केबल कंपनी के लिए पैसे वसूलने का काम करता हूं। उस दिन मेरा लक्ष्य शहर के एक पुराने सरकारी आवासीय भवन था, जहां दस परिवार … Read more