सर्द रात में पहली बार: एक वर्जिन की गाँव वाली कहानी

दिल्ली की रहने वाली पूजा अपने चौबीस साल के जीवन में हमेशा से ही अकेली और शर्मीली रही थी। उसका शरीर भरा हुआ था, आकर्षक आकृति वाली, पर उसका मन हमेशा एक अजीब सी उदासी और अकेलेपन से भरा रहता। वह अक्सर अपनी बहनों और सहेलियों की गप्पों को सुनती, जब वे अपने प्रेमियों के साथ बिताए पलों का रोमांचक ब्योरा साझा करतीं। उनकी आँखों में चमक और चेहरे पर एक विशेष प्रकार की तृप्ति देखकर पूजा के मन में एक गहरी ईर्ष्या और जलन पैदा होती। उसे लगता जैसे वह जीवन के एक महत्वपूर्ण स्वाद से वंचित है, एक ऐसा अनुभव जो सभी को मिल रहा है सिवाय उसके। रातों को अकेले में, वह अपने नरम बिस्तर पर लेटकर कल्पनाओं के सहारे उस शून्यता को भरने की कोशिश करती, पर हर बार खालीपन और बढ़ती इच्छा ही हाथ लगती।पूजा का परिवार बड़ा था। पिता एक निजी कंपनी में काम करते थे। बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी, और दो छोटी बहनें व एक भाई थे। बड़ी बहन, जिसकी शादी से पहले ही एक गहरा रिश्ता अपने ऑफिस के साथी के साथ था, अक्सर थकी हुई और संतुष्ट लौटती। पूजा उसकी चूड़ियों की खनक और आवाज़ में आई सुस्ती को पहचान लेती। एक शाम जब बहन ब्रा-पैंटी में ही फोन पर किसी सहेली से बात कर रही थी, तो उसके शब्द साफ सुनाई दिए, ‘आज तो साले ने जबरदस्त रगड़ दिया है… फाड़ कर रख दी!’ यह सुनकर पूजा का दिल एक अजीब से दर्द से भर गया। उसे लगा जैसे उसकी अपनी बहन भी उसकी इस तड़प को नहीं समझती, उसकी इस अकेली लड़ाई में साथ नहीं देती।अचानक एक दिन गाँव से दादाजी के निधन का समाचार आया। पूजा और उसका पूरा परिवार शोक संतप्त होकर गाँव पहुँचा। अंतिम संस्कार के बाद का माहौल उदास और शांत था। गाँव की धीमी गति वाली ज़िंदगी में, जहाँ शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता, पूजा की मुलाकात पड़ोस के एक युवक से हुई। वह देहाती था, शरीर से मजबूत और बातचीत में सीधा। पूजा के शर्मीलेपन और चुप्पी को उसने कुछ और न समझकर, शायद उसकी तरफ आकर्षण ही समझा। उसकी मज़बूत भुजाओं और सीधे स्वभाव ने पूजा के भीतर दबी इच्छाओं को हवा दी। एक दिन उसने सीधे तौर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कर दीं। पूजा पहले तो चौंकी, पर फिर अपने अकेलेपन और तीव्र इच्छा ने उसे हाँ कहने पर मजबूर कर दिया।बातचीत धीरे-धीरे अधिक व्यक्तिगत होती गई। वह युवक सीधे-सादे ढंग से पूछ बैठा कि क्या पूजा ने पहले कभी शारीरिक संबंध बनाए हैं। पूजा शर्म से लाल हो गई, फिर धीरे से अपनी कुंवारी स्थिति स्वीकार की। यह सुनकर वह युवक खुश हो उठा। गाँव में रातें जल्दी सो जाती थीं, और सर्दियों का मौसम था। उसने एक योजना बनाई। उसने पूजा से कहा कि वह रात में दस बजे के बाद अपने घर की छत पर आ जाए। चूँकि दोनों के घर सटे हुए थे, वह दीवार फाँदकर आसानी से आ सकता था। पूजा का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर और उत्सुकता का एक अजीब मिश्रण उसके भीतर उबल रहा था। उसने मन ही मन ठान लिया कि आज रात वह इस अनुभव से गुज़रेगी, चाहे कुछ भी हो जाए।