शादी की रात और एक रहस्यमयी नृत्यांगना

नवंबर का महीना था, दीपावली के उत्साह के बाद की वह शांत शाम। मैं, प्रताप सिंह, मुरैना जिले का रहने वाला, अपने एक करीबी दोस्त की बहन की शादी में शामिल होने कोलारस पहुँचा था। रास्ते में देर हो गई थी, और जब मैं शादी वाले घर के सामने पहुँचा तो सूरज ढल चुका था। वहाँ का दृश्य एक जीवंत चित्रकारी सा था – रंग-बिरंगी लाइटें, ऊँची आवाज़ में बजता संगीत, और हँसते-बात करते लोगों की भीड़। हवा में मिठाइयों और फूलों की मिली-जुली खुशबू तैर रही थी। मैं अपनी सफेद कार से उतरा, अपने सूट-बूट में सजा हुआ। मेरा पतला-दुबला शरीर और गेहुँआ रंग उस रोशनी में चमक रहा था।

मेरे दोस्त ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। उसकी पारिवारिक इज्जत का यह आलम था कि उसने तुरंत मेरे लिए चाय और नाश्ते का प्रबंध करवा दिया। घर के सामने, सड़क के किनारे, एक डीजे लगा हुआ था, क्योंकि बाजार में जगह कम थी। मैं एक कुर्सी पर बैठ गया और आसपास के माहौल को निहारने लगा। तभी मेरी नज़र डीजे के प्लेटफॉर्म पर पड़ी। वहाँ एक लड़की नाच रही थी, संगीत की थाप पर अपने शरीर को लहराते हुए। वह उनके पड़ोस की लड़की थी, मैंने सुना। उसका पतला शरीर चमकदार साड़ी में लिपटा हुआ था, और हर मूवमेंट के साथ वह एक अजीब सी मादकता बिखेर रही थी।

वह नाचते-नाचते बार-बार मेरी तरफ देख रही थी। उसकी नज़रें सीधी और बेधक थीं, जैसे कोई सवाल पूछ रही हों। मैं भी उसे देखे बिना न रह सका। उसके चेहरे पर एक अलग तरह का आत्मविश्वास था, जो उसकी युवा उम्र के बावजूद परिपक्व लग रहा था। जब डांस खत्म हुआ, तो वह सीधे मेरे पास आई, हाथ में एक गिलास पानी लिए हुए। उसने शांत स्वर में पूछा, “प्यास लगी है?” मैंने हाँ में सिर हिलाया। उसने पानी दिया और बगल में ही एक कुर्सी खींचकर बैठ गई, बिना किसी शर्म या झिझक के।

धीरे-धीरे हमारी बातचीत शुरू हुई। मैंने उसका नाम पूछा। उसने एक पल की देर लगाई, फिर मुस्कुराते हुए कहा, “दिव्या।” मैं जानता था कि यह बदला हुआ नाम है, शायद गोपनीयता के लिए। उसका शरीर वाकई बहुत आकर्षक था – पतला, लेकिन सुडौल। उसने अचानक अपना फोन निकाला और सीधे-सीधे कहा, “अपना नंबर दे दो।” उसकी इस बेबाकी ने मुझे चौंकाया, लेकिन मैंने अपना नंबर डायल कर दिया। थोड़ी देर बातचीत के बाद, मैं खाना खाने चला गया। भीड़-भाड़ मुझे ज्यादा रास नहीं आती, इसलिए खाना खाकर मैं सीधे अपनी कार में जा बैठा, उस शोर-शराबे से दूर एकांत की तलाश में।

कार के अंदर का शांत माहौल अचानक मेरे फोन की एक झनझनाहट से टूटा। एक मैसेज था – “हेलो, कहाँ हो?” दिव्या का। मैंने जवाब दिया कि मैं अपनी कार में बैठा हूँ। उसने तुरंत लिखा, “कहाँ हो? यहाँ आ जाओ!” मैंने मना कर दिया और कहा कि अगर उसे आना है तो वह यहाँ आए। मैंने अपनी सफेद कार का वर्णन कर दिया। कुछ ही मिनटों में, वह धीरे से कार के दरवाजे खोलकर अंदर आ गई और सीट पर बैठ गई। कार के अंदर की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, और वह और भी खूबसूरत लग रही थी।

