जिम्मेदारी का प्यार

भोपाल में रहने वाला सोहन अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा था। सरकारी नौकरी में होने के कारण उसके माँ-बाप सोहन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे, जिससे वह थोड़ा बिगड़ गया था। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन जैसे-जैसे सोहन बड़ा हुआ, उसकी पढ़ाई से ज़्यादा बदमाशी में रुचि बढ़ने लगी। उसकी माँ को सोहन की इस आदत से बहुत चिंता होने लगी।

हालात तब और बिगड़ने लगे जब सोहन नौवीं कक्षा में पहुँचा और मोहल्ले की मारपीट में फँस गया। उसकी दोस्ती ऐसे लड़कों से हो गई थी जो आवारागर्दी करते थे और जिनके पास देसी पिस्तौल भी होती थी। कभी-कभी सोहन भी उस पिस्तौल का इस्तेमाल कर लेता था, जिससे उसके अंदर से डर खत्म हो गया था। एक बार झगड़े में उसके दुश्मन ने सोहन का सर फोड़ दिया, जिसके जवाब में सोहन ने दोस्त की पिस्तौल से उस पर गोली चला दी। उस लड़के को अस्पताल ले जाया गया और सोहन थाने पहुँच गया।

सोहन के माँ-बाप को यह सब पता चला तो वे भी थाने पहुँचे। सोहन की कम उम्र और उसके पापा के रुतबे की वजह से उसे छोड़ दिया गया, लेकिन इस घटना ने सोहन के माता-पिता को अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें अपनी लापरवाही का एहसास हुआ। अब उन्होंने सोहन पर सख्ती बरतना शुरू कर दिया। उसकी माँ को स्कूल जाकर पता चला कि सोहन स्कूल जाता ही नहीं है और ना ही पढ़ाई करता है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।

सोहन के माता-पिता ने उस पर ध्यान देना शुरू किया, जिससे वह अपने पुराने दोस्तों से नहीं मिल पाता था। कुछ समय बाद, वे सोहन को लेकर दूसरे मोहल्ले में रहने चले गए, जहाँ उसकी उन लड़कों से दोस्ती टूट गई। हालांकि, अभी भी उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था, पर जैसे-तैसे उसने इंटर पास कर लिया। एक बार वह अपने चाचा के ससुराल गया, जहाँ उसे दो दिनों तक रुकना पड़ा। वहीं उसकी नज़र पड़ोस की एक लड़की पर पड़ी और वह उसे अपना दिल दे बैठा।

वह उस लड़की के चक्कर में जब भी मौका मिलता, चाचा के ससुराल पहुँच जाता था। धीरे-धीरे लड़की भी सोहन को पसंद करने लगी, और दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार। सोहन ने अब उस लड़की से शादी करने के लिए काम करना शुरू कर दिया। जिम्मेदारी का यह एहसास उसे एक नया इंसान बना रहा था। उसने मेहनत की और एक दिन उस लड़की से मंदिर में जाकर शादी कर ली, फिर उसे अपने घर ले आया।

एक बार फिर उसके मम्मी-पापा हैरान और परेशान थे, लेकिन अब वे कुछ कर नहीं सकते थे। उन्होंने सोहन और उसकी पत्नी को अपना लिया। उस दिन के बाद, सोहन एक जिम्मेदार बेटा और पति बन गया। उसका प्यार उसे सही राह पर ले आया था। इस बदलाव को देखकर उसके मम्मी-पापा भी बहुत खुश रहने लगे। इस तरह सोहन ने प्यार की बदौलत जिम्मेदारी को समझा और एक बेहतर इंसान बना।

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