ठंडी रात थी, चाँदनी आसमान में चमक रही थी। पूजा डरते-डरते छत पर पहुँची और आने वाले दरवाज़े की साँकल लगा दी। जैसे ही वह छत पर पहुँची, उस युवक ने उसे देख लिया और फुर्ती से दीवार पार करके उसके पास आ गया। उसने पूजा को दीवार की आड़ में खींचा और उसके होंठों को अपने होंठों से ढक लिया। यह पूजा का पहला चुंबन था। शुरुआती डर के बाद, एक गर्माहट उसके शरीर में फैलने लगी। उस युवक ने पूजा के कुर्ते के ऊपर से ही उसके स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया, फिर मुँह से चूसने लगा। पूजा का शरीर एक अजीब सी सिहरन से भर गया, उसकी इच्छाएँ और तीव्र हो उठीं।उसने छत पर पड़ी एक पुरानी कथरी बिछाई और पूजा को उस पर लिटा दिया। सर्द हवा के झोंके ने पूजा के नंगे शरीर को छुआ, उसकी त्वचा पर रोंगटे खड़े हो गए। चाँदनी में उसका शरीर और भी आकर्षक लग रहा था। तभी उस युवक ने अपना पजामा उतारा और अपना कड़ा लिंग पूजा के हाथ में थमा दिया। पूजा पहली बार इतने नज़दीक से किसी पुरुष अंग को देखकर भौंचक्की रह गई, उसका हाथ काँप उठा। पर उस युवक ने उसका हाथ पकड़कर धीरे-धीरे सहलाना सिखाया। फिर वह नीचे सरककर पूजा की सलवार खोलने लगा। पूजा ने जानबूझकर उस रात अंडरवियर नहीं पहनी थी, यह देखकर वह युवक मुस्कुरा दिया।उसने पूजा की टाँगें फैलाईं और अपना मुँह उसकी योनि पर रख दिया। पूजा के शरीर में बिजली-सी दौड़ गई। यह एकदम नया, तीव्र और मादक अनुभव था। उसकी सहेलियों ने इसके बारे में बताया था, पर अनुभव करना कुछ और ही था। वह युवक अपनी जीभ से उसकी योनि को उत्तेजित करने लगा। पूजा की योनि से प्राकृतिक स्राव बहने लगा, जो ठंडी हवा में और भी गर्म महसूस हो रहा था। पूजा मस्ती में डूबने लगी, उसने अपनी कमर को हल्का उठाकर उस सुख को और गहरा करने की कोशिश की।फिर वह क्षण आया। उस युवक ने अपना लिंग पूजा की योनि के प्रवेश द्वार पर रखा और एक जोरदार झटके के साथ अंदर धकेल दिया। एक तीव्र, चीरते हुए दर्द ने पूजा के पूरे शरीर को जकड़ लिया। उसके मुँह से एक दर्द भरी चीख निकल पड़ी। पर उस युवक ने तुरंत उसका मुँह बंद कर दिया और कड़क स्वर में कहा कि चुप रहो, नहीं तो मुसीबत हो जाएगी। पूजा की आँखों से आँसू बहने लगे, और उसकी योनि से खून रिसने लगा। वह दर्द से तड़प रही थी, पर उस युवक ने रुकने का नाम नहीं लिया। वह लगातार गति करता रहा, और धीरे-धीरे, अजीबोगरीब तरीके से, दर्द कम होने लगा और उसकी जगह एक नई सनसनी, एक गहरी तृप्ति की भावना ने ले ली।लगभग चालीस मिनट तक चले इस संभोग में, पूजा ने खुद को एक नई औरत के रूप में खोजा। ठंडी हवा, चाँदनी, और शरीर की गर्मी का मिश्रण जादुई लग रहा था। उस युवक ने उस रात तीन बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, हर बार अपना वीर्य उसकी योनि में छोड़ा। जब सुबह हुई, तो पूजा का शरीर टूट रहा था, चलने में कष्ट हो रहा था। बाथरूम के शीशे में देखा तो योनि सूजी हुई और लाल थी। पर उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और संतुष्टि थी। वह दर्द और सुख के मिश्रण से भरी हुई थी। गाँव में बाकी दिनों में भी, वह युवक उससे मिलता रहा, और हर बार का अनुभव पूजा के लिए नया और रोमांचक था। उसने खुद को पूरी तरह से उन क्षणों के लिए समर्पित कर दिया। अब वह वह लड़की नहीं रही थी जो अपनी उँगलियों के सहारे कल्पनाओं में जीती थी। उसकी कुंवारी दीवार टूट चुकी थी, और उसके पीछे एक ऐसी दुनिया खुली थी जो उसे डराती भी थी और आकर्षित भी करती थी। उसने सोचा कि अपनी इस कहानी को किसी के साथ साझा नहीं कर पाएगी, इसलिए उसने इसे लिख डाला, ताकि उसके भीतर का यह रहस्य और आनंद कहीं तो अभिव्यक्त हो सके।

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