बातचीत फिर से शुरू हुई, लेकिन इस बार एक अलग ही गंभीरता और नजदीकी के साथ। मैंने पूछा, “तुम्हारा बॉयफ्रेंड है क्या?” उसने सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं, और ना ही कोई बनाना चाहती हूँ।” मैं हैरान था। फिर मैंने सीधा सवाल किया, “फिर मेरे पास क्यों आई हो?” वह मुस्कुराई, “आप मेरा डांस बहुत गौर से देख रहे थे।” मैंने कहा, “हाँ, तुम्हारा डांस बहुत अच्छा लग रहा था।” उसकी आँखों में एक चमक आ गई। “अच्छा? इतना अच्छा लग रहा था तो और करूँ? डांस देखोगे क्या?” मैंने मजाक में कहा, “अगर डांस ही करना है तो मेरी कार में कर लो, कार को ही डांस फ्लोर बना देते हैं!” वह खिलखिलाकर हँस पड़ी।

उसकी हँसी कार के अंदर गूँज उठी। फिर उसने गंभीर होकर पूछा, “तुम्हारी गर्लफ्रेंड है क्या?” मैंने कहा, “नहीं।” उसने मेरे काम के बारे में पूछा, और मैंने जवाब दिया कि मैं नौकरी करता हूँ। बातों-बातों में हम एक-दूसरे के और करीब आते गए। कार के अंदर की जगह छोटी थी, और हमारे बीच की दूरी भी उतनी ही सिमटती जा रही थी। हवा में तनाव था, एक अजीब सी उम्मीद और उत्सुकता का मिश्रण। आखिरकार, मैंने साहस जुटाकर साफ शब्दों में कह दिया, “मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है।” मैंने उसकी प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना चाहा, लेकिन उसने कोई हैरानी नहीं दिखाई।

उसने शांत स्वर में कहा, “यहाँ नहीं, कहीं बाहर चलकर करते हैं।” मैंने कहा कि मुझे इलाके की जगहें नहीं मालूम। उसने बताया कि पास में ही एक सरकारी स्कूल है, जहाँ रात में कोई नहीं आता। मैंने कार स्टार्ट की और उसके बताए रास्ते पर चल पड़ा। स्कूल का दरवाजा खुला था। मैंने कार अंदर लगाई, इंजन बंद किया, और चारों तरफ सन्नाटा छा गया। सिर्फ हमारी साँसों की आवाज़ और दूर से आती शादी की धुन की धीमी गूँज सुनाई दे रही थी। अँधेरे में, हम एक-दूसरे की तरफ देख रहे थे।

मैंने धीरे से उसकी ओर बढ़कर उसके होंठों को अपने होंठों से छुआ। पहला किस नाजुक और कोमल था, लेकिन जल्द ही वह गहरा और उत्सुक होता चला गया। वह मदहोश सी होने लगी, और उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए, और उसने भी मेरी मदद की। कार के अंदर की जगह तंग थी, लेकिन हमारी इच्छाएँ विशाल थीं। जल्द ही, हम दोनों अधनंगे थे। मैंने उसके शरीर का अन्वेषण करना शुरू किया, और वह हर स्पर्श पर एक कसमसाहट महसूस कर रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, और चेहरे पर एक गहरी तृप्ति की छाप थी।

जब मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया, तो उसने अचानक मेरे हाथ को रोक दिया। उसकी आँखों में एक पल के लिए डर दिखाई दिया। मैंने समझ लिया। मैंने कार के डैशबोर्ड से वैसलीन की डिब्बी निकाली, जो मैं हमेशा साथ रखता हूँ। मैंने उसे आश्वस्त करने की कोशिश की, और धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसे दर्द हुआ, और मैंने उसे चूमकर, उसके बालों में हाथ फेरकर सांत्वना दी। वह तनावपूर्ण थी, लेकिन विश्वास से भरी हुई। कुछ ही पलों में, हम एक हो गए। कार के अंदर का सीमित स्थान हमारी गतिविधियों में बाधक था, लेकिन उत्साह में कमी नहीं आई।

लगभग आधे घंटे तक, वह कार हमारे जुनून का गवाह बनी रही। आखिरकार, थकान और तृप्ति ने हमें घेर लिया। मैंने उसे साफ किया, और हम दोनों ने चुपचाप अपने कपड़े पहने। उसने एक शब्द भी बोले बिना, कार का दरवाजा खोला और अँधेरे में खो गई। मैं कार में ही रहा, उस रात की घटनाओं को दिमाग में दोहराते हुए। बाहर, शादी का समारोह अभी भी जारी था, लेकिन मेरी दुनिया अचानक बहुत शांत और अलग हो गई थी। यह एक अद्भुत, तीव्र और अविस्मरणीय अनुभव था, जो हमेशा मेरी यादों में ताजा रहेगा।

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